सेना की जमीन भी अडानी-अंबानी को सौंपने की तैयारी

Posted by Ajay Katare
September 22, 2017

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भाजपा और मोदी सरकार सेना को राष्ट्रवाद के नाम लूटने की तैयारी कर चुकी है.. (2 मिनट में पढ़े)
आखिर क्यों छीनी जा रही है सैनिक फर्मो कि जमीन और बंद की जा रही हैं गोशालाएं ? खेल बड़ा है , राष्ट्रवाद के नाम पर ..

सेना में बदलाव के बहाने केंद्र सरकार सेना की 25 हजार एकड़ बेशकीमती जमीन हथिया रही है. यह बड़े पूंजी-घरानों को दी जाएगी. जमीन छीनने के लिए सेना का मिलिट्री फार्म्स जैसा उपयोगी कोर बंद किया जा रहा है. मिलिट्री फार्म्स से सेना को बड़े पैमाने पर अनाज और लाखों लीटर शुद्ध दूध प्राप्त होता था. सैनिकों को मुफ्त मिलने वाला राशन बंद करने के बाद अब दूध भी बंद किया जा रहा है. राष्ट्रवाद बेचने वाली भाजपा सरकार इन्हीं तौर-तरीकों से भारतीय सेना को मजबूत बना रही है.
दरअसल भाजपा नेताओं की निगाह भारतीय सेना के अधिकार क्षेत्र की करीब 25 हजार एकड़ भूमि पर है. हजारों एकड़ बेशकीमती जमीन छीनने के लिए सरकार ने सेना के ढांचागत परिवर्तन की पैंतरेबाजी की है. सेना से बहुमूल्य जमीन छीन कर उसे बड़े उद्योगपतियों और धनपतियों को दिए जाने की तैयारी है. इसका खुलासा होने में भी अब अधिक देर नहीं है. बुधवार 30 अगस्त को रक्षा मंत्री (जो अब पूर्व हो चुके) अरुण जेटली ने उसी दिन हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक का हवाला देते हुए मीडिया से कहा कि सेना में ढांचागत बदलाव को लेकर लेफ्टिनेंट जनरल डीबी शेकतकर कमेटी की सिफारिशें मंजूर कर ली गई हैं.

इस फैसले की धुरी में सेना के 39 कृषि फार्मों (मिलिट्री फार्म्स) की करीब 25 हजार एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने की नीयत छुपी है. …….आप इसी से समझ लें कि केंद्रीय कैबिनेट 30 अगस्त को निर्णय लेती है और उसी दिन जेटली इसका ऐलान करते हैं, जबकि पर्दे के पीछे की असलियत यह है कि मिलिट्री फार्म्स की जमीनों को जब्त करने की कार्रवाई कई महीने पहले शुरू कर दी गई थी. मिलिट्री डेयरियों की गायों को नीलाम करने की प्रक्रिया कई महीने पहले से शुरू थी. सेनाध्यक्ष को पहले ही बता दिया गया था.

सरकार के फैसले की आधिकारिक घोषणा के पहले ही मिलिट्री फार्म्स की जमीनें जब्त करने की कार्रवाइयां शुरू हो गई थीं. ऐसी क्या जल्दीबाजी थी अरुण जेटली जी! मिलिट्री फार्म्स की जमीनें लेकर और सैनिकों को मिलने वाला लाखों लीटर दूध छीनकर आप भारतीय सेना की युद्धक क्षमता बढ़ा रहे थे या कोई और ‘असैनिक-क्षमता’ विकसित करने की आपाधापी में लगे थे।

खैर, देश के 39 मिलिट्री फार्म्स में जो उन्नत नस्ल की हजारों गायें पलती हैं, उन्हें धड़ाधड़ नीलाम करने की प्रक्रिया चल रही है. गौरक्षा के नाम पर देशभर में माहौल खराब करने वाली पार्टी के सत्ता अलमबरदार यह बता दें कि सेना की उन्नत नस्लों की गायों को नीलाम कर उन्हें किन सक्षम हाथों में देंगे और उन गायों की जहालत के लिए कौन जिम्मेदार होगा?

केंद्र सरकार इस सवाल का जवाब नहीं देगी और गौरक्षक भी अपनी सरकार से यह सवाल नहीं पूछेंगे. भाजपाई राष्ट्रवाद और गोरक्षा की यही कुरूप असलियत है।

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