गौरी लंकेश मर्डर : अंध भक्तों ने उठाई बंदूकें और फिर गला दबा दिया एक आवाज का !

Posted by Avdhesh Pareek
September 9, 2017

Self-Published

क्या सरकार के खिलाफ बोलना, सच को सबके सामने लाने की सज़ा अपनी जान गंवा देना है? क्या सच को बेपर्दा करने वालों को घर में घुस कर गोलियों से भून दिया जाएगा? क्या इस देश में अपनी विचारधारा को सबके सामने रखने वाले को जीने नहीं दिया जाएगा ? जिस तरह से एक लंबे अरसे से एक के बाद एक निष्पक्ष और बेबाक पत्रकारों को मौत के घाट उतारा जा रहा है..ये सब देख कर कभी कभी मुझे संदेह होता है ये वो ही भारत है ना जहां सबको अपनी बात कहने की आज़ादी दी हुई है, ये वो ही भारत है ना जहां के संविधान को सेकुलरिज्म का तमगा मिला हुआ है, ये वो ही संस्कृति हैं ना जो सबसे जो सबसे पवित्र होने का दावा करती है?

एक के बाद एक बेबाक बोलने वाले लोग जो सरकार के कच्चे चिथड़ों की पोल खोलकर जनता को सच्चाई से रूबरू कराते हैं उन्हें घर में घुसकर, पूरे सिस्टम को चुनौती देते हुए गोलियों से, चाकुओं से मार दिया जाता है।
हम और कितनी तुच्छ राजनीति का शिकार होंगे अब? हम निजी स्वार्थ और सत्ता की लालसा में और कितना नीचे गिरेंगे? इस बारे में अब सोचना बहुत जरूरी हो गया है। मीडिया को हमेशा से इस देश के सिस्टम में तीसरा स्तम्भ माना जाता रहा है पर आज हम उसी मीडिया के नुमाइंदों को जिस तरह से कुचल रहे हैं वो बेहद ही शर्मनाक और भयानक है।

अगर इन्हीं लोगों की आवाज को दबा दिया जाएगा, इन्हीं के मुंह को गोलियों से बंद कर दिया जाएगा तो वो समय भी दूर नहीं होगा जब हम अपने ही बनाये गड्ढों में गिरे हुए तिलबिलाते नज़र आएंगे। और फिर ना तो ये सरकार बचाएगी और ना ही ये सिस्टम !

और ये तो चाहे कोई सरकार हो या कोई प्रधानमंत्री हो..सच कितने दिन दब कर रहेगा ..निकलेगा एक दिन तो और जब निकलेगा तब झूठ भरे बाजार में सबके सामने नंगा हो जाएगा।

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