जय राम जी की

Posted by Sandeep Anand kumar
September 1, 2017

Self-Published


जय राम जी की । जब बात राम राज्य की होतो शुरू जय राम जी से ही करते है । भारत में या कह लीजिए दुनिया में कहीं भी जो भी लोग सुनते हैं वह लोग देखना चाहते है। जैसे किसी धार्मिक कथा को सुनकर लोग कहते है कि कथा अच्छी थी परंतु इस तरह का आचरण आज को अपनाता है, हमने तो किसी को ऐसा आचरण अपनाते नही देखा। बस यही कमी रह जाती है कि हमने नही देखा अरे भाई शुरुआत आप से मुझसे तो हो सकती है किसी न किसी को शुरुआत करनी होगी तभी तो लोग देखेंगे और अपनाएँगे ।

आज हर कोई राम मंदिर की बात करता है ।राम का मंदिर बनाने के अपने विचार रखता है चाहे वह राजनीतिक दल का हो या कोई सामाजिक संगठन, हर कोई इसी बात पर जोर देता है कि भगवान राम का भव्य मंदिर बनना चाहिए।
राम के मंदिर विवाद के बारे में हर कोई जानता है परंतु राम को कोई नहीं जानता। क्योंकि जब हम पैदा हुए तब ना तो राम थे, नही रामराज्य, नही उच्च मापदंडो वाला सामाजिक तानाबाना।
सत्ता के लिए संघर्ष अपनी पराकाष्ठा पर था सत्ता के लिए पुत्र ने पिता की हत्या की अपने ही खानदानों का अंत किया तो यह संभव कैसे होता कि हम राम राज्य में पैदा होते हैं
जहां आज मां बहनों को वासना का शिकार बनाया जा रहा है,जहां अपनी उदर पीड़ा को मिटाने के लिए किसान संघर्षरत है, बेरोजगारी अपनी चरम सीमा को पार कर चुकी है, चारों तरफ जनसंख्या का विस्फोट एक खतरे की तरह मंडरा रहा है, बेटियों को मृत्यु के घाट उतारा जा रहा है, उन्हें जन्म तक नहीं लेने दिया जा रहा है। समाज और राष्ट्र ऐसी परिस्थिति में आ खड़े हुए हैं जहां सबसे अधिक हमें राम के विचारों की आवश्यकता है। राम के विचार यानी रामराज्य आज भारत को इसी राम की आवश्यकता है जिसमें वह संस्कार हो जो अपने पिता की आज्ञा पालन हेतु 14 वर्ष वनवास में काट दे, ऐसे पिता जिन्होंने अपनी पत्नी को दिए हुए वचन को निभाने के लिए अपने पुत्रों का त्याग कर दिया, ऐसे भाई जिनकी सेवा में 14 वर्ष का वनवास गमन किया, ऐसे भाई जिन्होंने सिर्फ अपने बड़े भाई राम की चरण पादुका हो को पुण्य मानकर 14 वर्ष तक शासन चलाया, पुत्री वह हो जो जानकी हुई सुख वैभव समृद्धि का त्याग कर पत्नी धर्म निभाया।
आज उसी तरह के आदर्श को अपने जीवन में उतारने की हर भारतीय को आवश्यकता है अगर प्रत्येक भारतीय इन्हीं विचारों को अपने जीवन में उतारेगा तो ही राम राज्य की स्थापना हो जाएगी।
राम आज बस सत्ता के लिए उपयोग का साधन मात्र बन गए, राम के विचारों पर सामाजिक कब्जा हो गया है सत्ता परिवर्तन के साथ ही उनका उपयोग भी बदल जाता है हर बदलती सत्ता का अलग ही राम है जातिवाद के जहर को मिटाने के लिए श्री राम ने शबरी के झूठे बेर खाए परंतु व जातिवाद पर इतना गहरा हो गया है कि आप विरोध भी नहीं कर सकते वरना आप अपनी जाति व्यवस्था से सीधे बाहर हो जाएंगे और आप पर आर्थिक शारीरिक दंड अलग से मिलेगा
प्रभु राम के विचारों को भारत में स्थापित करने से और उनका अनुसरण करने से ही राम राज्य की कल्पना पूर्ण होगी।
संदीप पंचाल

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