गौरी लंकेश तो मर गई। अब आप क्या कर सकते है ? सोचिए।

Posted by Vineet Kumar
September 7, 2017

Self-Published

क्या है गौरी लंकेश? सच पूछिए तो ५ अगस्त से पहले ये नाम कभी सुना भी नहीं था। शायद ज़रूरत ही नहीं पड़ी। एक ही दिन में इतना सुना देखा और पढ़ा की गौरी लंकेश साक्षात दिखने लगी है। गौरी उस दिये कि तरह लगती है जिसने उजाले के लिए खुद को जला दिया। सोचिए क्या मिलता होगा एक पत्रकार को किसी की खिलाफत कर के। थोड़ी तारीफ। थोड़ा स्नेह ।थोड़ी दुआए , यदि किसी भला हो जाए तो। और क्या मिलता होगा ? और जाता क्या है , जान।
और मूक खड़ा समाज मूक ही रह जाता है।

क्या तकलीफ हो अगर पड़ोसी के घर में आग लगी हो, दर्द तो अपने घर को जलता देखने में है। पर शायद ये गौरी जैसे लोग है जो पानी की बलटिया लेकर सबसे पहले पहुंचेंगे। समाज बस जलाने वाले को याद रखता है , क्यूंकि वहीं शक्ति शाली है। यह सिर्फ संयोग नहीं है कि वेदकाल में अग्नि को ही सबसे शक्ति शाली माना जाता था और उसकी वंदना की जाती थी। आखिर हम हानि करने वाले की वंदना क्यूं करते है। संरक्षक की क्यूं नहीं। क्यूं हम विनाशक शिव की पूजा करते है परन्तु सृजनातमक ब्रह्म की नहीं। यह मानवजाति की वर्षों कि संरचना है। एक दिन ,साल या सदी में नहीं बदलेगी । इसे सादीयां लगेंगी।

तो क्या मोल है गौरी लंकेश की ज़िंदगी का? ५५ की उम्र में उसे भी पोते पोतियों की कामना करके राम जाप में लग जाना चाहिए था। वो किसेे जगाने में लगी हुई थी। किसी सरकार के खिलाफ तो नेता बोलते है , क्या उससे भी नेता बनना था? अगर बनना भी था तो क्या हम पाकिस्तान है जहां नेताओं को सारे आम गोली मारी जाती है।
ऐसी घटनाए हमारे लिए खतरे की घंटी होनी चाहिए क्यूंकि अगर ऐसा ही होता रहा तो एक दिन पाकिस्तान में सरकारी खिलाफत करने वालों को बोला जाएगा , इसे भारत भेज दो।

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