जीना इसी का नाम है।

Posted by Adeeb Mohsin Siddiqui
September 28, 2017

Self-Published

इस भयंकर तापमान में सड़के जल रही.. लू के थपेड़ो में लोगो का हाल बेहाल है। फिर भी कुछ लोग हैं जो बिना परवाह किए अपने काम लगें हैं। सड़क के किनारे चिलचिलाती धूप में ये बुजुर्ग महिला आठ दस बेल रखकर बेच रही थी।आँखें धँसी हुयी हड्डी चमड़ी एक हुयी थी बड़ी उम्मीद भरी निगाहों से टकटकी लगाये इन्तज़ार कर रही थी! लेकिन लोगों को देखकर लगा कि यार वास्तव में आज इन्सान इतना निर्मम, इतना कठोर हो गया है! मैंने अक्सर ग़ौर किया है चाहे वो रिक्शा चलाने वाले हों या फिर हमारी जरूरत के सामान बेचने वाले हों 5 रूपये के लिए लोग इतना अकड़ कर बोलते हैं मानो 5करोड़ डूबने से बचा रहे हो! और यही लोग जब सिटी माॅल,केएफसी ,मैकडोनाल्ड और पिज़्ज़ा हट में अपनी पत्नी या गर्लफ्रेंड के साथ कोल्ड-काफी पीने जाते हैं.तो बैरा को 50 रुपया एक्स्ट्रा देकर चले आते हैं..ये सब सोचकर मैं असहिण्णु होने लगता हूँ । यार… ये लोग इतनी मेहनत किसी व्यपार या शोपिंग माँल बनवाने के लिए नहीं करते बल्कि अपने जीवन यापन के लिए करते हैं अपनी लाचारी से विवश होकर भीख नहीं मांगते बल्कि अपने स्वाभिमान के लिए मेहनत करते हैं। वैसे भी आज के इस दौर में ये सब सोचने की फुर्सत किसे है? स्टेटस डाउन हो जाएगा न।कई बातें हैं…बस यही कहूंगा की..इस प्रचण्ड गर्मी में रिक्शे वालों से ज्यादा मोल भाव मत करिये.. जब बैरा को पचास देने से आप गरीब नहीं होते तो रिक्शे वाले को पांच रुपया अधिक देने से आप गरीब नहीं हो जायेंगे.. हो सकता है..आपके इस पैसे से वो आज अपनी चार साल की बेटी के लिये चॉकलेट लेकर जाए…तब बाप- बेटी की ख़ुशी देखने लायक होगी न। कल्पना करियेगा जरा। जरा सडक़ों पर आइए..एक दिन पेप्सी कोक मत पीजिये…मत जाइये.केएफसी,मै कडोनाल्ड और पिज्जा हट। देखिये न कोई जिम्मेदारियों का पहाड़ लिए बेल का शरबत, खरबूजा, और सतुई बेच रहा है..एक सेल्फ़ी उस शरबत बेचने वाले के साथ भी तो लिजिये। जरा झांकिए इनकी आँखों में एक बार गौर से… उम्मीदें आपको घूरती मिलेंगी.. केएफसी कोक और मैकडोनाल्ड का पैसा पता न कहाँ जाता होगा.. लेकिन आपके इस पन्द्रह रुपया के बेल से, और दस रुपया के शरबत से 5 रुपये के नींबू पानी से किसी खेदन का तीन साल का बबलुआ इस साल पहली बार स्कूल जाएगा. किसी मुनेसर के बहन की अगले लगन में शादी होगी. किसी खेदन की मेहरारू कई साल बाद अपने लिए नया पायल खरीदेगी.. बस इतना जानिये की लेने से ज्यादा देने में आनंद है। खाने से ज्यादा खिलाने में सुख है। जीना इसी का नाम है।
इस पिक को अपलोड करने का मेरा मकसद अपनी दरियादिली या मैं बड़ा रहमदिल इंसान हूँ का शो आॅफ करना नही है! बल्कि मैं एक सन्देश देना चाहता हूँ उन लोगों को जो फेसबुक पर तमाम सुविचार,नेकियाँ, कथन पोस्ट करते रहते हैं पर अफसोस अमल एक नही करते।

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