बुलेट ट्रेन की जगह दो वक्क्त की रोटी चाहिए

Posted by Rahul SR Antilog
September 20, 2017

Self-Published

भारत को आज भी पेट भरने के लिए खाना नहीं मिल रहा है। जिस कारण वह आज भी कुपोषित है। भारत देश में कुल 38.4% ऐसे बच्चे हैं जिन्हें खाना तक नसीब नहीं हो पा रहा है। इस कारण कुपोषण आज भी भारत को छोड़ नहीं रहा है। कुपोषण भारत के लिए अभिशाप बन चुका है।

यूनाइटेड नेशन की रिपोर्ट यह कहती है कि190.7 मिलियन लोगों के पास घर तो है। परंतु 14.5% लोगों को एक वक्त का खाना तक नसीब नहीं होता। जैसे देश में पोलियो पर कई मिशन चलाए जा रहे हैं। वैसे ही भारत को पोषित करने के लिए भी मिशन चलाने की बहुत आवश्यकता है।
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दुनिया भर में तेजी से कुपोषित लोगों की संख्या बढ़ रही है। प्रत्यक्ष वर्ष कुपोषित लोगों की तादाद बढ़ रही है। यह रिपोर्ट 2017 स्टेट फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रीशन द्वारा बताई गई है। कुपोषित लोगों की संख्या जहां 2015 में 777 मिलियन थी वहीं अब यह बढ़कर 2016 में 815 मिलियन तक पहुच चुकी है।

इन आंकड़ों में सबसे ज्यादा चौंका देने वाला आकड़ा भारत का है। कुल 38.4% बच्चे भारत में कुपोषित हैं। जबकि महिलाओं में खून की कमी 51.4% पाई गई है। कुपोषण की बात करें तो श्रीलंका में 14.7% , चीन में 9.4% और भारत में 38.4% है जो की सबसे अधिक है। 62 मिलियन बच्चे 2005 में कुपोषित पाए गए वहीं 2016 में यह बढ़कर 47.5% हो गया है।

बड़े पैमाने में जनसंख्या भूकी है

भारत कहाँ तक पहुँच चुका है, चंद्रमा हो या फिर मंगलग्रह परंतु हमारे देश की बड़ी जनसंख्या कुपोषित है। एमपी, बिहार, यूपी, उड़ीसा अधिकतर यह राज्य कुपोषण के शिकार हुए हैं। बहुत कोशिशों के बावजूद भी नकामयाबी।

पिछले कुछ सालों में भले ही भारत में कुपोषण 7-8 % गिरा है, परंतु अभी भी हमारी सरकार को लंबा रास्ता तय करना है। कारण 6 करोड़ मासूम बच्चों का भूक की वजह से विकास नहीं हो प रहा है। 2 करोड़ से अधिक जिंदा लाश के जैसे जी रहे हैं। चौंका देने वाली बात ये है कि भुखमरी के शिकार लोगों की दुनियाभर में 25% आबादी भारत में हैं।

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