गाँधी ,अहिंसा और वर्तमान भारत

Posted by Arvind Bauddha
October 2, 2017

Self-Published

आजादी के रूप में जो विजय श्री हासिल हुई वह गांधी की सद इच्छाओं की कीमत पर हुई ,अपने से दुराव तथा अकेलापन  पाकर हुई.यानी गाँधी की पहली हार हुई ‘अपनो’ के हांथो भारत –विभाजन के सवाल पर .लेकिन गाँधी की इससे बड़ी हार आज  हुई जब उनके  राजनीतिक उत्तराधिकारी ‘अहिंसात्मक’ पद्धति को तिलांजलि देते हुए ‘हिंसात्मक ’तरीको से देश का कायाकल्प करने में लगे है .आज पूरी दुनियाँ अहिंसा दिवस के रूप में महात्मा गाँधी को याद कर रही है जिससे उनके सत्य ,अहिंसा के बताये गए मार्ग को देश को जरुरत है .

जिस तरह आज राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए सरकार द्वारा  हिंसात्मक तरीको से लोकतंत्र की आवाज को दबाने की कोशिस की जा रही है .विस्वविद्यालयों ,मीडिया संस्थानों ,बौद्धिक संस्थानों , हेरिटेज स्थलों  को जिस तरीके से किसी खास विचारधारा से संचालित करने की कोशिस की जा रही है .देश में सत्य ,अहिंसा ,और लोकतंत्र की बात करने वाले  छात्रों ,महिलाओं ,किसानो ,दलितों ,मुसलमानों ,बुद्धजीवियों ,लेखको,अर्थशास्त्रियों ,पत्रकारों, सिविल सोसाइटी के लोगो को हिंसात्मक तरीको से उनकी आवाज को कुचला जा रहा है  जो महात्मा गाँधी के सपनो के भारत की कल्पना से विपरीत है . क्या हम हमें इन्ही तरीको से लोकतंत्र को मजबूत करेंगे ?क्या यही है गाँधी जी का सपना ?

दिल्ली से  बाहर  आप उत्तर प्रदेश ,हरियाणा,राजस्थान ,पंजाब की ओर जायेंगे  तो इनकी ओर  जाने वाली सडको का रंग बदलता चला जाता  है .  सड़के टूटी फूटी है लेकिन उनके ऊपर का रंग भगवा जरुर हो गया है . कुछ दिन पहले ही उत्तर प्रदेश गया था जहाँ सत्ता भी बदल गयी है   .लोग  सामाजिक ,राजनैतिक और वैचारिक रूप से बदल गया है लोगो में अजीब सा उन्माद की स्थिति पैदा कर दी गयी है . खेत ,खलिहान,सडक,स्कूल ,चौराहा ,बस स्टाप , गाँव ,कसबे  शहर सभी में जगह वैचारिक रूप से बदल रहे है ? यहाँ का माहौल तो नार्थ कोरिया की तरह हो रहा है . वहां लोगो को एक खास विचारधारा ‘ मनुवाद ’ से प्रेरित करके उन्हें राममंदिर और स्वर्ग- नरक और मोक्ष के सपने दिखाए जा रहे है ?

लोग अपनी रोजी ,रोटी,मकान, रोजगार ,बच्चों ,परिवार की बाते छोड़कर हिन्दू –मुस्लिम और पकिस्तान की बातों मने उलझे  हुये  है .शिक्षा ,स्वास्थ्य,सड़क ,नाली ,खडंजा, स्कूल ,परिवहन ,ट्रेन,बिजली ,पानी, संचार,जैसे मूलभूत मुद्दों को दरकिनार करके पकिस्तान ,आतंकवाद  ,बुलेट ट्रेन आदि मुद्दों पर ज्यादा चिंतित है .जिन  बच्चों के हांथों में किताबें होनी चाहिए थी उनके हाथो में किसी पार्टी का झंडा पकड़ा दिया गया है . लोगो को  अपने बच्चो की पढाई ,स्वास्थ्य और सुरक्षा की चिंता नही हो रही है बल्कि उसको अपने हीरो (योगी जी ) की सुरक्षा की ज्यादा चिंता खाए जा रही है .

