घर से लड़कर गया विद्यार्थी विदेश में कामयाभ

Posted by Raman Singh
October 27, 2017

यह कहानी एक आम लड़के की है जो के अमृतसर के नजदीक बॉर्डर नजदीक गांव बैडवल से है. हम जिस आदमी की बात कर रहे है उसका नाम है सूप सिंह संधू. सरूप को बचपन से ही किताबो से लगाव था उसका सपना था एक विज्ञानी बन ना लेकिन उसके घर वाले उसे घर के दूध कामकाज में डालना चाहते थे. सरूप सुबह ३ बजे उठकर पहले गाय का दूध निकालता फिर उसे शहर में देकर आता और फिर स्कूल में जाता.
सरूप की जिंदगी में मोड़ तब आया जब उसे पंजाब के लुधिअना जिले में स्थापित पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी में दखल मिल गया. सरूप लाइब्रेरी में सुबह से लेकर रात देर तक पढ़ाई करता. उसका एक ही सपना था के पंजाब की किसानी के लिए कुश ना कुश करे.
उसकी म्हणत रंग भी लायी उसे अमेरिका की साउथ डेकोटा यूनिवर्सिटी में पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए वजीफे के साथ दखल मिल गया. वह भी उसे अपनी यही म्हणत जारी राखी.
आज सरूप सिंह फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी में पीएचडी कर रहा है. उसका कहना है वह पढ़ाई के बाद भारत आकर देश की सेवा करना चाहता है ना के किसी अमेरिकन कौम्पणी मई पैसा कमाना चाहता है जो के हर एक नौजवान की एशा होती है. है ऐसे भारतीयों को दिल से सलाम है

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