रोहिंग्या शरणार्थियों के नरसंघार व निर्वासन के विरुद्ध सांझा बयान

Posted by Simin Akhter
September 11, 2017

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मयानमार में रोहिंग्या समुदाय के विर्रुद्ध हिंसा का तांडव जारी है और दो सप्ताह से कम समय में लाखों रोहिंग्या लोग बांग्लादेश की सीमा पार करने पर मजबूर किये जा चुके हैं और हज़ारों मारे जा चुके हैं। उपग्रह या सॅटॅलाइट से मिली तस्वीरों के अनुसार,  मयानमार के रखाइन प्रांत में भयंकर आग लगी है, यह वही प्रांत है जहाँ मयानमार के रोहिंग्या समुदाय की अधिकतर आबादी रहती है और हिंसा, हत्या, बलात्कार, लूट व विस्थापन की उस इंतिहा का सामना कर रही है जो दुनिया को झिंझोर देने के लिए काफ़ी है.  संयुक्त राष्ट्रसंघ या यूनाइटेड नेशंस के महा सचिव ने भी इस मयानमार से इस हिंसा को रोकने की गुहार की है और नोबेल पुरस्कार विजेता डेस्मंड टूटू ने भी मयानमार की स्टेट कॉउंसलर, औंग सन सु से इस हिंसा पर अपनी चुप्पी तोड़ने के लिए कहा है. रोहिंग्या समुदाय के साथ होने वाली हिंसा का पैमाना अभूतपूर्व है और यह बेहद ज़रूरी है के इस मुद्दे को शीघ्रता और संवेदना से हल किया जाए.

भारतीय नागरिकों के तौर पर हमे इस मुद्दे पर छायी चुप्पी को तोडना होगा और मौजूदा हालत को देखते हुए रोहिंग्या समुदाय के इस असंवैधानिक निर्वासन के किसी भी प्रस्ताव का विरोध करना होगा. 1970 के दशक से भार में शरणार्थियों के तौर पर रह रहा रोहिंग्या समुदाय एक शान्ति-प्रिय समुदाय है तथा इनके सदस्यों का कोई क्राइम रिकॉर्ड नहीं है. जो लोग इस समुदाय को भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बता रहे हैं, वे एक सोची समझी साम्प्रदाइक साज़िश के तहत यह प्रोपगॅंडा कर रहे हैं. इन दक्षिण-पंथी फ़ासीवादी ताक़तों की कोशिश देश को साम्प्रदाइक रूप से बांटने की है और भारत के नागरिकों के रूप में यह हमारा फ़र्ज़ है की हम इसके विर्रुध एकजुट हूँ और आवाज़ उठाएं. हम समझते हैं रोहांग्या मुसलमानो के साथ यह अमानविक भेद-भाव व अत्याचार साम्प्रदायिक व दक्षिण-पंथी ताक़तों के मुस्लिम-विरोधी एजेंडा का हिस्सा है, और इस देश की धर्म-निरपेक्ष सामजिक संरचना पर एक हमला है. भारत के ननगरिकों के तौर पर हमे मिलकर इसका विरोध करना चाहिए और इसके विरूद्ध आवाज़ उठानी चाहिए. आइये, हम मिलकर, इस नरसंघार और अत्याचार का विरोध करें और रोहिंग्या निर्वासन के विरुद्ध गुहार लगाते हुए, इन्साफ और इंसानियत के हक़ में एक सांझा क़दम उठाएं.

हम समझते हैं, रोहिंग्या समुदाय के विरुद्ध हो रहा यह दुष्प्रचार उसी साज़िश का हिस्सा है जिसके तहत आज़ाद आवाज़ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या कर दी जाती है और अख़लाक़, पहलु ख़ान, जुनैद और ऐसी ही कितने लोगों की जान ले ली गयीं. हम समझते हैं दाभोलकर, पानसरे, कालबुर्गी या गौरी लंकेश पर होने वाला हर हमला, सत्य, सामाजिक चेतना, और धर्म-निरपेक्षता पर प्रहार है, और सत्य और विरोध की आवाज़ों को ताक़त के बल पर दबाने की एक कोशिश है. हम मानते हैं रोहिंग्या मुसलमानो के विरदुद्ध यह झूठा दुष्प्रचार व इनके निर्वासन का प्रस्ताव, इस देश के संविधान में आर्टिकल 21 में निहित मानव जीवन की सुरक्षा के वादे की बरख़िलाफ़ी है, जो भारीतय भूमि पर रह रहे शरणार्थियों पर भी लागू होता है. हम समझते हैं यह बहुत ज़रूरी है कि सभी धर्म-निरपेक्ष, प्रगतिवादी और तर्कशील लोग  मिलकर इसका विरोध करें और भारत के नागरिकों ते तौर पर सरकार को यह बताएं की हम उसे हमारे नाम पर ऐसा करने की इजाज़त नहीं दे सकते.

