नेताओ के गुलाम-नक्षल समूह या फिर-सरकार से पीड़ित नक्षलसमूह

Posted by Amol Chimankar
September 24, 2017

Self-Published

समस्याअपने देश की-हर तरह से अपना सर उठाये खड़ी है-पर बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या आज भारत देश की बनती जा रही है- उसपरनक्षलवाद की समस्या सबसे गम्भीर समस्या देश की हो गई है- आयेदिन नक्सलवादियों के हमले में हमारे सैनिक मारे जा रहे है-और मारने वाले भी अपने ही लोग है- औरजिन्हें मारा जा रहा है-ओ भी अपने और जिनके द्वारा मारा जा रहा है-ओ भी अपने-

इस पर विचार करना अतिआवश्यक हो जाता है की- ऐसा क्यों-?
जब मैं-पढता हु-की इसका कारण क्या हो सकता है-

जब इस विषय पर मै-ये जानने की कोशिश करता हु तो
काफी भयावह प्रश्न उपश्थित हो जाते है-
क्या देश के सैनिक-हमारे ही देश के ग्रामीण और जंगलों में
रहने वाले नागरिको के साथ दुराचार करते है-उनकी महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार करते है-
उनका बलात्कार करते है-
जब यह पढ़ने और सुनने में आता है तो देश की रक्षा करने वाले सैनिको की यह भक्षकता सुनकर रोंगटे खड़े हो उठते है-और यह विचार उपश्थित हो जाता है कि-इन रक्षको से बेहतर अन्य विदेशी हमलावर ही ठीक है-जो मात्र देश को लूटते और बर्बाद तो करते है पर आत्मसम्मान को तो नही ठेस पहुचाते।
देश की आन्द्रसुरक्षा करने वाले इन सुरक्षा कर्मियों की यह वास्तविकता जान काफी हृदय खुद पर ही दोष का ठीकरा फोड़ने लगता है-और विचार करने पर विवश् हो उठता है-

परन्तु जब दूसरे पहलुओं पर विचार किया जाता है कि-
और साथ ही कल ही मैंने एक सज्जन व्यक्ति से मुलाक़ात की-
जो वही सरकारी विभाग में अपनी सेवा देने का कार्य करता है,और साथ ही वह वहां उनके बीच में पुलिशकर्मियो के बीच में रहता है जो अन्य सरकारी विभाग में कार्य करता है-
जब उस से मेरा वार्तालाप हुआ तो-काफी भयावह और आवश्यक जानकारी से मेरा परिचय हुआ-
जिस से मैं तो ये जान गया कि-बिना स्वतः उस दलदल् में जाए बिना वास्तविकता को जान पाना
काफी कठिन है और पढ़कर या फिर दुसरो से जानकारी पाकर किसी निष्कर्ष तक पहुचना एक अंधभक्त की निशानी है-
और मैं एक वैज्ञानिक सोच के साथ ही सत्ययता को खुद बिना जांचे विशवास करने वालो में से व्यक्ति नही हु-
जब उस व्यक्ति ने मुझे यह बताया कि-किसी भी तरह का अभद्र कृत्य हमारी सुरक्षा में उपश्थित सुरक्षा कर्मियों द्वारा नही किया जाता है-
और ना ही ग्रामीण महिलाओं का बलात्कार किया जाता है-
और ना ही उनसे कोई जोर् जबर्दस्ती की जाती है-

परन्तु वह व्यक्ति ने मुझे यह बताया की- हां नक्षलवादी जरूर हथियारों के बल पर इन कृत्यों को अंजाम देते है-वे ग्रामीणों को लूटते है-उनकी महिलाओं के साथ बलात्कार करते है-और उन्हें जबरन ही नक्षलवादी बनने पर मजबूर करते है ।

फिर मैंने सोचा की-कुछ लोगो का कुछ बुद्धिजीवियों का यह कहना की-नक्षलवादी सरकार से पीड़ित होकर और वहां उपश्थित सुरक्षा में सुरक्षाकर्मियों से दुर्व्यवहार के कारण वे सैनिको को मार देते है-

साथ ही-सरकार द्वारा पीड़ित करने के विरोध में अपना विरोध दर्शाते है-और उसे ओ अन्याय के विरुद्ध क्रांतिकारी कार्य कहते है..

इस प्रकार बुद्धिजीवियों का कहना और साथ ही दूसरी ओर खुद सरकार और उस महकमे से जुड़े अज्ञात व्यक्ति से मेरा वार्तालाप मुझे विचार करने पर विवश् करने के साथ ही-यह भी जानने का अधिकार देता है कि-वास्तव में हकीकत क्या है ?

फिर मैंने अज्ञात व्यक्ति से और भी बहुत कुछ जानना चाहा तो-बहुत ही महत्वपूर्ण आवश्यक जानकारी से उसने अवगत कराया-

उसने यह बताया कि-
वहां पर जितने भी सरकारी उपक्रम जब चलाये जाते है-
जैसे की-नदियों के ऊपर ब्रिज बनाने के कार्य या फिर
आवागमन हेतु सड़कों का निर्माण-यह निर्माण का कार्य सरकार द्वारा किसी निजी कम्पनी को-दे देती है-
और जब कोई कम्पनी यह कार्य करती है तो-वह वहां जो नक्षल समूह होता है उसके प्रमुख से सम्पर्क कर-उसे उस कार्य का 30% हिस्सा दे देती है-

पैसो के रूप में जिस से की-बाद में उसे ओ कार्य करने में किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत का सामना न करना पड़े-
साथ ही-उसे अन्य समूह से भी होनेवाली समस्या से छुटकारा मिल जाता है-

अब तो सुनने में यह भी आया की-
हमारे नेता भी आजकल खुद ही खुद को टेंडर देने का कार्य कर रहे है-और यह भी सुन ने में आया है कि-उन कार्यो को पूरा करने हेतु इन नेताओं के सम्पर्क नक्षलवादियो से है-और वे उन कार्यो को पूरा कराने हेतु-हर तरह की मदद नक्सलियों को कराते है-

अब इसमें कितनी वास्तवकिता है-इस पर विचार किया जाना काफी आवश्यक हो जाता है,
साथ ही इसकी गम्भीरता को देखते हुए-इसकी सत्यता की जांच करना भी काफी आवश्यक हो जाता

पर प्रश्न यह है कि-
क्या वास्तव में हमारी सरकार और हमारे कुछ नेता-नक्सलवादियों को पाल रहे है-

या फिर-नक्षलवादी सरकार से पीड़ित होकर-उनसे बदला लेने का कार्य कर रही है,

या फिर-खुद के स्वार्थ हेतु ही-नक्सलवादी का समूह तैयार कर-सरकार के कुछ नेताओं के साथ सांठ गांठ कर् कुछ नेता अपनी राजनितिक रोटियां सेंकने पे लगे हुए है-

मात्र इस पर गम्भीरता से विचार करते हुए-इसके सत्यता की जांच आज हर देश के नागरिक के लिए आवश्यक हो जाता है।
और साथ ही मेरे लिए भी-और इसकी सत्यता तक पहुचना मेरा धर्म होगा यह मैं कहूंगा-

एक आगाज-अमोल चिमनकर

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.