गुड टच बैड टच का अंतर समझे लड़कियाँ

Posted by सौरभ सौजन्य
September 20, 2017

Self-Published

#प्रद्युम्न #रेयान #गुरुग्राम
की घटना के बाद।

अच्छा है!
पर बच्चों के अलावा ज़रा बड़ी लड़कियों को भी समझाएं कि ये जीजा फूफा कजिन टाइप के लोग जो प्यार स्नेह लाड़ जताते हैं वो कब वासना पूर्ण होता है कब सचमुच का स्नेह (जो शायद आजकल नहीं ही होता)!
एक बच्ची जान ही नहीं पाती कि कब वो दूसरों के लिए सेक्स ऑब्जेक्ट हो गयी है।राक्षस तो 5 वर्ष की बालिका या बालक को भी हवस की निगाह से देखते हैं।
कल को #मानवाधिकार का स्यापा करने वाले आदत के मुताबिक इस रैयानी ड्राइवर के पक्ष में खड़ा दिखेगा ।
मानवाधिकार सिर्फ अपराधियों के लिए ही होता है।
रिश्तेदारों से सावधान
ड्राइवर चौकीदार धोबी कामवालों पुरोहितों अध्यापकों ट्यूटर्स से सावधान।पुरुष जाति से सतर्क ।
ये उत्तेजित पशु कब हमला कर दें ,भरोसा नहीं।
इनका इलाज लिंग उच्छेदन ही है।
मुझे क्रूर दंड पसंद हैं।
मुझे तानाशाही पसंद है।
लोकतंत्र और मानवाधिकार पशुओं के लिए नहीं है।
हम हिंदुस्तानी 70 वर्ष के पशु हैं।
इति सिद्धम!

सौरभ सौजन्य

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