घर में कामों का बँटवारा

Posted by SAUMYA GUPTA
October 31, 2017

Self-Published

आँख खोलते ही कुछ चीजें हम बिना सिखाए सीख जाते हैं । उनमें से एक है कामकाम और काम का बँटवारा । यानी ये काम लड़के कर सकते हैं और ये लड़कियाँ ।

क्या वाकई में ऐसा है़काम में भी लड़का और लड़की होता है। अगर प्रक्रति से मिले कुछ काम छोड़ दें तो बाकि काम कैसे हो गए।

हम कौनकौन से कामों की बात कर रहे हैंवे क्या हैंघर के अंदर से जुड़े हैंघर के अंदर काम कितने हैंघर के बाहर कितने काम हैंसड़क के कितने काम हैंबिल्डिंग के कितने काम हैंक्या काम चुनने से पहले ज़हन में लड़के या लड़की का ख्याल आता है।

अच्छा ज़रा सोचते हैं ऐसा कौनसा काम है जो लड़के कर सकते हैंलेकिन लड़कियाँ नहीं कर सकती।

साथ ही यह भी सोचते हैं कि घर में ऐसा कौनसा काम है जो लड़कियाँ तो कर सकती हैंपर लड़के नहीं कर सकतेजवाब मुश्किल नहीं है। लड़कियाँस्त्रीमहिलाँए हर वह काम कर लेती हैंजो आमतौर पर लड़कोंपुरुषों के काम माने जाते हैं।

खुशहाली का बड़ा राज़ इस काम में भी छिपा है। कुछ करने में या ना करने में खुशी छिपी बैठी है जनाब।

आप ना सिर्फ अच्छे मर्द साबित होंगे बल्कि उससे बढ़कर आप एक बेहतर इंसान साबित होंगे।

यहाँ सिर्फ बात एक छोटे से दायरे तक सिमित है। बड़े दायरे में चर्चा नहीं हो रही है। अपने उसी को दायरे तक सीमित रखेंगेजिस दायरे में किसी लड़के का सित्री जाति से पाला पड़ता है। यह दायरा ज्यादा घर का है।

हम चाहे आज भी कितना भी बोल लें कि हमारी सोच मॉडर्न ज़माने कि हो चुकी हैइन बातों पर आज भी हम पुराने ख्यालों के हैं। रिश्तेदारोंपड़ोसियों को दिखाने के लिए लड़केलड़की अच्छे स्कूल में भेजते हैं। लेकिन बात फिर भी यहाँ खत्म नहीं होती घर के काम में बंटवारा हो ही जाता है यह काम भाई करेगायह बहन करेगी।

हम काम के साथसाथ पार्टनर चुनने कि बात करूं तो इतना तय है कि लडकों से ही पूछा जायेगा कि कैसा पार्टनर चाहिएअहम बात यह है कि हमारीआपकी उम्मीद तब ही बेहतर तरीके से परवान चढ़ सकती हैं जब हमआप एकदूसरों को समझने लगते हैं।

मर्द घर का काम करना खुद सीखें। बहुत मौज करेंगे। आमतौर पर घर के काम घरेलू काम मान लिए गये हैं। यानि स्त्री के काम हैं। ये काम समाज ने ही स्त्रियों को सौंप दिए हैं। घर के बाहर काम होने वाले काम मर्दों के हैं। गैरबराबरी का रिश्ता तो यहीं से शुरू होता है। इसलिए सबसे पहले आइए घर का काम करना सीखते हैं। जी सीखना पड़ेगा क्योंकि मर्द बनने के चक्कर में मर्दों ने तो यह सीखा ही नहीं। ओर ऊपर से मर्द बनाने के चक्कर में सिखाया नहीं गया।

मर्द लोग घर का काम तो सीखें हीअपने आने वाली मर्द पीढ़ी को भी सिखाएं। यानी माँबाप अपने बेटों को घर का काम करने के लिए बढावा दें। उनसे चूल्हाचोखा करवाएं। मर्द खाना बनाना सीखें।

तो सबसे पहले की घर कि बात। दादीनानी ओर माँ के ज़माने की महिलाओं ओर आज कि लड़कियों में थोडा फर्क करना होगाजनाब। इसलिए रिश्तेघरपरिवाररहनसहन वैसे ही नहीं चल सकते जैसे उनके ज़माने चला करते थे। हालांकि चलना तो उनके ज़माने में भी नहीं चलने चाहिए थे। इसलिए घररिश्ते सब में बदलाव करना होगा। कुछ संस्कारोंरीतिरिवाज़ोंपरम्पराओं को छोड़ना पड़ेगा। वक्त बदलेगा तो चीज़े बदलेंगी।

लड़कियाँ क्या चाहती हैं,  हमाराआपका,  सबका सुखी जीवन इससे गहरे जुड़ा है।

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