अब हम भी सो गए ! अब तो जाग जाओ!

Posted by AbhishekD
September 29, 2017

Self-Published

वही सुबह थी जो कल भी थी और कल भी होगी। मगर कुछ लोगों के लिए कल नहीं आएगा, आज जो मुम्बई में हुआ उसके बाद वो 22 या ज़्यादा लोग उस नींद में चले गए जहां से आना मुमकिन नही होता। आती हैं तो बस कुछ घोषणाएं कि इतने पैसे मिलेंगे, लेकिन उन्हें कौन समझाए कि इंसानी ज़िंदगियों की कीमत रुपयों से नहीं आंकी जा सकती है। human life can not bargained by few notes.

एक बारिश, बड़ी भीड़, एक पुल और फिर कई लाशें, इनकी ज़िम्मेदारी किसकी है? इसके लिए ज़िम्मेदार कौन है? अभी तो इसकी जांच होगी, फिर रिपोर्ट भी बनेगी, मुवावजे मिलेंगे; मगर इन सब के बीच उस उम्मीद का क्या, उन आंखों का क्या जो उन लोगों के शाम को फिर घर आने का रास्ता देख रही थी?

आज की घटना की जिम्मेदारी किस-किस को दी जाए? सरकार को, BMC को या फिर लोगों को- जिन्हें समय रहते संयम से काम लेना था अफवाह नही फैलानी थी! बेशक सरकार और BMC की ज़िम्मेदारी है, साथ ही उन लोगों की भी है! सरकार को चाहिए कि वो लोगों की सुने उसका काम भी वही है। लोगों ने तो सरकार को शायद उस जगह बिठाया है जहां तक अब जनता की ही आवाज़ नहीं पहुंच पाती।

बात केवल उस पुल की नही है, बात है कि जो चल रहा है उसको चलने देने की जो आदत है उसे बदलना होगा। उस सोच को बदलना होगा कि “देख लेंगे, अभी तो कुछ हुआ नही”। शायद समय रहते किसी ने उस पुल को चौड़ा करवाया होता तो आज की सुबह हर रोज़ की तरह सुखद होती।

आज जो उस पल वहां हुआ, कल कहीं और भी हो सकता है। ज़रूरत है कुछ बुरा घटने से पहले चीज़े ठीक करने की। “प्रोटेक्शन इज़ बैटर देन क्योर” ये बात सरकार में बैठे सब लोग जानते है, मगर जानने से ज़्यादा ज़रूरी है इसको अमल में लाना। ज़िम्मेदारी की बात की जाए तो जो लोग पुल के नीचे थे उन्हें जब भीड़ बढ़ी तो कुछ करना चाहिए था, क्योंकि किसी की जान बच सकती थी उनके एक्शन लेने से ।

कहा जा रहा है कि मुम्बई फिर से उठ गया है, फिर से चल रहा है, मगर सच ये भी हो सकता है कि हम संवेदनशील नहीं रहे। आज की बात कोई घटना नहीं है, यह एक चेतावनी है कि जाग जाओ। जो पार्लियामेंट में हैं उनके लिए भी और जो लोग घर मे रिमोट हाथ मे लेकर बैठे है उनके लिए भी।

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