बाबा आज भी बाबा है

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बाबा आज भी बाबा है, चाहे जेल में ही क्यों नही, हो सकता है बाबा अपने भक्त वँहा भी बना ले, वैसे बाबा राम रहीम का एक तरह से चला रहा अध्याय खत्म हो चूका है बाबा अब सजा आफत मुल्जिम है, मीडिया भी दूसरी खबरों की और रुख कर चुका है लेकिन बाबा के समर्थन में बाबा के अनुयायिओं ने तारीख 25-अगस्त-2017 को पंचकूला में की गयी आगजनी और तोड़ फाड़ की घटनाये हरयाणा पुलिस और राजनीतिक तंत्र का पीछा नही छोड़ रही, अब एक नये खुलासे में हरयाणा पुलिस इस बात की और संकेत दे रही है की कोर्ट द्वारा सजा सुनाये जाने के बाद, बाबा की फरार होने की साजिश थी और इसी सिलसिले में सजा होने के तुरंत बाद, बाबा द्वारा मंगाया गया लाल।बेग, इसी का संकेत था की बाबा पर क़ानूनी सिंकंजा कसा जा चूका है और अब बाबा अपने आलिशान डेरे की बजाय, जेल की और कुंच करने वाले है, लेकिन पुलिस द्वारा दिये गये इस कथन पर कई गंभीर सवाल खड़े होते है जिनका अध्ध्यन करना बहुत अनिवार्य होता जा रहा है. (http://www.oneindia.com/amphtml/india/get-me-the-red-bag-the-code-ram-rahim-used-to-try-and-escape-2533328.html)

अगर, तारीख 25-अगस्त-2017 की घटना का विश्लेषण करे, तो यँहा भारी मात्रा में बाबा के समर्थक पहले से ही एकत्रित होने शुरू हो गये थे, सभी को अंदेशा था की माहौल में कुछ तल्ख आना लाजमी है, इसी सिलसिले में कहने मात्र के लिये धारा 144 को भी पंचकूला में लगाया गया, जँहा बाबा को सजा होनी थी वँहा भी भारी मात्रा में सुरक्षा बलों की तैनाती की गयी,वाहनों के आवाजाही पर भी रोक लगा दी गयी, मीडिया भी समझ रहा था की यँहा कुछ उथल पुथल होनी लाजमी है यही वजह थी की मीडिया के कैमरे और पत्रकार सिरसा से लेकर पंचकूला तक फैल गये थे,  लेकिन विशेषकर पंचकूला में, बाबा का नाम जपते हुये बाबा के अनुयायी पैदल ही पंचकूला में कुंच कर रहे थे, एक तरफ सरकारी तंत्र था और दूसरी और बाबा के अनुयायी, मानो एक लकीर को खींचकर दोनों तरफ बल प्रदर्शन किया जा रहा था, जंहा सरकारी सुरक्षा बल कुछ कमजोर ही दिखाई दे रहा था.

मसलन समाज के हर व्यक्ति, तंत्र और मीडिया सभी को पता था की 25-अगस्त का दिन शुक्रवार आम ना होकर कुछ विशेष जरूर रहेगा, लेकिन यही यथ्य क्यों सरकारी सुरक्षा बल को समझ नही आ रहा था, या किसी आका का आदेश था की गांधी जी को मानने वाले देश में अहिंसा ही परम् धर्म है, लेकिन जैसे ही बाबा पर सीबीआई की विशेष अदालत ने फैसला सुनाया, सारे मीडिया चैनलो पर ये खबर आग की तरह फैल गयी, सोशल मीडिया पर बाबा के नाम से कमेंट आना भी शुरू हो गयी थी. ऐसे में पुलिस का ये कहना की बाबा के कहने पर गाडी में से लाल बेग निकालने से उनके अनुयायी में उनकी सजा को दर्शाता संदेश गया, मसलन ये ब्यान किसी भी व्यक्ति को समझ नही आ रहा की तारीख 25-अगस्त को पुलिस उलझी हुई थी या आज पुलिस इस ब्यान से खुद को पाक साफ दिखाना चाहती है, क्योकि भारत देश का बच्चा बच्चा जानता है की बाबा की सजा के घोषणा के साथ ही इस खबर को बिग ब्रेकिंग न्यूज़ के तहत टीवी चैनल पर चलाया गया और यही एक सटीक अनुमान है की बाबा के अनुयायिओं को इसी टीवी खबर से बाबा को दोषी करार देने की जानकारी मिली होगी और यही वजह थी की बाबा के समर्थकों ने टीवी चैनल की वँहा खड़ी वेन को सबसे पहले अपनी हिंसा की चपेट में ले लिया, मसलन उस स्रोत को नुकशान पहुचाया जो सबसे पहले बाबा को दोषी ठहराये जाने की घोषणा कर रहा था.

