राज्य की स्थिति पर छत्तीसगढ़ काँग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल की संघ स्वंयसेवकों को चिट्ठी

Posted by Bhupesh Baghel in Hindi, Politics, Staff Picks
September 28, 2017

स्वयंसेवकों,

आप लाख कहें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राजनीति नहीं करती, लेकिन कौन मानेगा? सर्वविदित है कि भारतीय जनता पार्टी संघ की राजनीतिक शाखा है। भाजपा के सारे नेता संघ के नेताओं को गुरु के स्थान पर रखते हैं और गुरुपूर्णिमा पर दक्षिणा देने भी पहुंचते हैं। गाहे- बगाहे वहां संघ की वेशभूषा धारण किए मंचस्थ भी दिखाई देते हैं। संघ के कहे बिना वहां भाजपा में पत्ता तक नहीं खड़क सकता। न मंत्री बनाए जा सकते हैं और न हटाए जा सकते हैं। संघ ही भाजपा की राजनीति के लिए रास्ता तय करता है और ज़रूरत पड़ने पर मार्ग बनाता भी है। भाजपा में संघ की सहमति बिना न नीतियां बन सकती हैं और न बदल सकती हैं।

ऐसे में जानने की इच्छा होती है कि शराब पर संघ की क्या नीति है? क्या आप चाहते हैं कि शराब की बिक्री, तस्करी और कालाबाज़ारी जारी रहे और गरीब जनता की कमाई का बड़ा हिस्सा शराब में खर्च होता रहे? छत्तीसगढ़ में पारिवारिक कलह की एक बड़ी वजह शराब बन गई है। यही वजह है कि राज्य की सौ प्रतिशत महिलाएं शराब बंदी के पक्ष में खड़ी हैं और संघर्ष कर रही हैं। क्या आप नहीं चाहते कि शराब बंदी हो और परिवार सुख-शांति से रहें, लोग स्वस्थ रहें और कमाई का हिस्सा बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर खर्च हो?

छत्तीसगढ़ के एक प्रमुख स्वयंसेवक डॉ. पूर्णेन्दू सक्सेना ने कहा कि संघ शराब को खराब चीज़ मानता है, लेकिन संघ की ओर से सरकार को कुछ नहीं कहा जाएगा। क्या यही संघ की नीति है? रमन सिंह जी के नेतृत्व में चल रही सरकार ने इसी वित्तीय वर्ष से खुद शराब बेचना शुरू किया है। सारे स्वयंसेवक चुप हैं। इससे जनता ने यही समझा है कि संघ सरकार के शराब बेचने के फैसले का समर्थन करता है। क्यों कर रहे हैं स्वयंसेवक शराब बेचने का समर्थन?

छत्तीसगढ़ सरकार ने जब शराब खुद बेचने का फैसला किया, तो एक अख़बार ने सर्वेक्षण करके बताया कि 90 में से 85 विधायक शराब बंदी के पक्ष में हैं। फिर यह चर्चा शुरू हुई कि रमन सिंह सरकार की नज़र शराब से मिलने वाले कमीशन पर है। हमें जानकारी है कि सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों ने कैबिनेट की बैठक में इस फैसले का विरोध किया था। अखबारों में प्रकाशित हुआ कि एक मंत्री ने यहां तक पूछा कि शराब बेचने से सरकार को साल में 1500 करोड़ रुपये का कमीशन मिलेगा, तो यह कमीशन किसके खाते में जाएगा, सरकार के खाते में या कहीं और? एक चर्चा यह भी छत्तीसगढ़ में है कि इस कमीशन का बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भी जा रहा है, जिससे कि संघ के ‘कार्यक्रमों’ को आगे बढ़ाया जा सके और इसीलिए संघ शराब बेचने के सरकार के निर्णय का विरोध नहीं कर रहा है। क्या यही सच्चाई है? हम तो इसमें सच्चाई देखते हैं क्योंकि नान घोटाले की डायरियों में बहुत सा पैसा नागपुर जाने का ज़िक्र आता है, नागपुर किसके पास पैसा जाता है यह तो बच्चा-बच्चा जानता है।

मैं तो कभी आपकी शाखाओं में गया नहीं, लेकिन सुना है कि आप सबको वहां शुचिता का बड़ा पाठ पढ़ाया जाता है। फिर सुना कि सत्ता पाने के लिए और अन्य ‘व्यापक हितों’ के लिए संघ ने ‘आर्थिक शुचिता’ के विचार को फिलहाल स्थगित कर दिया है। आर्थिक शुचिता स्थगित करने का मतलब है भाजपा सरकारों को भ्रष्टाचार करने की खुली छूट। क्यों किया संघ ने ऐसा? यानी संघ खुद भी भ्रष्ट हो गया है और भ्रष्टाचार को भी भारतीय संस्कृति की अपनी परिभाषा का हिस्सा मान लिया है?

