निठल्ला, नकारा, निक्कमा ………..”विपक्ष”

Posted by हिमांशु रतूड़ी
September 24, 2017

Self-Published

पल्ले परसों दिन तक एक डायालोग बड़ा फेमस हो रखा था कि …”विकास पागल हो गया है “……. ये एक पाटीदार आन्दोलन के एक ख़ास मेरे जैसे ही नोजवान  आन्दोलनकारी ने गुजरात कि राजनेतिक पृष्ठभूमि को देखकर दिया है मैंने इन डायलोग रच्याकर्ता को ‘ख़ास आन्दोलनकारी’ शब्द से इसलिए संबोधित किया है क्योंकि इनके सम्बन्ध पाटीदार आन्दोलन के महानायक हार्दिक पटेल जी से काफी घनिष्ठ है . लेकिन अभी तक आप सोच रहें होंगे कि इन महाशिया(मैं अपनी बात कर रहा हूँ) ने तो विपक्ष को खूब गरियाया है लेकिन ये तो कुछ और ही बाते करने में जुट गये परन्तु जितने भी  लोग ऐसा सोच रहे है वे थोड़ी ठण्ड रखे…तो बात ये है देवियों और सज्जनों हकीक़त कि में ‘विकास नही यहाँ तो पूरी कि पूरी डेमोक्रेसी  बउरा गयी है’  मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि नालायक विपक्ष को गुजरात में अपनी पकड़ बनाने के लिए भी पाटीदार के ख़ास  आन्दोलनकारी के डायलाग के सहारे सत्ता पक्ष पे हमला करना पड़ रहा है.

आखिर मैं लगातार विपक्ष को “निठल्ला , नकारा , निक्कम्मा ”  जैसे विश्लेषणों से क्यों पुकार रहा हूँ इसका कारण है लोकतंत्र के एक हिस्से का कमजोर होना, क्योंकि मेरा मानना है कि जितनी लोकतंत्र को मजबूती से खड़े रखने में हाथ पक्ष  का होता है उतना ही विपक्ष का भी. आपको याद होगा किस तरीके से देश में लगातार रेल हादसे हुए लेकिन आप बताइए इसको देखकर कौन सी बड़ी पार्टी ने  धरना दिया सच तो ये है दोस्तों कि आम जनता कि किसी को परवाह ही नही क्योंकि उन रेल हादसों में कोई बड़ा नेता नही मारा इसीलिए कोई   हंगामा नहीं कटा… अगर कोई वी.आई.पी मर गया होता तब देखते सदनों के बहार चक्कर और तो और जो पार्टी अपने आप को आम आदमी का मसीहा मानती है वे भी आम आदमियों के मरने पर मुह ना खोल पाई हद तो तब हो जाती है जब प्रधान मंत्री विपक्ष से ६० सालो का हिसाब मांग रहे है किन्तु विपक्ष में  इतना सामर्थ्य नही कि खड़े होकर बोल सके के कि हमने ये किया  है  और वे तब  शुक्रिया बोलते है ट्वीट कर जब  विदेश मंत्री यूनाइटेड नेशन में राष्ट्रहित को  मद्देनज़र रखते हुए पाकिस्तान को धो रही थी तब इन्हें याद आया कि मंत्री मोहतरमा जी   ने  तो इनके काम कि उपलब्धियां गिना दी.

 

 

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.