दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव:मनी और मसल के बीच में निर्दलीय उम्मीदवार

Posted by Praveen Yadav
September 10, 2017

Self-Published

मेरा नाम राजा चौधरी है। मैं 2017 DUSU चुनाव के लिए अध्यक्ष पद का उम्मीदवार हूँ। मैं इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ रहा हूँ। 4 सितंबर को जब मैं चुनाव आयोग के आफिस में अपना नॉमिनेशन फ़ाइल करने गया तब वहां स्क्रूटिनी के दौरान ABVP के उम्मीदवारों के द्वारा मुझे आफिस के अंदर धमकी दी गई। मेरा कॉलर पकड़कर मुझे आफिस के बाहर ले जाया गया और आक्रामकता दिखाई गई। रजत चौधरी जो ABVP के तरफ से उम्मीदवार है उसने कहा कि अगर मैने अपना नाम वापिस नही लिया तो वो मेरे नाखुन निकलवा देगा, मुझे गांव भेज देगा, भैंस के आगे बांध देगा। इस तरह की गुंडागर्दी वो भी आफिस के अंदर अपने आप मे अपमानजनक बात है। मैं उस दिन के बाद काफी डर गया था। मेरे पास पुरे घटना की ऑडियो रिकॉर्डिंग है जो मैंने पुलिस को जमा कर दिया है। पुरी घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग आफिस के सीसीटीवी कैमरा में भी रिकॉर्ड हुआ है। पुलिस ने जांच के लिए उन सभी को निकलवाने के आदेश दिए है।
4 सितंबर के बाद दो दिनों तक मैं अपने दोस्तों के फ्लैट में रहा। अपने सुरक्षा को ध्यान में रखकर मैं पूरे दिन कमरे में बन्द था। मेरे साथ जो लोग मेरे चुनाव के लिए प्रचार कर रहे है वो भी इस घटना के बाद काफी घबराए हुए थे।
इसके बाद 5 सितंबर को फिर से अनजान नंबरो के द्वारा दिन में मुझे कॉल आए। मुझे अपना नाम वापस लेने के लिए पैसो का प्रलोभन भी दिया गया और जब मैंने मना किया तो फिर धमकी भरे अंदाज़ में मुझसे बात की गई। सभी नंबर और काल डिटेल मैने पुलिस को अपने शिकायत में बता दिया है।
इतनी धमकियों के बावजूद मैंने अपने आदर्शो और अपने साथियों के मेहनत का सम्मान करते हुए नाम वापस न लेने का फैसला किया।
मैं पुरी तरह आश्वस्त था कि मेरा नॉमिनेशन फाइनल हो जाएगा और मेरा नाम बैलट लिस्ट में आ जाएगा। मैने अपने सारे दस्तावेज जमा करवा दिए थे। प्रोविजनल लिस्ट में भी मेरा नाम था।
6 सितंबर को शाम के 7 बजे जब फाइनल लिस्ट आई तब मैंने देखा कि मेरे नाम को उसमे से हटा दिया गया है । तुरंत ही हम सब चुनाव आयोग की ऑफिस पहुँचे। वहां पहले ये कहा गया कि मेरा एडमिशन लॉ फैकल्टी में बिना हलफ़नामा(Affidavit) के हुआ है इसलिए नॉमिनेशन के साथ साथ मेरा लॉ फैकल्टी के लिस्ट से भी नाम हटा दिया जाएगा। जबकि मैंने अपना हलफ़नामा नॉमिनेशन के समय ही जमा करवा दिया था। अगर मेरा एडमिशन बिना हलफनामे के हुआ होता तो मुझे आइडेंटिटी कार्ड कैसे मिल सकता है ?
हलफनामे की कॉपी दिखाने के बाद फिर से एडमिशन के दौरान बैंक रिसीप्ट को लेकर सवाल किया जाने लगा। साफ़ साफ़ प्रतीत हो रहा था कि चुनाव आयोग किसी के इशारे पर काम कर रहा है। मेरे साथ मेरे 10-12 समर्थक थे जो मेरे लिए चुनाव प्रचार करते है। उनमें पांच छ लड़के और पांच छ लड़कियाँ थी। इतने भय और आतंक के माहौल में हम सब शाम 7 बजे से रात के 3 बजे तक वही धरने पर बैठे रहे। बारिश में भीगते रहे और अपने हक़ के लिए डटे रहे।
इसी दौरान फिर से ABVP के रजत चौधरी का फोन आया और उसने फिर से धमकी भरे अंदाज़ में बात की, कहा कि अगर चुनाव लड़े तो तीन साल तक जीना मुश्किल कर दुँगा। फिर भी हमने हिम्मत नही हारी।
इतने संघर्षो के बाद रात के तीन बजे आयोग ने एक नई लिस्ट बनाई और मुझे चुनाव लड़ने के अपने अधिकार से अभिभूत क़िया। मेरा नाम बैलट नंबर 7 पर आया।
रात के वक़्त इतनी असुरक्षा और भय के बीच पुलिस ने संरक्षण से हमे अपने अपने घर छोड़ा। उस दौरान भी कुछ गाड़ियां हमारा पीछा कर रही थी।
आज सुबह हमसब पुलिस स्टेशन पर एकत्र हुए। हमने अपना FIR फ़ाइल किया।। पुलिस से सुरक्षा की मांग कि जो कि मौरिस नगर पुलिस स्टेशन की SHO आरती शर्मा ने देने को लेकर आश्वस्त किया था।
दिल्ली विश्वविद्यालय के गुंडागर्दी से भरे माहौल में मेरे जैसे आम छात्र का चुनाव लड़ने का फैसला लोकतांत्रिक मूल्यों को पुनः स्थापित करने का एक प्रयास है। इतनी रूकावटो और डर के बीच भी एक उम्मीद है कि मेरे जैसा एक आम छात्र यहाँ चुनाव लड़ सकता है। हम चुनाव आयोग की लापरवाही की निंदा करते है, पुलिस की सुरक्षा का सम्मान करते है। उम्मीद करते है कि सिस्टम एक अच्छे माहौल बनाने की मेरी इस कोशीश में मेरा साथ देगा। साथ ही अपील भी कर रहे है कि इस तरह की गुंडागर्दी करने वाले लोगो पर कानूनी करवाई की जाए।

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