गुजरात चुनाव – कोयला वाली मालगाड़ी में लदा है भविष्य

Posted by Amritanshu Yadav
October 22, 2017

गुजरात विधानसभा चुनाव के ज्यादा दिन नही बचे हैं या यूँ कहें की गुजरात में विस्फोट के ज्यादा दिन नहीं बचे हैं. जिस दिन मोदी जी चुनाव आयोग को चुनाव आयोजित करवाने का ईमेल लिखने की जहमत उठा लेंगे उसी रोज़ चुनाव की तारीख की घोषणा हो जाएगी. कुछेक लोग सोंच सकते हैं की चुनाव की घोषणा करवाने में मोदी जी की क्या भूमिका है? बहरहाल मुझे भी इस सवाल का जवाब नही पता है किन्तु कांग्रेस पार्टी के बड़े नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिंदम्बरम का मानना है की चुनाव आयोग मोदी जी के टाइम टेबल के हिसाब से अपनी तारीखें सेट कर रहा है. तर्क कांग्रेस के आरोप की पुष्टि भी कर रहे हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में गुजरात और हिमाचल चुनाव की घोषणा एक साथ हुयी थी, आदर्श आचार संहिता एक ही रोज़  लागू हुयी और मतपेटी भी एक ही दिन खुली मगर अबकी चुनाव में अब तक तो हिमाचल प्रदेश में परचा भरा जाना भी शुरू हो गया है मगर गुजरात में चुनाव के नंगाड़े बजने की शुरुआत नही हुयी है. सवाल ये भी है की प्रेस कांफ्रेंस से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पूरी बुलंदी से पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने की हिमायत करने वाला चुनाव आयोग इतना कमजोर कैसे पड़ गया है.

चुनाव आयोग की स्वायत्तता का प्रश्न छोड़िये. मूल प्रश्न है गुजरात चुनाव के गणित और भूगोल का. गुजरात में पिछले 22 सालों से भाजपा सत्ता में कायम है. भारतीय राजनीती का कोई भी जानकार  गुजरात राज्य  के रुतबे को कोई भी नजरअंदाज नही कर सकता है. भाजपा का भाग पलटने वाली आडवानी जी की रथ यात्रा भले ही मस्जिद का गुम्बद गिरा के मानी हो मगर उस यात्रा की शुरुआत गुजरात से ही हुयी थी. मोदी जी और शाह मतलब समझ लो पूरी सरकार तो गुजरात की ही है

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