“मैं पंचायत के सामने गिड़गिड़ाती रही और वो मेरे पति पर कोड़े बरसाते रहें”

एडिटर्स नोट: मामले की आधिकारिक पुष्टी के लिए Youth Ki Awaaz ने महागामा थाना के ऑफिसर इंचार्ज महेन्द्र यादव से बात की। उन्होंने बताया कि इस प्रकरण को लेकर केस दर्ज हो चुका है और मामला कोर्ट में पहुंच चुका है। साथ ही उन्होंने बताया कि वरीय पदाधिकारी से कुछ आदेश प्राप्त होने हैं जिस कारण विलंब हो रहा है, हालांकि कार्यवाही चल रही है। वरीय पदाधिकारी की ओर से रिपोर्ट-II प्राप्त होने के बाद कुर्की जब्ती के साथ गिरफ्तारी होनी है। मामलें में 5 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है। 

आधुनिक भारत में पंचो की प्रथा पर लगातार प्रश्नचिन्ह उठते रहे हैं। एक ऐसी प्रथा जो आज भी कई पंचायतों में सदियों से बदस्तूर जारी है, जहां पंचों का दर्जा अदालत से भी ऊपर समझा जाता है। पंचों के गलत फैसलों से तबाह हुई जिंदगियों की बड़ी लंबी फेहरिस्त है। इस सूची में एक मामला झारखंड के गोड्डा जिले के महागामा ब्लॉक स्थित गांव बंदरचुआ का है। पंचों के एक गलत फैसले ने इस गांव की एक 60 वर्षीय महिला से उसके पति बासुदेव दास को जुदा कर दिया।

क्या है पूरा मामला

बंदरचुआ गांव

गांव के नल से पानी भरने के क्रम में बासुदेव की पोती संग कुछ लोगों की अनबन हुई और यहीं से शुरू हुआ पूरा विवाद। बासुदेव के पड़ोसियों ने उनकी पोती को उकसाते हुए कहा कि तुम्हारे ये जो बांस यहां रखे हैं हम उन्हें फेंक रहे हैं। जाओ जाकर दादी से कह दो। बच्ची ने घर आकर जब ये बात अपनी दादी (बासुदेव की पत्नी) को बताई तो उन्होंने घटना स्थल पर पहुंचकर अपने बांस के फेंके जाने का विरोध किया। इतने ही में विरोधी खेमे की एक औरत ने आकर बासुदेव की पत्नी के गाल पर थप्पड़ जड़ दिया।

पत्नी को थप्पड़ मारे जाने की खबर मिलते ही बासुदेव बचाव करने वहां पहुंच गए। दोनों पक्षों की ओर से लंबी बहस के बाद यूं लगा जैसे मामला शांत हो गया। लेकिन विरोधी खेमें के लोगों ने पंचों के साथ मिलकर बासुदेव के खिलाफ तगड़ी रणनीति तैयार कर दी। दो दिनों के बाद उन लोगों ने भारी तादात में ग्रामीणों को इकट्ठाकर बासुदेव के घर पर पथराव करना शुरू कर दिया। इसी क्रम में लोगों ने जबरन बासुदेव के घर के दरवाज़ा तोड़ा और उसे उठा ले गए। ग्रामीणों की मौजूदगी के बीच विरोधी खेमे के लोग पंचों के साथ मिलकर बासुदेव को पीटते हुए पंचायत तक ले गए। वहां उसे खंभे से बांधकर उस पर जमकर कोड़े बरसाए गए।

बासुदेव की पत्नी ने पंचों से मांगी रहम की भीख

यूथ की आवाज़ से बातचीत के दौरान बासुदेव दास की पत्नी ने बताया, “मैं उस खौफनाक रात को कभी नहीं भूल सकती जब पांच महीने पहले शराब के नशे में सराबोर पंचों की टोली ने मेरे पति पर कोड़ों की बरसात कर दी। जब मैं पंचों के पैर पकड़कर अपने पति के लिए रहम की भीख मांगने लगी, तो उन्होंने मुझसे कहा कि हट जाओ वरना तुम्हारे साथ भी वैसा ही सुलूक होगा जैसा तुम्हारे पति के साथ हो रहा है।” बासुदेव की पत्नी आगे बताती हैं, “पंचों की धमकी सुनकर जब मैं अपने घर चली गई, तो उन लोगों ने मेरे पति को अधमरी हालत में मेरे घर पर फेंक दिया।”

सरपंचों की प्रताड़ना ने ली बासुदेव की जान

बासुदेव की पत्नी के मुताबिक “पंचों की प्रताड़ना के बाद उन्हें मानसिक तौर पर गहरा सदमा लगा और उसी रात उन्होंने अपने शरीर पर किरोसिन तेल उढ़ेलकर आग लगा ली। इसी हालत में हम उन्हें पुलिस स्टेशन ले गए जहां मौके पर मौजूद ऑफसर इंचार्ज ने रिपोर्ट तो दर्ज कर ली लेकिन आज तक हमे इंसाफ नहीं मिला। पैसों के बल पर सरपंचों ने मामले को दबाए रखा है। अभी भी मेरे परिवार में डर का माहौल बना है, हमें धमकियां मिलती हैं कि यदि हमने इंसाफ के लिए गुहार लगाई तो हमे जान से मार देंगे।”

बासुदेव की पत्नी आगे बताती हैं कि अब हमारी इतनी भी हिम्मत नहीं होती कि हम न्याय के लिए पुलिस चौकी या अदालतों के चक्कर काटें। क्योंकि हमें तो इसी गांव में रहना है और वो लोग पैसों के बल पर कुछ भी कर सकते हैं।

जब हमने इस सिलसिले में ग्रामीणों से बात करने की कोशिश की, तो पंचों की दबंगई के चलते कोई भी बात करने को राज़ी नहीं हुआ। बासुदेव के पड़ोसी गांव सरभंगा के जितेन्द्र दास ने घटना की पुष्टि करते हुए प्रशासन पर करारा प्रहार किया। उन्होंने बताया कि मौजूदा वक्त में बासुदेव का परिवार आर्थिक तंगी से गुज़र रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन यदि चाहे तो आज भी बासुदेव के परिवार को न्याय मिल सकता है। लेकिन विरोधी खेमें और पंचों की दबंगई के बीच प्रशासन घुटने टेकता नज़र आ रहा है। जितेन्द्र आगे बताते हैं कि इस घटना के पीछे समाज के लोग भी उतने ही कुसूरवार हैं, जितना कि पंच और पुलिस प्रसाशन। घटना के दौरान सभी ग्रामीण तमाशबीन बनकर नज़ारा देख रहे थे।

गौरतलब है कि देश की अदालतों में दबंगों द्वारा गरीबों पर अत्याचार के असंख्य मामलों की फाइलों को दीमक खा रहे हैं। बेबस और लाचार लोगों पर ऐसे गुंडे सितम ढ़ाए जा रहे हैं लेकिन सुनने वाला कोई नहीं। आशा है बदलते वक्त के साथ खुद को पंच परमेश्वर का दर्जा देने वाले इन पंचों की दबंगई पर लगाम लग सकेगी ताकि समाज में बासुदेव जैसे गरीब लोगों को अपनी ज़िंदगी ना गंवानी पड़े।


फोटो प्रतीकात्मक है।
फोटो आभार: getty images 

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