आजाद देश की गुलाम नारी – योगिता सिंह

Posted by yogita singh
October 30, 2017

Self-Published

आज तक मुझे समझ नहीं आया “औरत जात” किस लिये बनी है,कभी भी सम्मान व शिष्टाचार की नजरों से एक औरत को देखा नहीं गया,कभी घरेलू हिंसा का शिकार, कभी दहेज प्रथा तो कभी बलात्कार क्या यही झेलने के लिये “नारी”बनी है?

बलात्कार,छेड़छाड़ जैसी घटनाओं को बढ़ावा देने लिये हम किसको दोषी ठहराये?? टीवी,मोबाइल,विज्ञापन या कुठिंत इच्छाएँ या अधूरा ज्ञान?? मेरे खयाल से ये सभी।

रोज कहीं न कहीं बलात्कार की घटनाएँ होती है,मैंने सिर्फ अखबारों पर पढ़ा,टीवी पर देखा लेकिन इतने साल की उम्र में पहली दफा मैंने आज एक रेप पीड़िता की आवाज विडियो के माध्यम से सुना जिसके दर्द ने मेरी आत्मा को झकझोर दिया,जिस तकलीफ से वो लड़की गुजर रही है इसका अंदाजा शब्दों में लगाना मुश्किल है।

कैसे लोग है इस समाज में इन्हें मैं इंसान तो नहीं कह सकती बेशक ये वो जंगली कुत्ते हैं जिन्हें जिस्मानी खाल नोच कर आत्मसंतुष्टी मिलती है।क्या कभी इन लोगों ने सोचा है कि जिस तरह से एक लड़की का बलात्कार करके उसकी रूह,कोमल मन,आत्म-सम्मान के लाख टुकड़े करते है उसी तरह के जख्म इन्हें भी मानसिक व शारीरिक तौर पर दिया जाये तो इसका क्या प्रभाव पड़ेगा,खैर ये सब गऱ वो लोग सोचते तो शायद इतना घिनौना काम नहीं करते,इन्हें तो सिर्फ अपनी हवस मिटानी है इसके लिये किसी लड़की के तन से खेलना तो छोटी बात है,जान तक लेने के लिये अमादा रहते हैं।

कहा जाता बेटियाँ घर की शान होती है मगर मेरा सवाल ऐसे दरिंदों से है कि क्या इनके घर में बहन-बेटियाँ नहीं या इनके घरों में बहन-बेटियाँ को वो सम्मान नहीं दिया जाता जिसके चलते ये किसी ओर के घर की इज्जत को तार-तार कर देते है,बिना सोचे की हमारे बहन बेटियों के साथ भी ऐसा हो सकता है।
मै तो सोच भी नहीं पा रही इतनी हिम्मत आती कहा से है इन लोगों में,शायद इसलिये क्योकि हमारा कानून कमजोर हैं,गैर जिम्मेदार पुलिस प्रशासन है जो छेड़छाड़ जैसे अपराध को छोटी घटना समझ कर अनदेखा करती है जो आगे चल कर बलात्कार जैसी जघन्य घटना में तब्दील होती है।

मेरी सरकार ये अपील है बलात्कार जैसे जघन्य अपराध को रोकने के लिये कठोर कानून की जल्द से जल्द व्यवस्था करें ताकि किसी लड़की की इज्जत व माँ-बाप के अरमान किसी दरिंदे के हवस का शिकार न बन सके।

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