हरियाणा पुलिस पर मुस्लिम युवक के फर्ज़ी एनकाउंटर का आरोप

Posted by Sidharth Bhatt in Hindi, Staff Picks, Stories by YKA
September 21, 2017

भारत में मुसलमानों की सुरक्षा और इस देश की भीड़ और प्रशासन से उनका डर पिछले कुछ सालों में शायद कुछ सबसे बड़े मुद्दों में से एक है। अखलाक, पहलू या नजीब शायद इन सबका नाम आपको याद करवाने की ज़रूरत नहीं है। बातें बहुत हुईं नारे बहुत लगें लेकिन इस लिस्ट में और नाम जुड़ते चले गएं। हरियाणा के नूह का मुनफैद देश के चरित्र पर सवाल उठाने वाली इस लिस्ट में जुड़ने वाला एक नया बद्किस्मत है। कथित रूप से मुनफैद नाम के एक युवक का पुलिस द्वारा फर्ज़ी एनकाउंटर कर दिया गया।

स्थानीय लोगों से बात करती सिटिज़न अगेंस्ट हेट की टीम

दिल्ली के ‘सिटीज़न अगेंस्ट हेट’ नाम के एक सिविल सोसायटी ग्रुप ने इस मामले को अपनी एक रिपोर्ट में सामने लाया। इसी संस्था कि एक अन्य रिपोर्ट ‘लिंचिंग विदआउट एंड‘ के अनुसार पिछले कुछ सालों में हरियाणा के नूह और फरीदाबाद ज़िलों में मुस्लिम युवाओं के पुलिस एनकाउंटर की घटनाओं में काफी बढ़ोतरी आई है। केवल नूह ज़िले ही में 11 पुलिस एनकाउंटर की बात सामने आई है जिसमें 15 लोगों की मौत हुई है।

‘सिटीज़न अगेंस्ट हेट’ ने Youth Ki Awaaz को जो रिपोर्ट सौंपी थी उसके मुताबिक देर रात 16 सितम्बर को खड़खड़ी गांव के मुनफैद उर्फ चौड़ा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। नूंह पुलिस ने जहां इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, वहीं मृतक के पिता इस्लाम ने पुलिस पर मुनफैद का फर्ज़ी एनकाउंटर करने का आरोप लगाया है।

‘सिटीज़न अगेंस्ट हेट’ की टीम द्वारा की गई मामले की तफ्तीश:

मुनफैद के पिता इस्लाम हुसैन के अनुसार- मुनफैद पर बलात्कार का झूठा केस दर्ज था जिसके सिलसिले में वह लगातार पुलिस के लोगों से संपर्क में था। इस्लाम ने यह भी बताया कि मुनफैद पुलिस के कहने पर उनके काम भी किया करता था। उन्होंने आगे बताया कि 15 सितम्बर की शाम को मुनफैद उनसे आखिरी बार मिला था, तब पुलिस ऑफिसर्स के उसे लगातार कॉल आ रहे थे और वो उसे कोई काम करने को कह रहे थे साथ ही बलात्कार के मामले से भी उसका नाम वापस लेने की बात कह रहे थे। मुनफैद के ससुर ने दो पुलिसवालों लोगों विक्रांत और शक्ति सिंह का नाम लेते हुए बताया कि मुनफैद ने रेप केस से उसका नाम हटाने के लिए इनमे से एक को 2000/- रु. भी दिए थे।

घटनास्थल (तावडू घाटी) के पास के गांव रोज़केमेव के लोगों ने बताया कि मुनफैद अपने दो दोस्तों के साथ पुलिस ऑफिसर्स से मिलने रेवाड़ी गया था और वापस लौटते समय बीच रास्ते में ही हरे रंग के बोलेरो में आए पुलिस वालों ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी। किसी तरह मुनफैद के दोनों दोस्त वहां से भागने में सफल रहे लेकिन पुलिस के डर से अभी छिपे हुए हैं। इन दोनों युवकों में से एक युवक ने एक विडियो में मुनफैद के पुलिस द्वारा फर्ज़ी एनकाउंटर किए जाने की बात कही है, साथ ही कहा है कि वह हत्या में शामिल पुलिसकर्मियों की शिनाख्त भी कर सकता है। ये तमाम बातें गांववालों को मुनफैद के उन दो दोस्तों ने ही बताई।

रोज़केमेव(मुनफैद के गांव खड़खड़ी का पड़ोसी गांव) गांव के लोगों ने बताया कि मुनफैद को सबसे पहले नल्हड मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल, नूह ले जाया गया जहां उसे डोक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने हॉस्पिटल के डॉक्टरों पर पोस्टमॉर्टम करने के लिए दबाव बनाया। लेकिन नियम का हवाला देकर हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने पोस्टमॉर्टम करने से इनकार कर दिया। इस नियम के हिसाब से अगर शव की शिनाख्त नहीं हो पाती है तो 3 दिनों तक पोस्टमॉर्टम नहीं किया जा सकता है।