अगर ऐसा नहीं होता तो आप अपने मुख्यमंत्री रमन सिंह को भ्रष्टाचार करने की ऐसी खुली छूट नहीं देते। भारत में ऐसा शायद ही कोई मुख्यमंत्री होगा, जिसका नाम हर घोटाले में आता हो।

प्रियदर्शिनी बैंक घोटाले का मुख्य आरोपी वीडियो पर यह कहते दिखाई देता है कि उसने रमन सिंह को दो करोड़ रुपये पहुंचाए, 36000 करोड़ के नान घोटाले में जो दस्तावेज़ अदालत में पेश किए गए हैं, उसमें ज़िक्र है कि पैसे ‘सीएम मैडम’ को दिए गए, अगुस्टा हेलिकॉप्टर की खरीदी में भ्रष्टाचार के कागज़ात भी अदालत में हैं, और हद हो गई कि मुख्यमंत्री के पते पर विदेश में खाता खोला गया, किसी अभिषाक सिंह के नाम से (देश के एक नामी वकील कहते हैं कि यह अभिषाक सिंह, रमन सिंह के सांसद पुत्र अभिषेक सिंह ही हैं) और रमन सिंह इसकी शिकायत तक नहीं करते। ऐसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री को संघ दुलार-पुचकार कर क्यों रखता है? ज़ाहिर है कि आपकी शुचिता की शिक्षा केवल शाखाओं तक सीमित है।

यह भी ऐतिहासिक है कि रमन सिंह जी पार्टी की कार्यकारिणी में पार्टी के कार्यकर्ताओं, नेताओं और मंत्रियों से अपील करते हैं कि वे एक साल के लिए कमीशन खाना बंद कर दें। यह उनके 14 साल के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार की खुली स्वीकारोक्ति है और आश्चर्य है कि संघ इस पर भी चुप्पी साधे बैठा रहता है। संघ ही भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा पोषक हो गया है।

रमन सिंह जी चाहे आपको जो बताते हों, लेकिन समझ लीजिए कि छत्तीसगढ़ एक गरीब राज्य है जो लगातार गरीब होता जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि जब राज्य बना तो राज्य में 37 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा के नीचे थे जबकि हाल ही में एक साक्षात्कार में मुख्यमंत्री रमन सिंह जी ने कहा कि इस समय प्रदेश में 44 प्रतिशत लोग गरीब हैं।

यह प्रदेश अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तरस रहा है। राज्य में शिक्षकों के 50 हज़ार से अधिक पद कई वर्षों से रिक्त हैं और इसमें भर्ती नहीं हो पा रही है। स्कूलों में पढ़ाई इतनी कमज़ोर हो गई है कि 77 प्रतिशत बच्चे जो तीसरी कक्षा में पढ़ते हैं वे सामान्य जोड़-घटाना भी नहीं कर पाते और न हिंदी की वर्णमाला पढ़ पाते हैं। यह तो छत्तीसगढ़ के बच्चों को मज़दूर बनाने का षडयंत्र है और सारे स्वयंसेवकों की चुप्पी उन्हें इस षडयंत्र में भागीदार बनाती है।

स्वास्थ्य सेवाएं भी दिन ब दिन खराब होती जा रही हैं। अखबारों में हर दूसरे दिन खबर आ रही है कि मरीज़ को परिजन कंधे पर लेकर कई किलोमीटर चलकर अस्पताल पहुंचा रहे हैं। शव ढोने के लिए भी वाहन नहीं हैं। स्मार्टकार्ड के नाम पर घोटाले हो रहे हैं। सरकारी अस्पतालों की हालत खस्ता हो गई है और जनता दर-दर भटक रही है। यह नीति भी संघ के ज़रिए ही सरकार तक पहुंची होगी।

किसानों की हालत लगातार खराब होती जा रही है। यह वो छत्तीसगढ़ है जो ‘धान का कटोरा’ कहलाता था और यहां किसानों की आत्महत्या की खबरें कभी देखने को नहीं मिलती थीं। लेकिन भारतीय जनता पार्टी के 14 वर्षों के शासनकाल में किसान आत्महत्या की ख़बरें आम हो गई हैं। नहरों के ज़रिए सिंचित होने वाले कृषि क्षेत्र का रकबा घट गया है। बांधों का पानी किसानों को देने की जगह उद्योगों को बेच दिया गया है। कृषि भूमि उद्योगों के लिए ले ली गई हैं, लेकिन किसानों का व्यवस्थापन नहीं हुआ है। 2100 रु. समर्थन मूल्य और 300 रु. बोनस का वादा रमन सिंह जी ने नहीं निभाया, इससे भी निराशा पनपी है।

