आख़िर क़लम और अभिव्यक्ति पर पाबंदी क्यों ?

Posted by Raj Mahajan
October 13, 2017

Self-Published

मैं अपने बारे में बता दूँ कि,
मैं राज महाजन ( राजू )
मीरगंज, जिला बरेली, उत्तर प्रदेश में जन्मा ) शिक्षा B.Sc ( Z.B.C ) बरेली कॉलेज बरेली और इंडियन फ़िल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट से एक प्रशिक्षित कलाकार हूँ।
जो अपनी खुली आँखों से देखें सपनों को पूरा करने के लिये मुम्बई में संघर्षरत हूँ।
2016 में मेरे द्वारा लिखित एक किताब जिसका नाम ” बाबरी… हर इंसान के दिल मे ” प्रकाशित हुई। जिसका विमोचन 08 जून 2016 को हिंदी संस्थान लखनऊ के कार्यकारिणी अध्यक्ष श्री उदय प्रताप सिंह के हाथों हिंदी संस्थान लखनऊ में और 25 जुलाई 2016 मौलाना तौक़ीर रज़ा खान ( राष्ट्रीय अध्यक्ष आई एम सी ) के द्वारा बरेली में हुआ। गोदी मीडिया के पत्रकार हर इवेंट में आये लेकिन उसके बाद इवेंट की ख़बर के साथ न जाने कहाँ खो गए पता ही नहीं चला और जो ख़बर छापी भी इवेंट के बारे में, तो उसका कोई मूल्य नहीं था।
 उसके बाद बड़ी चालाकी से किताब की ऑनलाइन बिक्री ( amazon.in )पर रोक लगाई गई, पूछने पर कंपनी ने टेक्निकल एरर कह अपना पल्ला झाड़ लिया। तीन बार मेरे प्रकाशन के पास PMO से फ़ोन आया और मेरी किताब, मेरे प्रकाशक एवं मेरे बारे में बड़ी दृणता से पूछा गया।
मेरे फ़ेसबुक एकाउंट को दो बार हैक कर लिया गया और तथाकथित आरएसएस के गुंडे 15 अगस्त 2016 को मेरे घर आ गए और बड़ी बतमीजी की। उनकी गाली गलौज और धमकियों में मेरे परिवार और मेरी व्यक्तिगत ज़िन्दगी में गहरा असर डाला और उनकी बतमीजी और धमकियों के सदमें से 22 दिसम्बर 2016 मेरे पिता की मृत्यु ( दिल का दौरा पड़ने से ) हो गयी।
मेरे पिता इतने डर गए थे और वो चाहते थे कि,
मैं उन लोगों से माफ़ी मांग लूं, अपनी किताब लिखने के लिये। लेकिन मैं अपनी कलम और सोच के साथ पूरी ताक़त से खड़ा रहा और अंत में मैंने हमेशा के लिए अपने पिता को खो दिया😢
उन गुंडों की गुंडागर्दी और व्यक्तिगत धमकियों के बाद, मेरे पिता को हर वक़्त मेरी छोटी बहन की चिंता रहती थी, जो उनके साथ अकेली रहती थी।
मेरे प्रकाशन और कुछ बुद्दिजीवियों के अनुसार यह संभवता पहली फ़िक्शन किताब है बाबरी मुद्दे पर, जिन्होंने यह किताब पढ़ी है।
हालांकि अब यह किताब www.amazon.in
www.flipkart.com पर उपलब्ध है। किसी भी साइट पर जाकर Babrii Raj Mahajan सर्च करके परिणाम देख सकते हैं।
किताब हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओं में निम्न शीर्षक से उपलब्ध है।
बाबरी… हर इंसान के दिल में।
Babrii… In Every Human Being’s Heart
यहां इस लेख को लिखने का अभिप्रायक लेखक के दर्द को आप लोगों के समक्ष रखना।
धन्यवाद
राज महाजन ( राजू )
9690369308

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