हम कब समझेंगे कि समानता में अधिकार के साथ कर्तव्य भी है

Posted by Priya Agrahari
September 15, 2017

Self-Published

वर्तमान समय में जब हम लैगिक समानता की बात करते है तो हमारी महिला युवा  ये बात भूल जाती है कि समनता में अधिकार और कर्तव्य दोनों शामिल होते हैं।
महिलाओं को ये समझना आवश्यक है कि वे अपने आप में इतनी सशक्त हैं कि उन्हें किसी पुऋष की आवश्यकता नहीं ।फिर चाहे वो एक बैग उठाना हो दैनिक जीवन का कोई भी कार्य। एक महिला जिसने पूरे नौ महीने एक अन्य इंसान को के भार को उठा सकता हैं वो कमजोर तो नहीं हो सकता ।
सिर्फ इसलिए कि आपका साथी या मित्र पुरूष है वो आपके कार्य या आर्थिक जरूरतों का बोझ क्यों उठाएं?
हमें ये समझना आवश्यक हैं कि आत्मनिर्भरता उतनी ही जरूरी है जितनी कि सामाजिक स्वतंत्रता।
ये आत्मनिर्भरता ऑफिस से लेकर कॉलेज , घर से लेकर बाहर सभी जगह अपने कार्य और आर्थिक निर्भरता से ही संभव है ।
हमें इन पहलूओ पर ध्यान देना आवश्यक है क्योंकि अधिकार और कर्तव्य दोनों ही समानता के सिक्के के दो पहलू हैं और एक के बिना दूसरा अधूरा हैं।

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