गांधी परिवार की हैं करीबी , बीजेपीनेता का थामेगी हाथ…   

Posted by Shubham Dwivedi
October 24, 2017

 

गांधी परिवार की हैं करीबी , बीजेपीनेता का थामेगी हाथ   

इश्क और सियासत में सब जायज है। ऐसा ही प्रेम की कथा अब शादी के बंधन में बधने जा रही है। आपको बता दें कि एमपी के आदिवासी इलाके में चर्चित लव मैरिज सुर्खिया बटोर रही है  कभी बचपन की साथी रही हिमाद्री सिंह के हाथों में मरावी के नाम की मेंहदी लगने वाली है। बहरहाल दोनों ने गुरुवार को सगाई कर लिया अब जल्द ही शादी भी करेंगे।

राजनीतिक सफ़र पर एक नजर: जनवरी 2016 से मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग भोपाल को राज्य सरकार के केबिनेट मंत्री.का दर्जा प्राप्त है। विदिशा के एसएटीआई कॉलेज से इंजीनियरिंग करके 2005 में राजनीति में कदम रखा । अनुपुपर से 2005 में जिला पंचायत सदस्य । इसके बाद 2009 में शहडोल संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा । हालांकि इस चुनाव में उन्हे 13415 मतों से हार का सामना करना पड़ा, विजय कांग्रेस की राजेश नंदनी के हाथों लगा । नरेन्द्र सिंह मरावी को राजनीति विरासत में मिली है खास बात है कि कभी राज्यमंत्री रहें जैतपुर विधायक जयसिंह मरावी के भतीजे हैं मरावी। राजनीति पंडित इस युगल को भविष्य में केन्द्र के लीडर के रुप में देखते हैं ।

अब बात हिमाद्री सिंह की कर लेते हैं। हिमाद्री को भी राजनीति की शिक्षा, घर के चार दिवारी के अंदर ही ली। बता दें कि हिमाद्री सिंह नें अपनी मां राजेश नंदनी और पूर्व सेन्ट्रल मिनिस्टर दलवीर की सुपुत्री हैं। हिमाद्री सिंह की मां राजेश नंदनी भी शहडोल लोकसभा से सदस्य रह चुकी हैं। वहीं पिता दलवीर सिंह भी कैबिनेट में मिनिस्टर रहते हुए आदिवासी इलाके को रिप्रजेन्ट कर चुके हैं। असल में मरावी और सिंह परिवार की रिश्तेदारी से आदिवासी बहुत इलाके में खुशियों का महौल है। बता दें कि 1980 और 1984 व 1991 में दलवीर सिंह ने शहडोल संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।

राजीव गांधी के पिता रहे हैं करीबी

राजीव गांधी जब तत्कालीन पीएम हुआ करते थे तो हिमाद्री सिंह ने पिता कैबिनेट में मिनिस्टर थे। उप लोकसभा चुनाव में हिमाद्री सिंह ने संसदीय क्षेत्र में अपना लोहा मनवाया। हालांकि अनुभवी राजनेता ज्ञान सिंह के साथों हार का सामना करना पड़ा। जब गांधी परिवार की करीबी हैं तो संयोग से कभी हिमाद्री को राजीव गांधी से भी मुलाकात का पिता ने अवसर दिया होगा। फिलहाल इस बात की पुष्टि केवल  स्थानीय नेता ही कर रहे हैं

कुछ संयोग ही है : आपको जानते हुए हैरानी होगी नरेद्र मरावी और हिमाद्री सिंह को एक ही लोकसभा संसदीय क्षेत्र में हार मिली। कभी प्रतिद्वंदी रह चुकी राजेश नंदनी की बिटिया हिमाद्री सिंह को नरेन्द्र मरावी ने बचपन में ही दिल दे बैठे थे। तब राजेश नंदनी ने 2009 में बहुत ही कम वोटो के अंतराल से जीता था । वहीं 20014 में हिमाद्री को ज्ञान सिंह के हाथों हार मिली । अब राजनीति गलियारों में कयास लगाये जा रहे हैं कि वैवाहिक बंधन में बंधने के बाद एक-दूसरे के भाग्य में इजाफा हो सकता है।

बीजेपी दो दिग्गज जिनकी वजह से सामने आये हिमाद्री औऱ नरेन्द्र मरावी :  कौन थे दलपत सिंह परस्ते, जिनकी सीट पर हिमाद्री को चुनाव लड़ने का मिला मौका । 1977 में भारतीय लोकदल से चुनावी मैदान में उतरे दलपत सिंह परस्ते ने जीत का आनंद लिया । 1989 में जनता दल से दोबारा विजय हुए है। फिर 1999 में भारतीय जनता पार्टी से जीता । दलपत सिंह को अटलबिहारी बाजपेई जी का करीबी भी माना गया। कुशल व्यवहारिक औऱ सादगी के लिए जाने जाते थे दलपत सिंब परस्ते ।यही शख्स थे जिनको ब्रेन हैम्रेज की वजह से दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। यकीकन में 2009 में नरेन्द्र मरावी को केन्द्रीय आलाकमान ने विश्वास दिखाया।  जिससे क्षेत्रवासियो के सामने कई विकल्प तैयार कर दिये हैं।

सांसद ज्ञान सिंह वहीं नेता हैं जो हिमाद्री सिंह को चुनावी दंगल में मात दिया। अटल बिहारी वाजपेई की अल्पावधि सरकार बनाई तो उस दौरान 1996 और 1998 में ज्ञान सिंह शहडोल संसदीय क्षेत्र से सांसद हुए। अपनी कुशल रणनीति और सेवा की वजह से ज्ञान सिंह अपने एरिया में लोकप्रिय हैं । ज्ञान सिंह की पैठ इस एरिया में खूब है ।

 

अब देखने वाली बात है कि नरेन्द्र मरावी और हिमाद्री सिंह जल्द ही वैवाहिक जीवन में बंधे और अपनी कुशल नेतृत्व से क्षेत्र का विकास करेंगे।

 

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