मुनफैद के पिता इस्लाम हुसैन

इसके बाद पुलिस मुनफैद के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए नूह के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (CHC) लेकर गई, लेकिन वहां भी डॉक्टरों ने पोस्टमॉर्टम करने से इनकार कर दिया। अब पुलिस को शव के पोस्टमॉर्टम के लिए पलवल से डॉक्टर को बुलाना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस मुनफैद के परिवारजनों के आने से पहले ही पोस्टमॉर्टम करवा देना चाहती थी ताकि उक्त घटना में पुलिस के लिप्त होने के सबूत मिटाए जा सकें।

मुनफैद के पिता इस्लाम ने आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस और डॉक्टर मुनफैद के शव से सबूत मिटाने की कोशिश कर रहे थे। जब इस्लाम ने उन्हें मुनफैद के शव से कपड़े निकालते हुए देखा और इसका विरोध किया तो उन्हें गाली देकर वहां से निकल जाने को कहा गया।

मुनफैद के पिता ने 16 सितम्बर को दोपहर तीन बजे पुलिस को एक लिखित बयान दिया जिसमें उन्होंने CIA स्टाफ के 6 लोगों के मुनफैद की हत्या में शामिल होने की बात कही है। S.P. मेवात नाज़नीन भसीन ने इस्लाम को भरोसा दिलाया कि उनके बयान के आधार पर FIR दर्ज की जाएगी। जब सिटीजन अगेंस्ट हेट की टीम इस्लाम से मिली तो उन्हें पता नहीं था कि पुलिस 16 सितम्बर की सुबह 10:39 पर ही FIR दर्ज की जा चुकी थी, जो उनके बयान के आधार पर नहीं थी और ना ही उनके बयान के आधार पर कोई अलग FIR ही दर्ज की गई थी। सिटीजन अगेंस्ट हेट की टीम से ही उन्हें यह जानकारी मिली।

क्या कहती है पुलिस की रिपोर्ट:

सीआईए (Central Investigation Agency, Haryana) के इंस्पेक्टर मस्ताना के बयान के आधार पर हरियाणा पुलिस ने नूह ज़िले के तावडू पुलिस थाने में इस मामले में FIR (FIR No.- 0358; 16-09-2017; 10:39 am) दर्ज की। FIR के अनुसार 16 सितम्बर की रात 2:45 को गश्त के दौरान तावडू घाटी में बंद पड़े माइनिंग कांटे के पास रोड के बीचों-बीच इंस्पेक्टर मस्ताना को एक सफेद पिक-अप (FIR में पिक-अप का रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं दिया गया है) दिखी। पिक-अप चेक करने पर उसके अन्दर ज़ख़्मी हालत में एक नौजवान मिला, जिसकी तब तक सांसें चल रही थी। वहां से ज़ख्मी युवक को नल्हड अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस मामले में अज्ञात हमलावर के खिलाफ u/s 302, 201 IPC और सेक्शन 25 आर्म्स एक्ट 1959 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

Youth Ki Awaaz की पुलिस से हुई बातचीत:

इस मामले में पुलिस का पक्ष जानने के लिए जब Youth Ki Awaaz ने हरियाणा पुलिस से बात की तो उन्होंने बताया-

1)- मामले की पूरी जांच के लिए 4 सदस्यों की एक विशेष टीम (Special Investigation Team) का गठन किया गया है।
2)- इस्लाम हुसैन द्वारा दर्ज कराए गए बयान को अब FIR में शामिल कर लिया गया है।
3)- इस्लाम हुसैन ने अपने बयान में CIA स्टाफ के जिन लोगों का नाम बताया है, SIT उसकी जांच कर रही है।
4)- पोस्टमॉर्टम के दौरान छेड़खानी संभव नहीं है क्यूंकि यह एक डॉक्टरों के दल द्वारा किया गया था।

DSP फिरोज़पुर झिरका के अनुसार-

1)- पोस्टमॉर्टम करने वाली टीम में 3 डॉक्टर शामिल थे जिसका विडियो भी बनाया गया, इसलिए पोस्टमॉर्टम के दौरान सबूतों से छेड़छाड़ संभव नहीं है।
2)- SIT के सदस्य :  DSP फिरोज़पुर झिरका, इंस्पेक्टर अर्जुन सिंह, इंस्पेक्टर विपिन और सब इंस्पेक्टर विजय पाल।
3)- CIA हरियाणा पुलिस का ही एक विशेष दस्ता है।
4)- 18 सितम्बर को SIT का गठन कर दिया गया था।

फोटो आभार: सिटिज़न अगेंस्ट हेट

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