क्या सिर्फ दिल्ली में पटाखों की बिक्री पर बैन से प्रदूषण कम हो जाएगा?

Posted by Ashish Kumar
October 12, 2017

Self-Published

बढ़ते प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली से ठीक पहले दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी है। वैसे तो कोर्ट के इस फैसले का समर्थन किया जाना चाहिए लेकिन इसके उलट फैसले को लेकर काफी लोगों में रोष है। लोगों का कहना है कि बिना पटाखों के दिवाली बेजान सी हो जाएगी जो सही भी है क्योंकि दिवाली जगमग दीपों के साथ ढेर सारी आतिशबाजी के लिए भी जाना जाता है। लोगों को दिवाली के दिन का पूरे साल बेसब्री से इंतजार रहता है और इसके लिए वो खासी तैयारियां भी करते हैं लेकिन कोर्ट के फैसले से दिल्ली वालों की दिवाली इस बार फीकी पड़ सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल नवंबर में पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था जिसे इस साल 12 सितंबर को हटा लिया गया लेकिन अब एक बार फिर से कोर्ट ने ऐन दिवाली से पहले प्रतिबंध को बढ़ाते हुए कहा कि 12 सितंबर वाला फैसला दिवाली बाद 1 नवंबर से लागू होगा। जिसका सीधा मतलब है कि इस दिवाली दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री नहीं हो सकेगी। इस आदेश में जो सबसे हैरान करने वाली वजह है वो ये कि बैन सिर्फ पटाखों की बिक्री पर लगा है, पटाखे फोड़ने पर नहीं यानी यदि आपके पास पटाखे पहले से हैं तो आप बेझिझक फोड़ सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से काफी लोगों में रोष भी है, लोग सोशल मीडिया पर इस आदेश का विरोध भी कर रहे हैं। वहीं, इस आदेश के बाद तीन महत्वपूर्ण बातें भी उभरकर सामने आती हैं। पहला यह कि प्रदूषण का हवाला देकर पटाखों की बिक्री पर रोक ऐन दिवाली पर ही क्यों? दिवाली के अलावा भी ऐसे तमाम मौके आते हैं जब पटाखे बिकते भी हैं और जमकर फोड़े भी जाते हैं। ऐसा तो है नहीं कि पटाखों से उठने वाला धुआं सिर्फ दिवाली पर ही प्रदूषण फैलाता है।

दूसरी बात, पटाखों पर यह बैन ऐसे समय में लगा है जब व्यापारियों ने पटाखों की खरीदारी कर ली है। दिल्ली में पटाखों का व्यापार करोड़ों में होता है और हजारों लोग इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। ऐसे में यदि दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री नहीं होती है तो छोटे-बड़े व्यापारियों काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। नोटबंदी और जीएसटी की मार खाए व्यापारी इस दिवाली को सुनहरे मौके के रूप में देख रहे थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। उससे भी बड़ी बात यह कि दिल्ली-एनसीआर से बाहर के इलाकों में पटाखों की बिक्री पर कोई प्रतिबंध नहीं है। इन हालातों में पटाखों की कालाबाजारी की संभावना भी बढ़ जाएगी।

तीसरी और सबसे अहम बात यह कि प्रदूषण एक गंभीर समस्या है लेकिन क्या सिर्फ दिवाली के समय पटाखों की बिक्री पर बैन लगाने से इससे निजात पाया जा सकता है? जब पटाखों के फोड़ने पर प्रतिबंध नहीं है तो जिन लोगों ने पहले से पटाखे खरीद रखे हैं वो पटाखे जरूर फोड़ेंगे, ऐसे में यह आदेश कितना कामयाब होगा? हमें इस बात को समझना होगा कि प्रदूषण के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं और इन सबसे निपटने की जरूरत है। दिल्ली में चलने वाली डीजल गाड़ियां, आस-पास की फैक्ट्रियों से निकलने वाला जहरीला धुआं और लगातार हो रहे कंस्ट्रक्शन भी प्रदूषण के लिए उतने ही जिम्मेदार हैं।

प्रदूषण की समस्या सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि देश के अन्य बड़े शहरों में भी है इसलिए प्रदूषण को दूर करने के उपाय सबके लिए होने चाहिए। माननीय सुप्रीम कोर्ट के ऊपर पूरे देश की जिम्मेदारी है और उसे चाहिए कि वो जो भी फैसला करें वो सभी शहरों को ध्यान में रखकर करें। क्या हम इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि जब देश के अन्य राज्य व शहर दिल्ली जितने प्रदूषित हो जाएंगे, लोग प्रदूषण की वजह से मरने लगेंगे तब हम इसके निदान के बारे में सोचेंगे? हमें प्रदूषण के सभी कारकों और सभी प्रदूषित शहरों पर एक बराबर ध्यान देने की जरूरत है तब जाकर हम इस गंभीर समस्या से निजात पा सकेंगे।

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