हम निष्पक्ष पत्रकार हैं

Posted by Tripurari Kumar Singh
September 7, 2017

Self-Published

गौरी लंकेश की हत्या हो गई | मैं उन्हें नहीं जानता था कि वो कौन हैं जब तक उनकी हत्या नहीं हुई थी | मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं | परन्तु जैसे ही उनकी हत्या हो गई मुझे ये ज्ञात हुआ कि वो पत्रकार तो थी ही साथ में भाजपा विरोधी भी थी एवं हिंदुत्व के खिलाफ लडती आई थी | मुझ जैसे व्यक्ति के लिए जो अब तक यह सोचता था कि पत्रकार दल विरोधी नहीं वरण गलत नीतियों के विरोधी होते हैं ये ज्ञानचक्षु खुलने जैसा था| मैंने ये भी सुना है कि एक पत्रकार का निष्पक्ष होना एक बेहतर समाज के निर्माण के लिए नितांत आवश्यक है | परन्तु उस दिन ज्ञात हुआ कि अगर आप भाजपा के अंधविरोधी हैं तो भी आप इलीट क्लास के पत्रकार हो सकते हैं | भाजपा के प्रति दुर्भावना रखना पत्रकारिता में जायज है एवं बिलकुल नैतिक भी | अब चुकी भाजपा का मतलब पिछले तीन वर्षों से मोदी ही है तो मोदी से वैर रखना ही पत्रकारिता की निष्पक्षता का एक मापदंड है |

हम सेक्युलर एवं लिबरल पत्रकार हैं क्यूंकि हम दिन रात मोदी को गालियाँ निकालते हैं कभी कभी उनकी मृत्यु की भी खवाहिश कर लेते हैं और ये चलता है क्यूंकि हमारी निष्पक्षता यही है | और अगर आप हमारी जमात से अलग हैं तो आप गोदी मीडिया हैं | आपको खुद को निष्पक्ष कहने का कोई हक़ नहीं | निष्पक्षता की शुरुआत 10 जनपथ के तलवे चाटने से होती है अगर आपने गलती से भी इससे इतर कुछ किया तो आप निष्पक्ष हो ही नहीं सकते |

हम इतने निष्पक्ष हैं कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने निजता को मौलिक अधिकार माना तो ये मोदी सरकार के लिए तमाचा है परन्तु यदि उसी कोर्ट ने लव जिहाद के जांच के आदेश दिए तो उसका भी सांप्रदायिकरण हो चुका है | मतलब चित्त भी मेरी ,पट भी मेरा और सिक्का मेरे बाप का |

अगर आप चाहते हैं कि आपको भी निष्पक्षता का सर्टिफिकेट मिले तो किसी अखलाक की हत्या पर खूब चिल्लम चिल्ली कीजिये ,किसी जुनैद के मार दिए जाने पर अपने नयनों को आंसुओं से भर दीजिये पर किसी नारंग के पीट पीट कर मार दिए जाने पर चूं भी ना कीजिये |अगर कर्नाटका ,केरल ,बंगाल में स्वयंसेवकों का क़त्ल हो तो उसपे मौन गढ़ लीजिये या ये दिखाने का प्रयास कीजिये की प्रतिक्रिया में भी कुछ हत्याएं हुई हैं इसलिए ये मायने नहीं रखता | क्यूंकि निष्पक्षता का ये तकाजा है |

देशभर में पिछले तीन वर्षों में लगभग 25 पत्रकारों की हत्या हुई है पर चूँकि वो घोषित तौर पर मोदी विरोधी या संघ विरोधी नहीं थे तो उनकी हत्या भी हम निष्पक्ष पत्रकारों के लिए मायने नहीं रखती |

गौरी की हत्या में हत्यारों ने एक बड़ी गलती कर दी वरना हम पूरी तरह अपने कार्य में सफल हो जाते |उन्हें कर्नाटका में नहीं मारना था, किसी भाजपा शासित प्रदेश में मारना सही होता क्यूंकि कांग्रेस के मुख्यमंत्री तो अपने यार हैं ,इटली से आई बहु अपनी हैं तो उनसे इस्तीफा मांगने का सवाल ही नहीं उठता| और शहजादे को तो हम कितनी बार चमकाने का प्रयास करते ही रहते हैं ये अलग बात है कि आज तक हम इसमे सफल नहीं हुए |

हम बार बार ये दुहराते हैं कि समाज में नफरत ठीक नहीं है |किसी को निशाना बनाना ठीक नहीं है परन्तु ये बात भाजपा के कार्यकर्ताओं एवं स्वयंसेवकों पर लागू नहीं होती ,आप जितना चाहें उनसे नफरत कर सकते हैं |हजारों आतंकवादियों के मुस्लिम होने पर भी हम ये मानते हैं कि इस्लाम का आतंकवाद से कोई सम्बन्ध नहीं है पर गोडसे द्वारा गाँधी को मार दिए जाने की घटना ये तय करती है की हर स्वयंसेवक गाँधी का हत्यारा है | हम मुगलों के अत्याचार पर इस तर्क को बदल देते हैं क्यूंकि हम निष्पक्ष हैं | अगर पहले के मुगलों ने मंदिर तोड़े तो इसमे आज के मुसलमानों का क्या दोष पर हाँ हर स्वयंसेवक आतंकवादी है एवं गोडसे का समर्थक है |निष्पक्ष पत्रकारिता की किताब के ये जायज पन्ने हैं एवं अगर किसी ने इससे अलग कुछ बोला तो वो गोदी में बैठा पत्रकार है |

आखिर में कहना चाहता हूँ समाज में नफरत मत फैलाएं| दो चार स्वयंसेवकों को मार दें ,किसी को शांति से सुला देना नफरत फैलाना नहीं होता ,हम शांति समर्थक हैं उम्मीद है कि आप भी होंगे |

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