एक आज़ाद और प्रजातांत्रिक देख के नागरिकों ते तौर पर हम रोहिंग्या समुदाय के साथ होने वाले इस असंवैधानिक और अमानवीय बताव की निंदा करते हैं और इस मुद्दे को ले कर मीडिया समुदाय की मुख्यधारा में छाए सन्नाटे को अपनी आवाज़ से और इस हस्तक्षेप से तोड़ना चाहते हैं। हम समाज के सभी प्रगतिवादी, धर्म-निरपेक्ष और तर्कशील लोगों व समुदायों से यह अपील भी करते हैं कि इस मुद्दे पर अपनी ख़ामोशी तोड़ें और सोशल मीडिया पर इस सवाल पर बात करें। हम मीडिया समुदाय के सभी प्रगतिवादी और तर्कशील साथियों  से भी हमारी अपील है कि वे इस मुद्दे को उठाएं और कल माननीय सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले सरकार को यह बताएं की हम, भारत के नागरिक, यह नहीं चाहते कि हमारे नाम पर, रोहिंग्या समुदाय को निर्वासित करके उन्हें मौत के मुँह में धकेल दिया जाए.

समर्थन में:
सीमीं अख़्तर 
इरम
सचिन न. नारायणन 
रोहिथ पी.
सौरभ सिंह 
संदीप 
बी.पी. शर्मा 
नवीन गौर 
पप्पू राम मीणा 
म. यु. फ़ारूक़ 
राहुल रॉय 
सबा दीवान 
आयेशा क़िदवई 
ललिता रामदास 
एडमिरल ल. रामदास
संजय कुमार बोहिदार 
योगेश पुरी 
मुश्ताक़ पहलगामी 
शाइस्ता सिद्दीक़ी 
फ़रहा दीबा 
मोहम्मद आमिर 
आरिफ़ बजरान 
नन्दिता नारायण
रीना रामदेव 
देबजानी सेनगुप्ता
सरिता कौशल 
सय्यद मोहसिन वहीद 
विनीता चंद्रा 
मुकुल चतुर्वेदी 
विजेंद्र मसिजीवी 
फ्रेनि मानेकशॉ 
सरिता त्रिपाठी 
स्निग्धा समल 
रबी एलंग्बम 
शीरीं अख़्तर 
नीलिमा चौहान 
नाहीद हफ़ीज़ी 
ज़फर उल्लाह 
आभा देव हबीब 
चित्रा जोशी 
सैकत घोष 
संचिता खुराना 
नंदिनी मकवाना 
मिहिर पांडे 
सुवृत्ता खत्री 
रंजीत कुमार 
सीमा रावत 
मानशी मिस्रा 
मुकेश असीम 
पुलिन नायक
नलिनी नायक 
हेरिएट रघुनाथन 
सौम्यजीत भट्टाचार्या 
राकेश रंजन 
मुकुल मांगलिक 
नीलोफर कॉल 
सनम खन्ना 
संचिता खुराना 
रूपा धवन 
पी. के. विजयन 
विजय सिंह 
रविंदर गोयल 
बेनु मोहनलाल 
शाहिद अख़्तर 
नरेन् सिंह 
अदिति चौधुरी 
अंजलि मोंटेरो 
के. पी. जयसंकर 
यामिनी सरगोत्रा 
जलेश्वर उपाधयाय 
समिता ऐ. चट्टोपाध्याय 
मालोश्री सरकार 
इंद्रनील दासगुप्ता 
अनुराधा मारवाह 
महेंद्र तराणेकर 
कुमार मुकेश 
सुबोध लाल 
नरेश प्रेरणा 
रूचि सिंह 
राजीब सेनगुप्ता 
मेहा मिश्रा 
बिराज बोस 
आफ़ताब आलम 
संध्या डी. नम्बिआर 
फ़ुरक़ान फ़रीदी 
प्रदीप एस्टीव्स 
प्राची गुप्ता 
शुभा 
अमित सेनगुप्ता 
शमीम उद्दीन अंसारी 
तारिक़ अनवर 
राधिका मेनन 
कैरेन गेब्रियल 
असद ज़ैदी
नलिनी तनेजा
इंदिरा प्रसाद
मोहिंदर सिंह
रिमली भट्टाचार्य
तनवीर एजाज़
रुद्राशीष चक्रबोर्ती
हरी सेन
चित्रा जोशी
और बाक़ी साथी

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