श्री रावण

Self-Published

विवाद, अगर इसकी परिभाषा देनी हो, तो अमूमन बहुत से सामान्य शब्दो में कहा जा सकता है की वह समस्या या व्यक्ति की छवि, जिस पर व्यक्तिगत, समाज, देश, विश्व में एक राय कायम ना हो सके और दो लोग या समूह अपनी अपनी राय पर अडिग रहे, जँहा संवाद का कोई रास्ता ना बच जाये, अमूमन इस तरह की समस्या अपने आप में एक विवाद का रूप ले लेती है. यह विवाद ही है जो कभी दो लोगो के बीच मतभेद का कारण बनता है और कभी दो देशों के बीच युद्ध का कारण.

अगर, विवाद पर थोड़ा सा अध्धयन किया जाये तो अमूमन हर समाज में विवाद को जन्म देने वाले या इस पर पहरा देने वाले कुछ ही लोग होते है और ज्यादातर आम जनता और नागरिक, किसी भी विवाद से अपने आप को दूर ही रखना चाहता है लेकिन ये आम आदमी की जिज्ञासा ही होती है जो विवाद के कारणों को जानने में बहुत गहरी दिलचस्पी रखता है, यही वजह है की विवाद को जन्म देने वाले कुछ मुठी भर लोग इसे एक अवसर की तरह लेते है और कभी कभी विवाद बहुत गहरी समस्या का स्वरूप ले लेता है जँहा हालात बहुत गंभीर हो जाते है, शायद यही मानसिकता है जो एक ब्रेकिंग न्यूज़ को कभी कभी सनसनी का स्वरूप दे देती है.

विवाद के कई रूप हो सकते है मसलन व्यक्तिगत, पारिवारिक, समाजिक, राजनीतिक, धार्मिक, इत्यादि लेकिन अगर हम भारतीय समाज की बात करे तो यँहा आस्था से जुड़े विवाद पर अमूमन हम कहीं भी कोई आजादी से अपनी राय नही रख सकते, लेकिन विवाद की पृष्ठभूमि को यँहा इस तरह पेश करने की एक विशेष जरूरत थी, क्योकि आज जब नवरात्रे चल रहे है और कुछ ही दिनों बाद दशहरे के दिन बुराई का प्रतीक बनाकर रावण का दहन हमारे पूरे देश में किया जायेगा लेकिन ये भी सच्चाई है की भारत देश के कई हिस्सों में रावण की एक देवता के रूप में पूजा की जाती है, इस संदर्भ में आज रावण ओर इनके किरदार को समझने की जरूरत है.

रावण, के किरदार के कई रूप है लेकिन जो सबसे दमदार है वह है असुर साम्रज्य का महाबली राजा, रावण लंका का अधुपति था इसलिये इसे लंकेश भी कहा जाता है, बहुत बड़े क्षेत्र में फैला हुआ था. ये आम कहा जाता है की रावण के समय काल में लंका सोने की बनी हुई थी, ये विशाल साम्राज्य, रावण ओर उसकी सेना का परिक्रम अपने आप बयान करता है, लेकिन एक महाबली होने के साथ रावण एक बुद्धिमान शाशक भी था, अमूमन सभी पौराणिक कथाओं के अनुसार, लंका का निर्माण सोने की धातु से किया गया था, हो सकता है यँहा सोने का मतलब किसी महंगी धातु से हो जिस से घरों का निर्माण किया जाता हो. इसी तथ्य से ये अंदाजा भी लगाया जा सकता है रावण का ये साम्राज्य ओर नागरिक कितने अमीर और धनी थे, साथ ही साथ, यँहा व्यपार के लिये भी उचित माहौल को बनाया गया था.

रावण, दूरदर्शी था और उस हर शख्श को प्रोत्सहित करता था जिस से एक आम जिंदगी और आसान हो सके, ऐसा कहा जाता है की दूर दूर तक युद्ध करने के लिये सेना को रात को रुकना पड़ता था जँहा सबसे बड़ी समस्या आहार के लिये आग जलाने के थी जिसके लिये बड़े बड़े पत्थर अक्सर, रावण ओर इसकी सेना को साथ में रखने पड़ते थे, लेकिन ये रावण का राज्य काल ही था जब इस बात की खोज की गयी की सूरज की किरणों से भी आग को जलाया जा सकता है, जिस के लिये नारियल के सूखे छिलके का इस्तेमाल किया जाने लगा.