जंहा तक मेरा मानना है की बाबा के समर्थकों ने इस रणनीति पर पहले ही काम शुरू कर दिया था की अगर कोर्ट का फैसला बाबा के खिलाफ आता है तो किस तरह अपना रोष प्रदर्शन करना है, लेकिन उस दिन सुरक्षा बल और उनकी टीम का मूकदर्शक बनकर खड़े रहना या उग्र होती ही भीड़ को देखकर अंचभित होना, इस और संकेत है की सरकारी सुरक्षा तंत्र के पास कोई भी रणनीति नही थी और ना ही कोई प्लान था, की अगर बाबा के समर्थक हिंसक हो जाते है तो किस तरह उन्हे काबू करना है, अगर कोई रणनीति होती तो बाबा के अनुयायी किसी भी तरह से शहर पंचकूला में इतनी बड़ी संख्या में कभी भी जमा नही हो सकते थे.

खेर, बाबा को राजसी रश्म की तर्ज पर हेलीकाप्टर से रोहतक की जेल में ले जाया गया, जँहा बाबा पिछली सीट पर बैठे दिखाई देते है और उनके सामने उनकी मुहबोली बेटी हनीप्रीत दिखाई देती है, यँहा बाबा इस तरह बैठे हुये दिखाई देते है की ये वास्तव में किसी रियासत के बादशाह है, अब सवाल है की बाबा के साथ किसी भी तरह से इस तस्वीर में कोई पुलिस सुरक्षा कर्मी नही दिखाई दे रहा, यँहा एक और सवाल भी है की क्या किसी आम नागरिक, जिसे दोषी करार दिया गया होता उस व्यक्ति के साथ भी पुलिस इसी तरह व्यवहार करती ? जवाब हम सब जानते है, लेकिन बाबा को जेल पंहुचाने का राजसी ठाठ ये जरूर बताता है की बाबा का रसूख बाबा से भी बड़ा है, इसका एक और भी कारण है, अगर बाबा के राजनीतिक ब्यान देखै खास कर साल 2014 के बाद के बयान, बाबा अक्सर हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की तारीफ करते हुये दिखाई देते है और साल 2014 के बाद के हर राज्य चुनाव में जँहा जँहा बाबा की पेठ है, बाबा वँहा वँहा भाजपा का ही समर्थन करते हुये दिखाई दे रहे है, मसलन केंद्र की सत्ता और हरयाणा की राज्य सत्ता में सुशोभित भाजपा, एक लोकतांत्रिक रूप से गठित सरकार का जिसे समर्थन हो वह बादशाह होने का घमंड समाज में तो पाल ही सकता है.

अब खबर आ रही है की बाबा जेल अधिकारियों से और हर जगह से जँहा वह अपनी आवाज पँहुचा सकते है, वँहा ये दलील दे रहे है की हनीप्रीत को बाबा के साथ रहने की आज्ञा दी जाये कारण बाबा अपना स्वास्थ बता रहे है और हनीप्रीत बाबा के स्वस्थ रखने के लिये जरूरी मेडिकल उपचार कर सकती है, अब सोचने की जरूरत है की क्या एक आम कैदी इस तरह की डिमांड प्रशाशन से कर सकता है, शायद कभी नही, लेकिन बाबा कर रहे है और शायद बाबा को उम्मीद भी है की उनकी ये मांग मान ली जायेगी (http://m.indiatoday.in/lite/story/gurmeet-ram-rahim-singh-honeypreet-massage-jail-cbi-court-escape-plan/1/1039197.html) लेकिन अब ये खबर आ रही है की बाबा की मुहबोली बेटी हिनीप्रीत पर भी गंभीर आरोप लगे है और इन्ही आरोप के तहत पुलिस हनीप्रीत को।तलाश कर रही है, व्यक्तिगत रूप से इस पूरे प्रकरण में हनीप्रीत नै कोई ऐसी घटना को अंजाम दिया हो जिससे इतने बड़े आरोप उन पर लगाये जा रहे, ऐसा प्रतीत नही होता कही इन आरोपो के तहत हनीप्रीत को भी जेल भेजने की तैयारी और योजना तो नही (http://m.ndtv.com/india-news/now-honeypreet-insan-ram-rahims-daughter-wanted-by-cops-airports-alerted-1744741?amp=1&akamai-rum=off)

