अपराधबोध

Posted by Satish Jaiswal
October 5, 2017

Self-Published

पहली कक्षा में अपने दादा जी की झूठी कसम खाकर घर लौटे उस मासूम से पूछिए जिसके घर पहुँचने के दो घंटे बाद ही उसके दादा मर जाते हैं।

छठी कक्षा की उस लड़की से पूछिए जिसके एक झूठी शिकायत पर लड़के को लड़की के भाई पिट देते हैं।

उस लड़के से पूछिए जिसके बेस्ट फ़्रेंड ने इक्जामनेशन रूम में उसे अपनी कापी दे दी,लौटाते समय इक्जामनर उन्हें देख लेता है और रिस्टिकेट कर देता है।

उस लड़की से पूछिए जिसने अपने माँ बाप के ख़िलाफ़ जाकर लड़का चुना जो दर नालायक निकलता है।

पूर्व प्रेमिका छोड़ किसी और को चुन लेने वाले उस लड़के से पूछिए जिसको अब अपनी प्रेयसी हद से ज्यादा याद आती है।

क्रीज़ पर अभी आये उस बैट्समैन से पूछिये जिसके एक ग़लत कॉल से जमा जमाया बैट्समैन जिसकी जरूरत टीम को है,रन आउट हो जाता है।

निर्भया के उस दोस्त से पूछिए जो घटनास्थल पर मौजूद होने के बाद भी निर्भया को हवशी दरिंदो से बचा नही पाया।

युद्ध में लड़ रहे उस सैनिक से पूछिए जिसकी गोली से विरोधी दल का वो सैनिक मरा गया जिसने पिछले रमजान या दीपावली को मिठाई खिलाया था।

उपरोक्त जिन लोगों से पूछने के लिए कहा गया है यदि पूछिएगा तो पाईयेगा वे अपराधबोध महसूस (Guilt feel) कर रहे हैं।उन्हें अपने किए पर पछतावा है।

ज़रा Guilt feel करने वालों से अलग भक्तों से पूछिए,जिन्होंने गुजरात नरसंहार के नायक को इसलिए चुना की विकाश हो जाय,
कश्मीरी पंडित अपने घर वापस चले जाय,370 ख़त्म हो जाय,पेट्रोल डीज़ल सस्ता हो जाय,पाकिस्तान सबक़ सिख ले,सीमा पर जवान मराने बंद हो जायें,काला धन वापस आ जाय,डालर के मुक़ाबले रुपया मज़बूत हो जाय,महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चहित हो जाय,भारी भरकम टैक्स से छूटकारा मिल जाय इत्यादि आदि हो जाय।
क्या भक्त अपराधबोध महसूस करते हैं,नही करते होंगे।
क्योंकि इन्होंने अपराधियों के हाथो सत्ता सौंप दिया है जिसका काम विकाश करना नही है।
विनाश करना है जो निरंतर जारी है।

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