नाम के पीछे छाप छोड़ती कायरता !

Posted by MJ Mayank
September 20, 2017

Self-Published

जान जाए पर जातिवाद नहीं ! बहुत सारे मित्र बंधू बहुत दिनों से जातीय राजनीती ,आरक्षण और भेदभाव पर नेतागिरी कर रहे … खैर मेरा तो काम ही यही हैं .. मैं उन तमाम लोगो से इस पोस्ट को पढ़ने का आग्रह करूँगा … बात करते हैं जातिगत राजनीती की , तो ये सिर्फ उत्तर प्रदेश और बिहार तक ही सिमित हैं , और यह नितीश , मायावती ,लालू यादव के इर्द गिर्द ही घूमती हैं , इनका माना हैं .. मैं एक छोटा सा उदाहरण दूंगा ऐसी मानसिकता से ग्रसित महानुभावो को … मोदी उत्तर प्रदेश में वाराणसी से उम्मीदवार थे . वहां के पटेल बहुल इलाकों में उनके चुनाव प्रचार में लगे कार्यकर्ताओं ने जो पोस्टर बांटे , उन पर सरदार वल्लभ भाई पटेल, ‘अपना दल’ की नेता और स्थानीय पटेल समुदाय की प्रतिनिधि अनुप्रिया पटेल और स्वयं नरेंद्र मोदी के फोटो छपे थे. पटेल नाम को चुनाव में भुनाने की यह एक बेईमान कोशिश थी क्योंकि सभी जानते हैं कि गुजरात के पटेल उत्तर प्रदेश के पटेलों की तरह पिछड़ी जाति में नहीं गिने जाते.खुद नरेंद्र मोदी अपने को पिछड़ी जाति का बताकर सहानुभूति बटोरने का काम करते हैं .. तो फिर जातिगत राजनीती सिर्फ बिहार और उत्तरप्रदेश तक ही कहा सिमित हैं … अब जरा विचारधारा की लड़ाई में जातिगत राजनीती की बात करे तो आरएसएस जो आज आंबेडकर से लेकर भगत सिंह की पूजा करती हैं , सिर्फ वोटो की ध्रुवीकरण करने की कोशिस में , उनकी विचारधारा हमेशा से इनके खिलाफ रही और कभी संविधान को नहीं माना … लेकिन आज सत्ता की लालच में विचारधारा की रेखा को पार कर लिया … लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता हैं की आखिर इसे कैसे खतम कर सकते हैं ? जब जब मैंने कुछ मानवता की बात की , वो राजनितिक मित्र उसे जातिगत राजनीती से जोड़कर देखते हैं .. मुझसे निचले तबके की लड़की से शादी करने  को कहा जाता हैं .. खैर , यह वक़्त शादी की नहीं मेरी ,लेकिन एक शुरुआत हम सब कर सकते हैं की जो लोग सिर्फ फेसबूकिया कीड़ा बन तंज कसते हैं , और जातिगत भेद्बभाव को समाप्त करने की बात करते हैं , खुद अपने नाम के पीछे अपनी जाती की पहचान बता जाते हैं और उस पहचान की आड़ में अपनी मर्दानगी और इतिहास की आड़ में अपनी नाकामी को छिपाने का काम करते हैं … तो हर वो लोग जो सोशल मीडिया पर अपने नाम के पीछे यादव , राजपूत , सर्राफ , कुशवाहा लगा कर इस भेदभाव को ख़तम करने का बेडा उठा रखे हैं … हसीं आती हैं ऐसी नादानियों पर , एक तरफ खुद की जाती का परिचय दे जाते हैं और दूसरी तरफ राजनीती का रोना रोते हैं … मुझपर आरोप लगाने वाले जो निचले तबके लड़की से शादी की बात कहते हैं ,उनके लिए सीधा सा जवाब हैं की अभी उम्र मेरी शादी की नहीं ,अपनी शिक्षा को सही दिशा देने की हैं … लेकिन हां जो काम अभी मैं कर सकता हु एक बेड़ा उठाने की , बेड़ा नाम के पीछे घमंड को प्रचारित करने के खात्मे को लेकर … है साहस सामाजिक न्याय दिलाने की , तो आज अभी से एक प्रण ले , की सोशल मीडिया पर अपने नाम के पीछे की कायरता को ख़तम करे .. हां कायरता ,क्यूंकि सिर्फ कायर ही अपने नाम से नहीं , पूर्वजो की उपाधि ,सोहरत पर जीते हैं ..

 

बस ख्वाब हमारा अपना है, इस ख्वाब को ज़िंदा रखना है

और ख्वाब इशारा करता है, दुन्या को बदल के रहना है।

शिक्षा के बल-बूते पर

आज नहीं तो कल गिरना है  , दूरी की दीवारों को

नफरत की बुनियादों को !!  By © Mj mayank…

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