पूरा ना सही इन्हें इनके हिस्से का खुला आसमान तो दीजिये…!!

Posted by ANCHAL SHUKLA
September 20, 2017

Self-Published

बाल-श्रम समाज की एक गंभीर समस्या——-

बचपन ये वो दौर होता है जो ताउम्र यादों में बना रहता है.. बचपन की ढ़ेरों अनगिनत यादें जो हमारी ज़िन्दगी के यादगार पन्नों में कैद रहती हैं… बचपन में जहा बच्चों को किताबें और खिलौने सौंपें जाते हैं वहीं कुछ अभागी बच्चों को मजदूरी करने के लिए विशेष प्रकार के उपकरण थमा दिए जाते हैं… जहां एक ओर बचपन को मासूमियत, स्नेह, प्यार एवं दुलार की संज्ञा दी जाती है, वहीं दूसरी ओर ना जाने कितने मासूमों से उनकी मासूमियत छीन ली जाती है… उनके जीवन में मासूमियत का स्थान मजदूरी ले लेती है… दिनभर मजदूरी करने के बाद भी रात में इन बच्चों को भूखे पेट कंकरीट भरी सड़को पर सोने को मजबूर होते हैं… अक्सर हम छोटे और नासमझ बच्चों को कभी चाय की दुकान में, फैक्ट्री एवं कारखानों में, ढ़ाबों में काम करते, कचरा उठाने, भीख मांगते हुए, गाड़ियों की मरम्मत करने से लेकर जूता पॉलिश करते हुए तक देखते हैं… ये समाज की जटिल समस्या है, लेकिन समाज इसका विरोध ना करके बच्चों से कड़ी मेहनत कराकर बदले में उन्हें थोड़ा बहुत परिश्रामिक सौंप देता है… समाज के कुछ कुपोषित वर्ग इन बच्चों की गरीबी का फ़ायदा उठाते हैं… लेकिन इंसान होने के नाते इतना याद रखिये की अगर आप इन बच्चों को पोषित नहीं कर सकते तो आपको इन्हें शोषित करने का भी कोई अधिकार नहीं है… गरीबी, अशिक्षा एवं बेरोज़गारी के कारण छोटे-छोटे बच्चेे पहाड़ जैसे बोझ अपने सर पे उठाते-फिरते हैं…  समाज के कुछ कुपोषित वर्ग इन बच्चों की गरीबी के कारण उनका शोषण करते हैं… एक इंसान होने के नाते अगर आप गरीब बच्चों को पोषित नहीं कर सकते तो कृपया शोषित भी मत करिये… इतनी छोटी सी उम्र में उन्हें मजदूरी की आग में ढकेलने से हम ना सिर्फ़ उनका बचपन अंधकार में डाल रहे हैं बल्कि भारत के भविष्य का निर्माण में सहायक शिशुओं का जीवन गर्त में डाल रहे हैं… ये उम्र खेलने-कूदने एवं शिक्षा-दीक्षा ग्रहण करने की हैं… हमें जितना भी हो सके ऐसे बच्चों के सहयोग के लिए आगे बढ़ना चाहिए… इन बच्चों को मजदूरी के लिए नहीं, पढ़ने के लिए प्रेरित करना होगा… एकमात्र पढ़ाई से ही इनका भविष्य अंधकार से प्रकाश की ओर  अग्रसित होगा…

ये हमारे समाज की छोटी-छोटी कलियाँ हैं…
इन्हें टूटने मत दीजिये…
इन्हें मुरझाने मत दीजिये…
इन्हें जीवन की बहारों में खिलने का मौक़ा दीजिये… इन्हें सपनों की उड़ान भरने का मौक़ा दीजिये…
पूरा ना सही इन्हें इनके हिस्से का खुला आसमान तो दीजिये…!!

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