गुजरात से गुजरात तक!

Posted by अखिलेश चौधरी
October 17, 2017

Self-Published

आपके मानने या नहीं मानने से कुछ फर्क तो पड़ता नहीं है, फिर आप मानते क्यों है? जी हां आपने ही माना था कि मोदी एक सुपरमैन है और उसके आते ही हिंदुस्तान अमेरिका को पछाड़ के विश्व पटल पर अपनी ऐसी छवि बनायेगा की ओबामा और पुतिन जैसे नेताओं को मोदी से मिलने के लिए अपॉइंटमेंट लेना पड़ेगा। फ़िलहाल ऐसा तो कुछ हुआ नहीं ,बल्कि हम 20-25 साल पीछे जरूर चले गए मोदी जी के नीतियों के कारण। एक बात सुन लीजिए, अगर ये ब्लॉग अच्छा नहीं लगे तो गाली देने के बजाय थोड़ा सोचियेगा। मोदी जी ने गुजरात में बाघेला को हटाकर जब सत्ता काबिज किया था ,तो हमारे जैसे लोग जो जवानी की दहलीज पर खड़ा था, सोच लेना चाहिए था कि ऐसे ही लोग एक दिन गुजरात से निकल कर पूरे देश पर राज कर सकता है। ऐसे ही लोग कहने का मतलब है कि मोदी जी की प्रवृति में हिटलर के अंश दीखते है, ऐसा मेरा और मेरे जैसे लाखों लोगों का मानना है। हाँ तो मैं उस जवानी के दहलीज़ पर मोदी जी के गुजरात पर सत्ता काबिज़ करने को ज्यादा महत्व नहीं दिया क्योंकि मेरा राजनीति से ज्यादा अपने करियर पर फोकस था जो की होना भी चाहिए। अगर नही भी होता तो मैं कोन सा मोदी जी को रोक पाता, हाँ अगर राजनीति पर ध्यान रहता तो मैं सचेत जरूर हो जाता। सत्ता में आने से पहले ही बड़ी तबाही मचाई थी गुजरात के लोगों ने। जी हां तबाही तो आप समझ ही गए होंगे, खैर फिर सिलसिला चालू हुआ गुजरात मॉडल का, जिसमे थोड़ी ही हक़ीक़त और बहुत सारे पूरे ना होने वाले सपने।लेकिन गुजरात की भोली भाली जनता वो थोड़ी सी हक़ीक़त को अपने दिल में ज्यादा जगह दे दी जिससे ये सिलसिला चलता गया और अभी तक चल ही रहा है। उसी थोड़ी सी हक़ीक़त वाले गुजरात मॉडल पर लगातार तीन बार मोदी जी ने गुजरात की भोली भाली जनता को ना पूरे होने वाले सपने दिखाये और उसी थोड़ी सी हक़ीक़त को तकनीकी के माध्यम से भाजपा ने पूरे देश को कभी ना पूरे होने वाले सपने दिखाये। सरकार के काम करने के तरीके और उसकी विफलता पर अपने अगले ब्लॉग में लिखूंगा, फ़िलहाल तो मैं कह रहा था कि ये जो गुजरात मॉडल था, उसने ही हार्दिक, जिग्नेश जैसे लोग पैदा किये जो की गुजरात के किसी ना किसी कम्युनिटी के लोगों का आवाज़ उठाते रहे है,लेकिन कल जिस प्रकार से हताश मोदी जी को मैंने देखा, वो नजारा मुझे कुछ फिल्मों में दिखाई दिया था,जो मोदी तकनीकी के मदत्त से ना पढ़े लिखे होने के बावजूद भी अपने आप को बड़ी हस्तियों में एक ज्ञानी प्रधानमंत्री होने का दावा पेश किया, वो मोदी जी कल गुजरात गौरव यात्रा के समापन पर हताश और निसहाय दिख रहे थे, जैसे उनके पैरों की नीचे की जमीन खिसक रही है। ऐसे ऐसे शब्द प्रयोग कर रहे थे जो की एक प्रधानमंत्री तो दूर, एक अच्छा संस्कारी गुजरात की जनता तक नहीं करेगी। तो मैं रात भर यही सोच रहा था कि शायद गुजरात से गुजरात तक का समापन होने वाला है, लोग अब समझ चुके है कि थोड़ी सी हक़ीक़त वाली गुजरात मॉडल को रिप्लेस किया जाये ,एक नए युग का शुरुआत किया जाये, गुजरात दो युगों से उन्ही लोगों के हाथ में है जिन्होंने सिर्फ थोड़ी सी हक़ीक़त वाले है, बांकी के पूरे सपने ही रह गए।

अगर गुजरात की जनता इस बार बदलाव करती है तो मोदी जी का गुजरात मॉडल की विफलता 2019 के चुनावों में पूरे देश में दिख सकती है और फिर हम यही कह सकते है कि गुजरात से गुजरात तक का सफर मोदी जी के लिए तो अच्छा रहा लेकिन गुजरात सहित पूरे देश की जनता को बर्बादी के कगार पर ला कर छोड़ दिया।

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