खेर ये तो पुलिस तफ्तीश पर निर्भर है की पंचकूला के हुदडम के पीछे वास्तव में कीन लोगो का दिमाग था, लेकिन इसी बीच खबर आ रही है की बाबा की सुरक्षा के कारण जेल में बाकी कैदियों को भी तकलीफ हो रही है मसलन बाबा जेल में भी सुर्खियों में है और बाबा को जेल में भी सुरक्षा दी जा रही है, जिससे ये प्रतीत नही होता की बाबा जेल में एक आम कैदी है या विशेष. (http://m.hindustantimes.com/india-news/after-rape-verdict-ram-rahim-said-hang-me-i-don-t-want-to-live-says-man-who-spent-5-days-with-dera-chief-in-jail/story-GbEZTUZ03vGEEn1DsiingI.html)

अंत में वह सच जो बताना जरूरी है जिसकी संभावना सबसे ज्यादा है की बाबा आज जेल में क्यों है, बाबा के खिलाफ कई गंभीर दोष सालो से बाबा पर लगाये गये थे और बाबा के खिलाफ इन पर सुनवाई भी चल रही थी, खासकर बाबा द्वारा 2007 में पंजाब के भीतर ही श्री गुरु गोबिंद सिंह का स्वाम रच कर सिख धार्मिक भावनाओं को बहुत आहित किया गया था, इस से पहले भी बाबा के कई कुकर्म अखबारों की सुर्खियां बन चुके थे, इसी के कारण सिख समाज पूरी ताकत से क़ानूनी लड़ाई में हर प्रकार से बाबा के खिलाफ मुहिम को आगाज कर रहा था, लेकिन इस लंबी क़ानूनी लड़ाई में व्यक्तिगत रूप से मैं सोचने पर मजबूर था की बाबा को कुछ नही होगा लेकिन साल 2016 में बाबा ने भगवान विष्णु का अवतार धारण करके हिंदू समाज की भावना को आहित किया था और इनके खिलाफ कई हिंदू संगठन उठ खड़े हुये थे और इनका विरोध बहुत ज्यादा हुआ था, आज आम आदमी यही मान रहा है की बाबा नै बहूसंख्यंक समाज की भावना को आहित कर खुद के लिये मुसीबतों का खड्डा खोद लिया था, लेकिन ये एक तर्क मात्र है, कानून अपना काम अक्सर करता रहा है, भारतीय कानूनी लड़ाई लंबी सही।पर न्याय जरूर।मिला है, लेकिन पंचकूला की घटना के बाद मैं एक सवाल करने को मजबूर जरूर मजबूर हूँ की लोकतंत्र प्रणाली में शाशक कोन है ? पुलिस, चुनाव में विजयी राजनीतिक पार्टी के अंतर गत कानून व्यवस्था बनाने रखने के लिये मजबूर है, राजनीतिक पार्टी को, सत्ता में आने के लिये चुनाव में बहुमत की जरूरत है और ये सारे वोट बाबा राम रहीम जैसे ताकतवर लोगो के इशारों पर डाले जाते है, मसलन बाबा, सही मायनों में आम इंसान नही है, शहंशाह ना सही, पर बाबा आज के समाज की जिस तरह रचना की जा रही है, वँहा बाबा, बादशाह होने की हामी तो जरूर भरते हुये दिखाई दे रहे है और उनका ताज, वह सारे अनुयायी है जो बाबा को भगवान की तर्ज पर पूजते है और चुनाव में बाबा के इशारे पर ही, नेत्र बंद कर बाबा द्वारा बताई गयी राजनीतिक पार्टी को अपना मत निश्चित होकर देते है.

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