खासकर युवा वर्ग ज्यादा दिग्भ्रमित हो चुका है बेरोजगारी की मार से पीड़ित वह भीड़ में अन्य अराजक गतिविधियों में शामिल हो रहा है .जिसका लाभ राजनैतिक पार्टिया खासकर ले रही है उन्हें स्लीपर सेल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है . चाय की दुकानों ,गाँव के चौराहों ,बस स्टाप ,रेलवे  स्टेशन ,स्कूलों के बाहर और कहीं भी आपको ये लोग देखने मिल जायेंगे . इन लोगो में एक खास विचारधारा  को इंजेक्ट किया जा रहा है जिससे आप विज्ञान ,तर्क,बौद्धिकता की बात करेंगे तो आपसे ये लोग  हिंसक हो जाते है .और स्थिति हत्याओं तक भी पहुँच जाती है . इस युवा को जहाँ रोजगार करके देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देना चाहिए था आज वह कुछ पैसो के लिए हिंसात्मक गतिविधियों में शामिल हो रहा है .

गाँधी जी महिला अधिकारों को लेकर हमेशा अग्रसर रहे लेकिन आज स्थिति उसके उलट है एक तरह हम दुर्गा की पूजा करते है और बड़े पैमाने पर राजनीतिक लाभ लेते है और लैंगिक समानता की बात करते है  लेकिन दूसरी तरफ आज महिला अपराध में वृद्धि और  सोसल साइट्स में जिस तरह से महिलायों का चरित्र हनन किया जा रहा है जो  बेहद शर्मनाक है . क्या सभी लोग हिप्पोक्रेट हो चुके है या इस देश में डेमोक्रेसी ने होकर हिप्पोक्रेशी है .जिसमें  कोई भी लोकतान्त्रिक,समाजिक न्याय ,समानता के  मूल्यों की बात करने वाला सुरक्षित नहीं  है .  ALT NEWS ,THE WIRE की रिपोर्ट के अध्ययन बताते है की सोसल मीडिया में  ट्रोल करने या  धमकाने का काम संगठित तरीके से किया जाता है जिनमे बड़ी पार्टियो के लोग शामिल होते है . भारत में महिलाओं की स्थिति ठीक वैसी ही  असुरक्षित हो गयी  है जैसे सीरिया या गल्फ कंट्रीज में होती है  .

तीज, त्योहारों के राजनीतिकरण  के साथ धर्म का राजनीतिकरण किया जा चुका है जहाँ रामलीला में राम के मंचन से ज्यादा नेताओं का मंचन हो रहा है और वह तिरंगा झंडा लगाकर  . इसी का परिणाम है की हमारे यहाँ की सफाई,बिजली,सीवर की समस्या हो जाने पर वह नहीं आते है लेकिन दुर्गा जी के विसर्जन पर जरुर आयेंगे और जिन इलाकों में मुस्लिम  बस्तियां होगी वहां तो पक्का जायंगे  ?

दुनियां को अहिंसा का पाठ पढाने वाला देश आज खुद हिंसा से ग्रसित होता जा रहा है . हम किस तरह के देश का निर्माण करने में लगे है कहीं पाकिस्तान  के तालिबानियों  की तरह तो नहीं कर रहे है जो बाद में हमें ही डसने लगे .सोचिये एक दिन यही लोग दूसरो को मार रहे है क्या पता अगले दिन हमारा नंबर हो ? हम जितना जल्दी सचेत हो जाये उतना ही इस देश और यहाँ की जनता के लिए अच्छा  होगा . या कहे की सरकार अपनी जिम्मेदारियों का संतुलित तरीके से निर्वाहन नहीं कर रही है .

भारत की आज वर्तमान स्थिति का विश्लेषण अमर्त्य सेन ,पी .भगवती ,रघुराम राजन ,डॉ.मनमोहन सिंह ,प.चिदंबरम ,ज्यां ड्रेज किस्टोफर जेफ़रलाट  जैसे विद्वान ही समझा  सकते है  इन्ही की माने तो  भारत एक गंभीर स्थिति से  गुजर रहा है अर्थव्यवस्था सबसे निचले स्तर पर  है ,नौकरियोंको पैदा नही किया जा रहा है ,नवाचार , शोध और विकास अपने निचले स्तर पर , भारत का विदेशी निवेश और वैश्विक पूँजी का नुकसान हुआ है .अगर हमें आर्थिक और सामाजिक स्तर से मजबूत होना है तो राजनीतिक दृढ इच्छाशक्ति के साथ  विकास, सामाजिक न्याय और अहिंसा   को साथ लेकर चलना होगा .तभी गाँधी जी के सत्य ,अहिंसा,,और शांति से निर्मित भारत का निर्माण किया जा सकता है .

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