हम भारत के लोग

Posted by Sahil verma
September 21, 2017

Self-Published

आज़ादी आकाश में उस पक्षी की उड़ान जैसी है है | हमे जब आज़ादी मिली तब उस समय  का भारत गरीबी, अशिक्षित आयाम, आदि समस्यायों से जूझ रहा था | सामाजिक विषमतियाँ थी, आर्थिक समस्या थी, चुनौतिया ही चुनौतियाँ थी, सरकाऋ दफ्तरों में न मेज न कुर्सी, न पंखे, स्कूल में शिक्षक नहीं थे, अस्पताल  में डॉक्टर नहीं थे, हमारे पास भौतिक संसाधनो के नाम पर कुछ भी नहीं था, था तो केवल हिम्मत, हौसला , नया भारत बनाने का सपना, और सकारात्मक सोच | हमने बांध बनाया जिसने पंजाब, राजस्थान के किसानो को लाभ पाहुचने वाला था | भारतीय अपनी सोच का विस्तार कर सके ,ज्ञान का प्रवाह हो लोग तार्किक बने, उसके लिए अभी आई आई टी खोले गए  | जिसका लोहा दुनिया मानती है | देश परमाणु सम्पन्न बना | दूरदर्शन चेनेल शुरू हुआ हमने मलगुडी डेस, रंगोली, हिन्दी सिनेमा, बाल नाटक का प्रसारण देखा  | 1965 की जंग के बाद देश में एक नारा गुंजा जय जवान जय किसान का | कृषि के सुधार पर ज़ोर दिया गया, हमने हरित क्रांति, दुग्ध क्रांति  का दौर देखा | जिसने कृषि उत्पादन बढ़ा और लोगो को रोजगार मिला | देश ने एमर्जन्सि का दंश झेला फिर भी भारत ने अपना सुपर कम्प्युटर बनाया | टेलीफ़ोन बूथ ने पूरे देश क कोने कोने ने हमे जोड़ दिया | जगह जगह पी सी ओ  दिखते थे | हालांकि उनकी जगह आज मोबाइल ने ले ली है| सड़क, रेल्वे, हवाई पट्टी, हवाई अड्डे को विक्षित किया गया | हमने ग्लोबलीसटीओन का दौर देखा, पिज्जा हट मेकडोनाल्ड , और बड़े विदेशी ब्र्नद भारत आए और भारत के ब्रांड विदेश पहुंचे, काला, संगीत, विज्ञान ने प्रगति की | आज का दौर व्हाट्सप्प और फेस्बूक का दौर, किंडल, इंटरनेट, काशलेस का दौर है | हम फिर लौट रहे वही जहां से हमें शुरात की थी | आज समस्याओं का अंबार लगा हुआ , आज कल आतंकवाद की समस्या पर बात करना, नकसलबाद की समस्या , आदिवासियों की जल जंगल जमीन  का संघर्ष , बलात्कार, गरीबी, भीड़ हीनतमक होना और लोगो जान से मार देना, सामाजिक असमानता पर बात करने से लोग ऊबने लगे हैं | ये शब्द रट से गए हैं | हम सब डरने लगे हैं इन शब्दो से घबराहट होती है इन पर बात करने में | हिंसा का माहौल, आगजनी से रास्ते पर निकालने से दर लगता है | लेकिन बात तो करना है, बात करने से ही इसका हल निकलेगा हल हम ही निकालेंगे | हम भारत के लोग | लेकिन कैसे यह सवाल है ?

 

हम हमेशा से हम भेड़चाल चलते आए हैं | इतिहास गवाह है अंग्रेजों ने बातों ही बातों में मीर जफर से गद्दारी करवा दी, हिन्दू मुस्लिम में फूट दलवा दी | आज भी ढोंगी बाबाओं के झांसे में आकार अपने बचोन की बाली दे देते हैं, साधारण मनुष्य को भगवान बना देते हैं | वही भगवान  छल करते हैं | इसके जिम्मेदार हम ही हैं हम सामने वाले को मौका देता हिन आओ हमें बेबकूफ बनाओ| यूपी में मुंहनोचवा आया था और दिल्ली में काला बंदर. राजस्थान में गोटमेन , कहां से आए थे ? और कहां गए, किसी को नहीं पता| लेकिन जब तक लोगों में इनका ज़िक्र रहा, गज़ब का खौफ रहा. राजस्थान में गोट्मेन आया जो बाल काट लेता था अभी हाल ही में यू पी में सबकी चोटी कट रही है, एक देखने वाले ने कहा कोई बंदर जैसे ही हैं, बंद दरवाजे से अंदर घुसता है और झपपट्टा मार के चोटी काट देता है | यह सब नतीजा है हमारे आँख मूँद कर किसी भी बात पर भरोसा कर लेने का, यह नतीजा है सुनी हुई बात पर यकीन कर लेने का, यह नतीजा है हमारे अनपढ़ होने का | आज फेसबुक, व्हात्सप, पर हिन्दू मुस्लिम में लड़ाई झगड़ा भड़काने के लिए विडियो वाइरल किए जा रहे है| ये सब हमें चीजों को तार्किक तरीके से देखने से रोकता है. हमारी मान्यताओं के चलते अक्सर हम ऐसी बातों पर विश्वास कर बैठते हैं. न सिर्फ विश्वास करने लगते हैं बल्कि इसे किसी ना किसी तरह से आगे बढ़ाने लग जाते हैं. शेयर करने लगते हैं, क्योंकि उसमे हवाला दिया जाता है की अगर सच्चे देशभक्त है तो विडियो शेयर करें, हिन्दू धर्म या मुस्लिम धर्म को बचाना है तो शेयर करें और हम करते है | आर्मी, देश, तिरंगा, धर्म वगैरह की वर्ड्स हैं. उसी के दम पर उन समाज को भावुक किया जाता है| इस किस्म की अफवाह पर भरोसा न करें. न ही इन्हें आगे फैलाएं. अपने आस-पास के लोगों को तार्किक तरीके से समझाएं. और अपने आसपास के लोगों पर निगाह बनाकर रखें कि कोई आपके साथ शरारत तो नहीं कर रहा है. कोई हमे भावुक करके हमारा दुरुपयोग न करे, जो हमें मानसिक तौर पर पंगु न बनाए, जो हम में तार्किकता को सक्षम करे, हमें निडर बनाए, स्वतंत्र बनाए, हमारा दर्शन सबसे आगे का हो, हम सामाजिक प्रयोगों की विश्व में अनुकरणीय लैब बनें, हम झंडों व संकेतों को लेकर कट्‌टर न बनें, हम खुलकर किसी भी परम श्रद्धेय चीज़ पर बात कर सकें. हमारे जो साथी नागरिक आज भी हाशिए पर हैं उन्हें हम अपने साथ लेकर आगे बढ़ें. मैं राजनीति को हमेशा उम्मीद से देखता रहा हूं, नेता को हम ही बनाते है | हम ही सरकार बनाते हैं | सरकार को जनता से डरना चाहिए | अगर हम अपने आप आप जागरूक हो, जिमीदार हो, तो सरकार भी जिमीदार होगी | हम अपने कर्तव्यों को लेकर सजग  बने , हमे हमारे अधिकार मगने का हक़ तभी है जब  अपने कर्तव्य निर्वहन कर सकें |

 

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