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नवरात्रि, सच में स्त्री-उपासना ??

Posted by Saurabh Rathore
September 22, 2017

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‘नवरात्रि’….सुनने में ही अच्छा सा लगता है कि पूरे नौ दिन और रात स्त्री-रूपी देव की उपासना का त्यौहार, लेकिन असल में क्या ऐसा है ??

इस देश में अधिकांशतः स्त्रियों को पूजा जाना तो दूर, उन्हें उनके हिस्से की सही इज़्ज़त और सम्मान तक हासिल नहीं होता। भ्रूण-हत्या से बच जाएँ तो अस्मिता का प्रश्न, ईव-टीज़िंग, मोलेस्टेशन, और उसके बाद भी दूजे-घर (ससुराल) में सम्मान का सवाल और सबसे अहम इच्छा के विरुद्ध मेराइटल-रेप जैसा मुद्दा।

बस भोग्या भर बना दिया है स्त्री को, जिसके एहसासों की न क़ीमत है कोई, और न सम्मान…विज्ञापनों में दिखावे की वस्तु-भर, और एग्ज़िबिशन्स में दिखावे का सामान। मुश्किलों की असल वजह स्त्री भी है, जो ‘न’ नहीं कहती, जो कि न केवल कहना चाहिए, बल्कि करके भी दिखाना चाहिए।

पार्वती, और दुर्गा नहीं काली बनिए… तभी अस्मिता और सम्मान की रक्षा कर सकेंगी !

बहरहाल.. ‘नवरात्रि की ढेरों शुभकामनाएँ’ !

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