भाजपा की सरकार पिछले 14 वर्षों से नक्सलियों से निपटने का दावा कर रही है, लेकिन सच यह है कि भाजपा शासनकाल में नक्सली गतिविधियां बढ़ी हैं। नक्सलवाद से निपटने के नाम पर पुलिसिया आतंक भी बढ़ा है। सरकारी आंकड़े ही बताते हैं कि नक्सली आत्मसमर्पण के नाम पर फ़र्ज़ी आत्मसमर्पण करवाए जा रहे हैं. आदिवासी दोनों ओर से पिस रहे हैं। न महिलाएं सुरक्षित हैं और न बच्चे। जंगल के इलाके में संघ के कई संगठन आदिवासियों के बीच काम करते हैं, तो क्यों स्वयंसेवक इस अत्याचार पर चुप रहते हैं?

मीडिया पर जितना दबाव भाजपा की रमन सिंह सरकार डाल रही हैं, वह अभूतपूर्व है। हम जानते हैं कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संघ की दीक्षा का हिस्सा नहीं है और न संविधान पर आपकी आस्था है, लेकिन भाजपा तो संविधान से बंधी हुई है। वह क्यों मीडिया को कुचलने में लगी हुई है? ऐसा नहीं हो सकता कि यह सब जानकारियां आपके पास न हों क्योंकि आपके आनुषांगिक संगठन पूरे प्रदेश में अलग-अलग स्तर पर काम कर रहे हैं और वे किसी अच्छे जासूस की तरह जानकारियां संघ में हर स्तर तक पहुंचाते हैं।

क्या उन्होंने आपको यह भी बताया कि शराब बेचने वाली छत्तीसगढ़ की रमन सिंह सरकार शराब का विरोध करने वाली महिला संगठनों पर भी हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है? जो खुद शराब बेच रहा हो, उसे शराब का विरोध करवाने का नाटक करने की क्या ज़रूरत भला।आपको क्या यह बताया गया कि शराब की दुकानें खोलने के लिए सरकार को खासी मशक्कत करनी पड़ी क्योंकि लोग अपने मोहल्लों में शराब दुकानें खोलने नहीं देना चाहते थे। आख़िरकार रमन सिंह जी को प्रशासनिक आतंकवाद फैलाकर दुकानें खोलनी पड़ीं। मुझे विश्वास है कि आपको यह भी नहीं बताया गया होगा कि बेरोज़गारी से जूझ रहे छत्तीसगढ़ में रमन सिंह जी की सरकार ने इंजीनियर और पोस्ट ग्रेजुएट लोगों को भी शराब बेचने के काम में लगा दिया है।

संघ के ढांचे में महिलाओं के लिए कोई स्थान नहीं है। तो यह जानने की उत्सुकता होती है कि महिलाओं को लेकर आपके क्या विचार हैं?

समय-समय पर संघ से जुड़े नेताओं के अजीबो गरीब बयान आते रहते हैं। कभी उनके पहनावे पर, तो कभी उनकी ज़िम्मेदारियों पर। क्यों यह नहीं मान लेना चाहिए कि बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में लड़कियों के साथ जो बर्बर व्यवहार हुआ है, दरअसल वही आपका महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण है?

काँग्रेस को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से कोई अपेक्षा नहीं है। हम जानते हैं कि जिस संस्कृति की रक्षा की बात आप करते हैं वह सर्वजन के हित में नहीं है, आप जिस देश की कल्पना करते हैं वह सर्वसमावेशी नहीं है। लेकिन आप जनता के द्वारा चुनी गई एक सरकार के आका हैं। इसलिए जनता की अपेक्षा आपसे भी है कि यदि सरकार भ्रष्ट और कमीशनखोर हो गई है, तो आप चुप क्यों हैं? हिस्सेदार हैं, इसलिए या फिर कोई और छुपा हुआ एजेंडा है?

सादर,

भवदीय,

भूपेश बघेल

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.

हर हफ्ते Youth Ki Awaaz हिंदी की बेहतरीन स्टोरीज़ अपने मेल में पाने के लिए यहां सब्सक्राइब करें।