कैसी कितनी देशभक्ति?

Posted by Durgesh Ranjan
September 27, 2017

Self-Published

एक ऐसे समय में जब वेदनाओं का पैमाना आभासीय दुनिया  होता जा रहा है। एक जवान का वीडियो फेसबुक पर वायरल होता है। तब हमारे कुछ तथाकथित विद्वानों के साथ हाँ में हाँ मिलाना हमें विद्वान की श्रेणी प्रदान करता है। पर आये दिन उन्ही तथाकथित विद्वानों का भारत के अस्मिता पर प्रहार क्या उनके दोहरे चरित्र को हम सब के सामने  नहीं लाता? अपने आप को गरीबों और मज़दूरों का हिमायती और मसीहा बताने वाले इन क्षद्म मानवों का व्यवहार प्राण का दांव लगा रहे सैनिकों के प्रति बदल क्यों जाता है? भारत माता को अशोभनीय बात कहना किस प्रकार और किस देशभक्त की श्रेणी में उन्हें लाता है? भारतीय सेना पर हो रही ऐसी अभद्रपूर्ण टिपण्णी कोई नई बात नहीं है। बीते  कुछ वर्षों में हम ऐसी धृष्ठतापूर्ण हरकतों से रुबरु होते रहे है। पर प्रश्न यह है कि दिनोंदिन बढ़ते ऐसी हरकतों का मूल कारण क्या है? कहा है वो मीडिया जो अपने आप को बड़ी शान से लोकतंत्र का चौथा स्तंभ घोषित करने पर लगा रहता है? क्या हमारे राष्ट्र और उनके रक्षकों पर हमला आम भारतियों के भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचा रहा? क्या ये मीडिया की जिम्मेदारी नहीं कि वे ऐसे भेड़ की शक्ल में छुपे भेड़ियों की असली पहचान कराए? ऐसी आपातकाल की स्थिति में हमे निष्पक्ष और हर भेदों से अलग होकर ये विचार करने की आवश्यकता है कि हम किस तरफ है।

आवश्यकता है भारत में चल रहे मीडिया और एकेडेमिक माफिया के मिलीभगत पर वार करने की। अक्सर मीडिया, एकेडेमिक क्षेत्र के गलतियों पर पर्दा डालता रहा है और उनके  विचार को आम विचार में तब्दील करने की भरपूर कोशिश करता है। हाल ही में हुए निवेदिता मेनन का प्रकरण इसका ताज़ा उदारहण है। हलाकि निवेदिता मेनन का इतिहास ऐसे कुकृत्यों से भरा हुआ है। लेकिन ये मीडिया ही है जिसने इन्हें आजतक इतनी तवज़्ज़ो दे रखी है। भारतीय परंपरा और हिन्दू धर्म के प्रति इनके कटु बोल नये नहीं हैं। ये उस एकेडेमिक गुट का अभिन्न अंग है जो हिन्दू धर्म को विश्व का सबसे हिंसक धर्म सिद्ध करने पर घंटों भ्रामक भाषण देते हैं। जिसका उदहारण यूट्यूब पर आज भी मौजूद है। भारत के नक़्शे को उल्टा करना तथा कश्मीर को दूसरे देश का हिस्सा बताना इन देशद्रोहियों की तस्वीर को सामने लाता है। भारत की सहनशीलता को उसकी कमज़ोरी समझने वाले ऐसे भीरु गद्दारों पर अब वक़्त आ गया है जहाँ इन पर गहरी चोट की जाये।

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