रावण, के राज्य काल में ऐसा कहा जाता है यँहा जाती प्रथा नही थी, (इसके होने के कही भी सबूत नही मिलते) मसलन जन्म के कारण जीवन के अधिकार सीमित नही किये जाते थे और व्यक्तिगत सोच, गुण के आधार पर एक नागरिक अपना स्थान समाज में बना सकता था. असुर साम्राज्य, भी पहले शिकार पर निर्भर था लेकिन धीरे धीरे इन्होंने अपना साम्राज्य ओर व्यपारिक स्थानों की बुनियाद नदी के किनारे ही की जाती थी जँहा पानी का पर्याप्त सन साधन मौजूद हो.

रावण के समय काल में ओर असुर सम्राज्य में, शिक्षा का बहुत बड़ा स्थान था, ओर उस समय काल के अनुसार लिपी को लिखने का ज्ञान अमूमन हर नागरिक को दिया जाता था, वही शस्त्र विद्या में भी लोगो को निपुर्ण बनाया जाता था. इसके साथ संगीत, कला, इत्यादि हर उस क्षेत्र को प्रोत्साहित किया जा रहा था जिस से एक आम जिंदगी को आसान बनाया जा सके, ऐसा प्रचलित है की रावण ओर असुर साम्रज्य, भगवान शिव का बहुत बड़ा उपासक था, ओर एक परमेश्वर के रूप में भगवान शिव की ही आराधना की जाती थी, व्यक्तिगत रूप से रावण, भगवान शिव का भगत होने के साथ साथ, उस समय के सारे धार्मिक वेद को कंठ रखता था. वही स्वस्थ के लिये भी कई अशोधियो का निर्माण या खोज, रावण के राज्य काल में ही कि गयी थी, खासकर बच्चो के स्वस्थ के लिये.

रावण, के बारे में कही भी ऐसा पढ़ने को नही मिलता की वह किसी भी तरह से एक क्रूर शाशक था, या सिंकदर की तरह अपने साम्रज्य को बढ़ाने की फिरत में जुल्म की कोई कहानी लिख रहा था, ना ही व्यक्तिगत रूप से ऐसी किसी भी खोज को नही देखा जो एक व्यक्ति के रूप में रावण को किसी भी तरह का भोगी बनाकर इनकी छवी को पेश करता हो. यँहा अगर थोड़ा सा समझे तो, माता सीता को भी इसने अपने महलो से दूर अशोका वाटिका में रखा था.

इतना बड़ा परिकर्मी होने के बावजूद, रावण ने एक औरत, महिला के रूप में सीता का अपहरण कर, अपनी छवी में जरूर एक दाग लगा लिया था, लेकिन अगर यही अपराध, दशहरे के दिन, रावण के पुतले को जलाने का कारण है, फिर तो इस नियम के तहत दुनिया को कोई भी खास या आम, कोई भी पुरुष शायद अपराधी ही है, वह लक्ष्मण भी जिसने सुपरनखं के नाक और कान काट दिये थे, वह सभा भी जो शक के आधार पर सीता जी को वनवास देती है, वह पांडव भी जिन्होंने अपनी पत्नी को दौलत समझ कर, जुये की बाजी पर लगा दिया था, इस मापदंड के तहत तो हम सब अपराधी है. फिर इसकी सजा का प्रतीक सिर्फ रावण को ही क्यों बनाया जा रहा है.

शायद, ये रावण का परिक्रम ही होगा जो आज भी दक्षिण भारत के कई हिस्सों में रावण को एक देवता।के रूप में पूजा जाता है वही उत्तर भारत में रावण एक बुराई का प्रतीक है, अब ये तो अध्धयन का ही विषय होगा की ऐसा क्यों है ? की रावण के किरदार की तर्ज, पर एक किरदार की फ़िल्म रावण बनाई जाती है जो हिंदी भाषा में ज्यादा लोकप्रिय नही होती लेकिन दक्षिण की भाषा में इसे खूब सरहाया जाता है, अगर आप के पास समय हो तो मणिरत्नम द्वारा निर्देशित इस फ़िल्म को एक बार जरूर देखियेगा.

रिफरेन्स: https://www.google.co.in/url?sa=t&source=web&rct=j&url=http://m.hindustantimes.com/books/ramayana-villain-ravana-was-a-great-ruler-says-new-book/story-kpXV2NkFbygK4U531PbZLL.html&ved=0ahUKEwjqh-PR2cfWAhWKtI8KHQuKCkkQFggtMAI&usg=AFQjCNFskX-kSYglRAIiJPfvnfQcHYIBNA

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