हम व्यक्ति के तर्क सहित सिद्ध विचार के समर्थक हो,न कि व्यक्तिे के

Posted by Shivkumar Kanhaiya
September 21, 2017

Self-Published

25/08/2017 को एक बार फिर देश हिंसा की आग में जला 32  लोग मारे गए, 200से अधिक ट्रेने रद्द ,6राज्यों के 15 शहरों में कर्फ्यू जैसे हालात लगभग पूरे देश पर संकट एक बार नहीं कई बार ऐसा ही होता है वो भी वहाँ जहाँ लोकतंत्र है। मैं उन महिलाओं के हिम्मत तथा जज्बे को प्रणाम करता हूँ जिन्होंने इन दुराचारियों के साम्राज्य को ख़त्म कर दिया। क्रान्तिकारी भगत सिंह जी ने कहा था आँख बंद कर किसी के पीछे चलना भी एक गुलामी है। गोरे तो चले जायेंगे, उनकी जगह काले बैठ जायेंगे। धर्म और जात पांत के नाम पर इस देश में एक दिन बो आग लगेगी की बुझाई न बुझेगी।आज यही हो रहा है नेता,अभिनेता, धर्म- रक्षक(बाबा/मौलाना/फादर) खिलाड़ी,गायक और जो भी लोगो की चर्चा में रहते है आदि।इन सभी के करोड़ों फ़ॉलोअर्स होते है खाश भाषा में कहें तो इनके भक्त,फैन होते है। ये इनका इस्तेमाल सरकार तथा कोर्ट पर दबाव बनाने ले लिए करते है ।जब कभी भक्तो तथा फैन के भगवान(नेता,अभिनेता, गायक धर्म -रक्षक, खिलाड़ी ,आदि) का कोई कालाकर्म उजागर होता है तो इनके भक्त तथा फैन के ह्रदय में इनके प्रति भक्ति की बाड़ आ जाती है और ये अपनी संपत्ति, अपने लोग अपनी सरकार को आग के हवाले कर , मार काट कर रक्त बहाकर अपनी भक्ति दिखाते है। आखिर क्यों?

क्योंकि वास्तंव में लोग स्वतंत्र नहीं हैं लोग किसी न किसी पर आश्रित हैं जैसे- डर, चिंता तथा इच्छाओं की पूर्ति के लिए भगवान पर ,ज्ञान एवं शान्ति के लिये धर्म रक्षकों पर, मनोरंजन के लिए अभिनेताओं और खिलाड़ियों पर , संगीत के लिये गायकों पर ,उन्नति के लिए नेताओं पर साहित्य के लिए लेखकों पर ,पब्लिसिटी के लिए मीडिया पर आदि।

इसलिए पूर्ण स्वतंत्र होना लगभग आज के समय में बहुत मुश्किल है । इससे कोई दिक्कत नहीं है और ये गलत भी नहीं है।

अब ये लोग(नेता, अभिनेता,खिलाड़ी, धर्म-रक्षक,गायक) लोगो की भावनाओं से खेलते है उन्हें इतना मोहित कर लेते है कि जनता इनकी भक्त हो जाती है , फैन हो जाती है । अंध भक्त बन जाते है।

मेरे अनुसार यही गलत हे। किसी के फैन, भक्त होना उसे निरंकुस ,तानाशाह , लोगो का सोषण करने वाला बनाता है। आज यही हो रहा है। हम किसी के तर्क सहित सिद्ध विचार के ,खेल के ,संगीत के, भाषण के,कला के समर्थक/प्रेमी हो जायें न की व्यक्ति के तब तक कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन जैसे ही हम उस व्यक्ति के भक्त तथा फैन बनते है तो हम अपने आप को और अपनी आने वाली पीढ़ी को वही दफना देते है। नई सोच नहीं उपज सकती वहीं हमारा जीवन ख़त्म हो जाता है। जीवन में कभी किसी के फैन न बनो । हाँ उसके तर्क।सहित सिद्ध विचार का समर्थन करो। हम स्वतन्त्र होंगे और आनी वाली पीढ़ी भी स्वतंत्र होगी जहाँ न हिंसा होगी न अशांति ।। होगा तो स्वछ सुन्दर समाज।।

शिवकुमार कन्हैया ,23

छात्र एवं सामाजिक कार्यकर्ता ग्वालियर

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