अनारकली of आजादी

Posted by Swanimesh Raaj
October 1, 2017

Self-Published

दोस्तों,
As a writer-Director मुझे अब तक एक ही बात समझ में आई है कि Film को प्रभावशाली बनाने के लिए उसकी कहानी में Element of public Interest का Graph 10,20, to 100 तक एक increasing order में बढ़ता रहे ना कि 10-20-50-20 and so on

But #anarkaliofarrah इन बातों को खंडन करते हुए अपने आप में एक Mastepiece है…Interval के बाद से आधे घंटे तक बहुत ही weak screenplay लगनी प्रतीत होती है…मन में आघात पहूँचने लगती है कि इतनी अच्छी तो चल रही थी़ FIlm, तो screenplay को क्यों यूँ “नाश” कर दिया…

पर किसी को भनक भी नही लगती है कि ये सब Diretor अविनाश सर की एक बहुत ही सुझबूझ से फेका हुआ पाशा था जो थोड़ा सा पीछे हटकर एक ही बार में Indian Cinema की सबसे बडी़ लम्बी छलांग लगाने वाली है…

क्योंकि यारों, Film अपने अंतिम के दस मिनट में एक Excellent lyrics & Amazing meaningful Choreography ने ना सिर्फ दर्शकों के दिलो-दिमाग पर FOREVER फतेह हासिल की बल्कि बिना अश्लील दृश्य परोसे हुए “VC जैसे लोगों के अंदर अश्लिलता भरे सोच का भी “नाश” किया…”

और Film की complete कहानी को ही प्रस्तूत करते हुए, Ending Point के चन्द Seconds में,,,Avinash Das Sir ने Swara Bhasker ma’am के कमाल की अदाकारी (moving on the street) के जरिए समाज तक ये संदेश भी पहूँचा दिया कि एक कलाकार आजाद है अपनी तरह से जिन्दगी जीने के लिए और इतिहास गवाह हैकि सदियों से “अनारकली” के सामने हर एक बादशाह भी नतमस्तक हुए हैं,,,So Anarkali of Arrah is Actually Anarkali of AAZAADI…!!!

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