चलिए उन गांवों में जहां चलता है ‘पीरियड अलर्ट’ अभियान

Posted by मेरा रंग | Mera Ranng
October 23, 2017

‘मुहीम- एक सार्थक प्रयास, वेलफेयर सोसाइटी’ की शुरुआत महिला और जेंडर विषयक मुद्दों पर काम करने के लिए की गयी. इसकी संस्थापिका स्वाती सिंह है, जिन्होंने 23 साल की उम्र में इस सोसाइटी की शुरुआत की है. स्वाती निरंतर महिला व जेंडर विषयक मुद्दों पर सक्रिय लेखन कर रही है. मुहीम के ज़रिए स्वाती ने उत्तर भारत के ग्रामीण इलाके के उस मुद्दे पर काम शुरू किया है जिनपर यहाँ के समाज में बात करना भी वर्जित माना जाता है. यानी कि मासिक धर्म.

आज हम उस दौर में जी रहे है जहाँ सेनेटरी पैड पर टैक्स लगने पर मेट्रो शहरों में महिलाएं तमाम तरह से अपना विरोध-प्रदर्शन करती है. पर दुर्भाग्यवश ग्रामीण इलाकों में ये तस्वीर पूरी तरह से उलटी है यहाँ सेनेटरी पैड पर टैक्स क्या मासिक धर्म पर बात नहीं की जाती है. महिला स्वास्थ्य और पितृसत्ता के तहत महिलाओं को उनके तन के भूगोल से ऊपर उठाने की दिशा में मुहीम की तरफ से ‘पीरियड अलर्ट’ नामक अभियान की शुरुआत की गयी है.

मुहीम की तरफ से मासिकधर्म संबंधित स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधित पहलुओं से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को जागरूक करने का काम किया जाता है. इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य में ग्रामीण इलाकों में महिलाओं और किशोरियों के बीच मासिकधर्म जैसे विषय जिन्हें आमतौर पर ‘गंदा’ समझकर अक्सर छिपाया जाता है और इनपर बात नहीं की जाती है, इन धारणाओं को तोड़ते हुए इस विषय पर स्वस्थ्य बातचीत के प्रचलन को बढ़ावा देते हुए मासिकधर्म से जुड़ी तमाम दकियानूसी बातों का खंडन करना और स्वस्थ्य समाज की स्थापना करना है.

इस कार्यक्रम के तहत उत्तर प्रदेश के बनारस जिले के आसपास के करीब तीस गांवों में काम किया जा रहा है. इसमें बनारस के काशी विद्यापीठ ब्लाक के गाँव – देलहना, बन्देपुर, बछाँव, खनाव, बेटावर, रामपुर, लठिया, खुशीपुर, कादेपुर, मडाव, नगऊर, खुलहसपुर, परमंदापुर, केशरीपुर, हरपालपुर, हरिहरपुर, परियतपुर, निषेपुर, माधवपुर और चितौमनीपुर शामिल है. वहीं आराजी ब्लाक के वीरभानपुर, हरसोस, असवारी, भीखमपुर, चंदापुर, खेवली, बेनीपुर, भटपुरवा और नागेपुर में महिलाओं और किशोरियों को मासिकधर्म के बारे में जागरूक करने का काम किया जा रहा है.

मासिक धर्म पर मुहीम के इस कार्यक्रम को ‘पीरियड अलर्ट’ नाम दिया गया है जिसके तहत अलग-अलग माध्यमों के ज़रिए महिलाओं और किशोरियों को उनके स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाता है.

मुहीम का विश्वास है कि मासिक धर्म एक ऐसा विषय है जिसपर हमारे समाज खासकर ग्रामीण इलाकों में बातचीत नहीं की जाती है, जो सीधे तौर पर मासिकधर्म से जुड़े मिथ्यों और बिमारियों को बढ़ावा देता है. इसे शुरू से ही शर्म का विषय माना गया है जिसका नतीजा यह हुआ कि महिलाएं खुद आपस में इस विषय पर खुलकर बात करने से कतराती है. इसलिए मुहीम ने अपने कार्यक्रम के तहत महिलाओं को अपनी बात सुनाने की बजाए पहले चरण में उनसे बातचीत को प्राथमिकता दी है.

इस बातचीत के ज़रिए महिलाएं और किशोरियां आने विचार व समस्याएं खुलकर समाने रखती है, जिनके आधार पर उनके साथ सक्रिय बातचीत स्थापित कर उन्हें मासिकधर्म से जुड़ी ज़रूरी बातों के बारे में बताया जाता है. इस बातचीत में महिलाओं के साथ मासिकधर्म से जुड़ी स्वास्थ्य, स्वच्छता और प्रचलित मिथ्यों को दूर करने की दिशा में जानकारी दी जाती है.

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