मुस्लिम समाज की शिक्षा

Posted by Navi Raza Khan
September 12, 2017

Self-Published

भारतीय शिक्षा प्रणाली के इतिहास को हम देखेंगे तो तीन महत्वपूर्ण समय था,प्रथम वैदिककाल शिक्षा प्रणाली द्वितीय मध्यकालीन(मुस्लिम कालीन ) शिक्षा प्रणाली और तृतीय बौद्ध कालीन शिक्षा प्रणाली |

जो मुस्लिम शासक थे उन्होंने मदरसा और मकतब का निर्माण किया और उसको संरक्षण प्रदान किया |अंग्रेज़ के समय में भी मदरसा और मकतब फलता और फूलता रहा |

स्वतंत्रता पश्चात् जो भारत के देशज शिक्षा प्रणाली थी उसमे गिरावट आने लगी उसका प्रमुख कारण आज़ादी के बाद भी अंग्रेजो की शिक्षा नीति पर अमल होता रहा |

वर्तमान की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2016 से लेकर अब तक जितने भी आयोग और समितियां आयी उसमे जो देशज शिक्षा प्रणाली थी उसके स्पष्ट रुख से कुछ भी अच्छा विचार नहीं किया गया |

भारत में करीब 20 करोड़ से ज्यादा मुस्लिम समाज की जनसँख्या हैं,परन्तु इनकी आर्थिक,सामाजिक,राजनैतिक तथा शैक्षिक स्थिति बदहाल हैं |इसका मुख्य कारण इनकी निरक्षरता हैं |

मुस्लिम समाज के उच्च शिक्षा के जो भूतपूर्व संस्थान जो हैं उसमे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय,जामिया मिलिया इस्लामिया हैं आधुनिक समय मैं उर्दू के बेहतरी के लिए मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी की स्थापना की गयी |

सबसे बड़ा सवाल यह हैं की क्या मुस्लिम समाज को मुख्यधारा लाने क्या ये सिर्फ तीन विश्वविद्यालय से 20 करोड़ मुस्लिम समाज की शिक्षा की स्थितियों को बदला जा सकता हैं ??????

मेरे समझ से तो नहीं बदला जा सकता हैं !!!!!

इसके लिए मदरसों का आधुनिकीकरण किया जाना अति आवश्यक हैं !!!!इसमें सरकार की मंशा और नियत बिलकुल साफ होनी चाहिए न की तुष्टिकरण वाली नीति जो अब तक का भारत सरकार का प्रयास रहा हैं !!!

दूसरी अहम् बात यह हैं की मदरसों पर शंका की नियत भारत के जनमानस को हटा लेनी चाहिए क्योंकि अगर शंका किया जायेगा तो मुस्लिम समाज में असंतोष पनपेगा जो लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी हैं !!!

तीसरी अहम बात जो अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा मुस्लिम समाज को आर्थिक मदद दी जाती है उसका बजट को और अधिक बढ़ाने की जरुरत हैं |

भारत तभी एक सशक्त राष्ट्र बनेगा जब पूर्ण रूप से सामाजिक न्याय के साथ विकास हो और सही मायनों में “सबका साथ और सबका विकास हो” न की सियासी जूमला बन कर रह जाये !!

आज़ादी के सत्तर साल में भी मुस्लिम समाज अपने आप को पिछड़ा समझ रहा हैं जो भारत के लिए बेहद ही शर्मनाक बात है !सच्चर कमिटी की रिपोर्ट तथा रंगनाथ मिश्रा कमिटी की रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करता हैं की मुस्लिम समाज की शैक्षिक स्थिति बदहाल हैं !!

 

मुस्लिम समाज को शिक्षा के प्रति अपेक्षा इस राष्ट्र से कुछ इस तरह हैं !

“ऐ अहले हिन्द हमें त्वक्क्ल हैं तुझ पर !

मेरी गर्दिश हालातों को मिटाओगे तुम”!!

 

Navi Raza Khan

M.Ed. Scholar. School of Education,                                                                                                                                        MGAHV  (A Central University) Wardha – 442001, Maharashtra.

 

 

 

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