इस दिवाली आसमानो में नहीं दिखेंगे रौशनी के फफ्वारे।

Posted by Omi Yadav
October 9, 2017

Self-Published

9 ऑक्टूबर 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली NCR में इस 1 नवम्बर तक पटाखे की खरीद व् बिकरी पर प्रतिबन्ध लगा दिया है। पिछले साल 2016 में भी पटाखों पर बैन लगाई गयी थी पर पूरी तरह से नहीं। कुछ ही जगहों पर पटाखे बेचने की अनुमति दी गयी थी और बहुत कम  लाइसेंस वितरित किये गए थे। कई सालों से दिल्ली और दिल्ली के आस पास के इलाकों में दिवाली के बाद सफ़ेद कोहरा नुमा वातावरण हो जाता है। ऐसा इस लिए नहीं होता क्यूंकि सर्दिया आगयी होती हैं बल्कि इस का कारण पटाखों का धुंआ होता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस समस्या पर पिछले साल नवंबर में पटाखों की बिक्री पर लगाम लगयी थी पर पूरी तरह से नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस साल कोई भी ढील नहीं दी है। अगर किसी पटाखे विक्रेता ने पहले से ही पटाखों का संग्रह कर रखा है तो वह पूर्ण रूप से व्यर्थ जायेगा। पटाखों के इस मौसम में यह एक अच्छा मौका होता है दुकानदारों की कमाई का पर ऐसा इस बार नहीं होगा। इस प्रतिबंद के तहत सैकड़ों करोड़ों रुपयों के व्यापर की  हानि हो सकती है

सवाल यह उठता है की क्या हम पटाखों के व्यापर के रोक से हो रहे नुक्सान का सोचते रहें ? यह अच्छा ही है शहर के लिए।

क्यों सही है पटाखों पर प्रतिबंध 

  1.  पिछले साल पटाखों पर सख्ती के बाद भी दिल्ली का वायु प्रदूषण स्तर 447 के आस पास पहुंच गया था।
  2. दिवाली के अगले दिन दिल्ली क्या देश के लगभग  हर गली में पटाखों के  कूड़ों का ढेर लग जाता है।
  3. पटाखों के धुओं से मच्छर मर जाते हैं जो की अच्छी बात है पर वो लोगो के नाक में जाके उनको बीमार भी कर देती है।

बिना पटाखे कैसे दिवाली मनेगी ?

लोगो को सोचना होगा की जब दिवाली मानाने जाने लगी तब पटाखे नहीं हुआ करते थे। कोई आतिश बाजी नहीं होती थी। तो कुछ लोग इसको हिन्दू विरोधी फैसला बताते हुनको इस बात पर विचार करना होगा।

  • खुशियां धमाकों की चमक से नहीं, सामने वाले की मुस्कान से होती है। तो आप गरीब लोगो की मदत कर सकते हैं। उनकी भी दिवाली अच्छी कर सकते हैं।
  • बच्चों को पटाखे न दिला के उनको रंगोली जैसे कलात्म चीजों में ख़ुशी दे सकते हैं।
  • स्काई लैंप प्रयोग कर सकते हैं, आकाश को रोशन करने के लिए।

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