क्या बीएचयू में छात्राओं के साथ छेड़खानी मोदी के लिए चिंता का विषय नहीं है

Posted by Prashant Tiwari
September 24, 2017

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यह कितनी अजीब बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युवाओं को देश की ताकत बताते हैं और उनको देश की शक्ति मानते हैं लेकिन लेकिन जब वही युवा एक गलत बात के खिलाफ आंदोलन कर रहा है तो वो वहां उपस्थित होते हुए भी उनसे मिलने या उस पर अपनी प्रतिक्रिया देने से भी कतराते हैं।

बीजेपी के चुनावी वादों में चिल्ला-चिल्लाकर यह कहा जा रहा था कि महिलाओं को सम्मान से जीने का हक मिलेगा और अगर ये वादा न भी किया होता तो क्या यह शर्मनाक नहीं है कि बीएचयू कैंपस में छात्राओं के साथ छेड़खानी हो रही है और जब इसकी अति हो गई तो उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ा? इत्तेफाक से प्रधानमंत्री भी वाराणसी में थे लेकिन उन्होंने छात्राओं से मिलने की जहमत नहीं उठाई और जब छात्राओं ने उनसे मिलने का प्रयास क्या तो उन्हें भी इसकी इजाज़त नहीं मिली।
विश्वविद्यालय के कुलपति जी सी त्रिपाठी जो कि इलाहबाद विश्वविद्यालय में शिक्षक संघ के अध्यक्ष रहने के दौरान एक प्रोफेसर के साथ हुई मारपीट पर खुद आंदोलन में शामिल हुए थे, तो क्या अब उन्हें इन छात्राओं का आंदोलन नहीं दिखा रहा है या उनके साथ हो रही छेड़खानी उनके लिए समस्या नहीं है ?
ये दोतरफा बातें नहीं चल सकती, या तो सरकार अपनी बात पर खरी उतरे या यह स्वीकार करे कि उसकी कथनी और करनी में बहुत अंतर है।
मोदी जी मन की बात में कहते हैं कि लोग देश को जानते नहीं और विदेश घूमने की ख्वाहिश रखते हैं, अब कोई उनसे पूछे कि वाराणसी भी देश के भीतर ही आता है और वहीं देश के युवा एक बेहद संवेदनशील मुड़े को लेकर आंदोलन कर रहे हैं तो आप इस बात को क्यों नहीं समझ पा रहे हैं या कि समझना ही नहीं चाहते।
या तो जो बोल रहे हैं वो करने का प्रयास करिए नहीं तो फिर ऐसी बातों को मन की बात का नाम देकर लोगों की सहानुभूति प्राप्त करने का प्रयास मत करिए, जनता सब समझती है उसका भी वक्त आएगा तो वो जवाब देगी।

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