क्या 52 सेकंड का राष्ट्रगान लोगों का मनोरंजन भंग करता हैं.

Posted by Abhijeet Pandey
October 24, 2017

अपना भारत एक विशाल संस्कृति को अपने में समाये हुआ है , यहाँ पे तरह -तरह के लोग रहते है , फिर भी हम लोग एक दूसरे से जुड़े हुए है लेकिन इसके बावजूद भी कुछ ऐसे चीजें है जिससे हमारी राष्ट्रीयता भांग होती जा रही है , हाल ही में देश में चल रही एक बड़ा मुद्दा राष्ट्रगान को लेकर है . कोर्ट के आदेश पे सिनेमाघरों में फिल्म खत्म होने के बाद राष्ट्रगान चलाने का आदेश हुआ , इसका कुछ हद्द तक पालन हुआ लेकिन अभी भी इसके विरोधी काम नहीं है , कुछ ऐसे लोग भी है जो सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजने पे खड़े नहीं होते आखिर ऐसा क्यों , जिस देश ने उन्हें सब कुछ दिया क्या उसी के सम्मान में लोग 52 सेकंड के राष्ट्रगान बजने पे खड़े नहीं हो सकते , न्यायमूर्ति डी वयी चंद्रचूड़ का कहना है की लोग सिनेमाघर जाते है मनोरंजन के लिए , लेकिन मै न्यायमूर्ति से पूछता हु क्या 52 सेकंड के राष्ट्रगान के बजने पे उसके सम्मान में खड़े होने से लोगो के मनोरंजन में बाधा आ जाती है क्या उनका मनोरंजन भंग हो जाता है . देश को आजाद हुए कितने साल बीत गए लेकिन कुछ लोगो ने अपने देश की राष्ट्रीयता को पहचान नहीं पा रहे जिस देश में वो रह रहे है  उसके सम्मान  में 52 सेकंड के लिए खड़े होने से लोगो का मनोरंजन भंग हो जा रहा . लोगो को अपनी इस सोच में परिवर्तन लाना होगा .और कोर्ट को ये अनिवार्य कर देना चाहिए की सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजे और लोगो को खड़े होना होगा .

जय हिन्द .

धन्यवाद्.

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