जंग अभी बाकी है ….

Posted by Renu Ranga
September 13, 2017

Self-Published

जंग अभी बाकी है ….

 

जिंदगी की असली उड़ान अभी बाकी है,

जिंदगी के कई इम्तिहान अभी बाकी है,

अभी तो नापी है मुट्ठी भर जमीन हमने ,

अभी तो सारा आसमान बाकी है. !

 

हालिया हुए तीन तलाक की जीत कुछ इसी तरह की दास्तां को बयां करती है! तीन तलाक का  खौफ को जो अक्सर मुझे लगा मुस्लिम महिलाओं के चेहरे पर देखा जा सकता था अब वह मुस्कुराहट में बदल चुका है! तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट की रोक से यह तो साबित हो चुका है कि मुस्लिम महिलाओं को सम्मान देने में कानून ने कोई कसर नहीं छोड़ी! सरकार भी पूर्ण रूप से मुस्लिम महिलाओं के साथ खड़ी नजर आई ! अब इसे राजनीति कहिए या वोटबैंक बढ़ाने के तरकीब कुछ भी हो पर वह इससे उन महिलाओं को सम्मान प्राप्त हुआ जो अभी तक तीन तलाक के डर और खौफ के साए के तले जी रही थी! वही मीडिया ने भी बढ़ चढ़कर इस मुद्दे को जीवंत रखने की भरपूर कोशिश की! हर वक्त किसी न किसी न्यूज़ चैनल पर तीन तलाक से जुड़ी खबर से जुड़ी बहस देखी और सुनी जा सकती थी !

हालांकि 2014 में जब सायरा बानो ने तीन तलाक के खिलाफ यह जंग छेड़ी थी ,तब यह डगर इतनी भी आसान नहीं थी! पर कहते हैं ना जब कुछ ठान लिया जाए तो कुछ भी मुश्किल नहीं !ऐसा ही सायरा बानो की लड़ाई से साबित हुआ जोकि इस भयानक कुरीति के खिलाफ थी! उनका साथ अफरीन रहमान और जाकिया सोमन जैसी अनेकों मुस्लिम महिलाओं ने भी दिया! भले ही हिंदू महिलाएं खुलकर सामने नहीं हो ,लेकिन उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के साथ हाथ से हाथ मिला कर इस अदम्य साहस का परिचय दिया वह भी प्रशंसनीय था ! भले ही वह अलग धर्म से क्यों ना हो परंतु इस कुप्रथा की आड़ में जो घुटन मुस्लिम महिलाएं सहन कर रही थी, हिंदू महिलाएं भी उस से अनभिज्ञ नहीं थी या यूं कहिए कि वह भी इस दर्द को भली-भांति महसूस कर पा रही थी ! मेरा मानना भी कुछ ऐसा ही है, तीन तलाक एक स्त्री के अस्तित्व पर वह सवालिया निशान है, जिसे हर मुस्लिम महिला अपनी पूरी जिंदगी ढूंढती रहती है! शरीयत के हिसाब से अगर कोई मुस्लिम पुरुष तीन बार तलाक तलाक तलाक कहे तो इससे इसी के साथ जीवन भर का वह पावन रिश्ता फना होकर रह जाता है !जो कि निगाहों का निगाह के वक्त कुबूल है कहकर अपनाता है और वह स्त्री यही सोचती है कि आप अपनी ताउम्र किसके सहारे बिताएं क्योंकि दुनिया किस बेरहमी तक गिर चुकी है यह किसी से छिपा नहीं है! हर कोई भेड़िया अकेली और मजलूम औरत का शिकार बनाने में लगा है !तीन तलाक भी इसकी एक वजह है क्योंकि तलाक के बाद बेगम को अपने शौहर और उसकी जायजाद पर कोई अधिकार नहीं रहता ! ऐसे में वह क्या करें इसी सवाल ने तीन तलाक के मुद्दे को जन्म दिया था !

22 अगस्त 2017 को तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला मुस्लिम महिलाओं की बराबरी की लड़ाई की सिर्फ शुरूआत है! अभी तो इन्हें बहुत लंबा सफर तय करना है! माना जा रहा है कि हिंदू मुस्लिम महिलाएं भी हिंदू मैरिज एक्ट की तरह कुरान आधारित मुस्लिम मैरिज एक्ट की मांग कर रही हैं! क्योंकि हिंदू मैरिज एक्ट के अनुसार लड़की की उम्र शादी के लिए 18 साल होना अनिवार्य है, लेकिन मुस्लिम समाज में ऐसा कुछ नहीं है !अभी मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार लड़की रजस्वला होने के उम्र को ही शादी की उम्र माना जाता है ! यही महिलाओं के शोषण का वायस बन गया है! कानून में महिलाओं की मर्जी को भी शामिल किया जाना चाहिए ! बहुविवाह प्रथा कदम की जानी चाहिए और बच्चों की श्रेष्ठ सरपरस्ती के लिए उस एक्ट में मुस्लिम महिलाओं को प्रॉपर्टी में बराबर का अधिकार देने के लिए उत्तरदाई होना चाहिए ! तो यह कहना गलत नहीं होगा कि जंग अभी बाकी है! जब एक तीन तलाक जैसी कुप्रथा को खत्म करने में इतने साल लग गए तो अभी तो सारी कुप्रथाएं समाज में बाकी है !

आशा है कि इस जंग की तरह ही आगे की जंग में भी हम ऐसे ही एक साथ खड़े होंगे ! बिना कोई जाति भेद, लिंग भेद और धर्म पर के क्योंकि

सफर तो अभी शुरु हुआ है ,मंजिल मिलना अभी बाकी है जिया है अभी तो जिंदगी का छोटा सा हिस्सा हमने, अभी तो मुकम्मल जहां मिलना बाकी है!

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