चलो सिमरिया धाम लेकर प्रभु का नाम

Posted by सारांश सागर
October 8, 2017

Self-Published

 

भारत में प्रायः चार जगह महाकुंभ लगते रहे है जिसमे हरिद्वार, उज्जैन, प्रयाग और नासिक शामिल है लेकिन संत समाज और श्रद्धालुओं की माने तो भारत में कुल १२ जगहों पर महाकुंभ का आयोजन होता था जिसमे बिहार के सिमरिया जो कि आदि कुंभ स्थली रहा है वैदिक काल से बद्रिकाश्रम , असम के गुवाहाटी, हरियाणा के कुरुक्षेत्र, ओडिसा के जगन्नाथपूरी, पश्चिम बंगाल के गंगा सागर, गुजरात के द्वारिकाधीश, तमिलनाडु के कुम्भकोणम और रामेश्वरम शामिल है !! समय के साथ साथ अनेक घात लगाते विदेशी आक्रमणकारियों और आपसी फूट के कारण भारत की सनातन संस्कृति,तमाम गुरुकुल,मंदिरों को लूटा व् नष्ट किया गया और इस तरह भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कही जाने वाली महाकुंभ की सनातन,धार्मिक,वैज्ञानिक,अध्यात्मिक लाभ की महत्वता भी खत्म सी होती गयी !! आज प्रायः महाकुंभ को आम इंसान गंगा स्नान करने,संत-साधू और नागा बाबाओं के जमावड़े से लगा लेते है और ऐसे में आम व्यक्ति की इसमें विशेष रूचि नही हो पाती !! रूचि लेने वाला व्यक्ति तभी रूचि लेता है जब उसे इस भारत की महान परम्परा का तनिक भी ज्ञान हो पर अत्य आधुनिक कही जाने वाली शिक्षा व्यवस्था में धर्म शिक्षा और त्योहारों के वैज्ञानिक महत्व को शामिल करना जरूरी नही समझा गया जिसके कारण अभी भी भारत की सनातन संस्कृति में साधारण व्यक्ति अत्यधिक रूचि नही ले पाता है !!

आइये जाने क्यों है खास भारत में महाकुंभ और क्या है इसके लाभ ??

भारत में एक समय कुल १२ महाकुंभ का आयोजन होता था जिसमे उत्तर-दक्षिण-पूर्व-पश्चिम दिशा के क्षेत्र शामिल रहे थे पर अब मात्र ४ जगहों पर महाकुंभ होता है !! ध्यान दीजिये हर एक महाकुंभ १२ वर्ष बाद ज्योतिष शास्त्र के अनुसार एक विशेष मुहूर्त पर घटित होता है तो इस तरह कुल १२ महाकुंभ अगर १२ जगहों पर होंगे तो प्रत्येक स्थान विशेष पर वो महाकुंभ १२ वर्षो बाद ही लगेगा !!

अब समझिये इसे और गहराई से !!

एक क्षेत्र में जब कोई महाकुंभ लगता है तो उसके आस-पास के क्षेत्र के लोग जमकर तैयारी करना शुरू कर देते है क्योंकि लाखों करोड़ो श्रद्धालु जब वहां विशेष मुहूर्त पर स्नान करने पहुँचते है तो माना जाता है कि असीम पूण्य की प्राप्ति होती है तो ऐसे में यहाँ निर्धन से लेकर धनवान तक अपनी बचत की कमाई लेकर जरुर पहुँचने की कोशिश करते है !!

आर्थिक रूप से समृद्धि

जब लाखों-करोड़ो का हुजूम एक क्षेत्र विशेष पर लगता है तो उस जगह के व्यापारियों के लिय वो समय किसी दिवाली से कम नही होती है !! क्योंकि उस समय हर छोटी-बढ़ी कीमत के सामान,जेवरात,पुस्तके,माला,पूजा सामग्री,धार्मिक ग्रंथ,मिठाइयाँ,वस्त्र,बर्तन आदि तमाम चीजे लोग स्नान पश्चात खरीदते है !! ऐसे में उस स्थानीय निवासियों को बिना किसी परेशानी के धार्मिक महोत्सव के रूप में एक मजबूत आर्थिक लाभ मिलता है !!

ज्ञान का प्रचार-प्रसार

जाहिर सी बात है कि ऐसे धार्मिक महोत्सव में ज्ञानी-पुरुष और सज्जन व्यक्तियों का भी हुजूम लगता है तो वो इसी बहाने अपने ज्ञान को बढ़ाने के बहाने भी ऐसे मौके पर शामिल होना जरुर पसंद करते है !! धर्म प्रचार और कुछ सीखने के मकसद से कई शिष्यों को महान सज्जनों और गुरुओं का सान्निध्य प्राप्त होता है और वो वहां के संस्कृति,खान-पान,वेशभूषा और भाषा को अपने साथ लेकर अपने क्षेत्र में बताते व उसके अध्ययन करते करवाते है !! तो इस तरह एक महाकुंभ के कारण अनेक विषयों के ज्ञान को प्राप्त करने का सुअवसर प्राप्त होता है !

वैज्ञानिक दृष्टि से लाभ

जब व्यक्ति य कोई परिवार कई समय तक एक स्थान में रहता है तो वो बंधन जैसे भाव का अनुभव कभी कभी करता है और ऐसे में अगर वो महाकुंभ जाता है जहाँ लाखो-करोड़ो लोग ईश्वर भक्ति के लिए,सनातन संस्कृति की महान परम्परा को जीवित रखने के लिए जाते है तो उसे एक नया अनुभव और मस्तिष्क तरो-ताजा हो जाता है जहाँ पावन गंगा नदी की कलकल करती धारा का स्पर्श मात्र से ही व्यक्ति को अपार हर्ष का अनुभव होता है मानो किसी नन्हे से शिशु ने आपके गालों को छु लिया हो !!
तैराकी और डुबकी लगाना भी एक प्रकार का व्यायाम होता है जिससे शरीर की सारी थकान मिट जाती है और मन-मस्तिष्क में खून का संचार बहुत ही व्यवस्थित तरीके से होना शुरू हो जाता है !! साथ ही साथ मनोरंजन के दृष्टि से भी डुबकी व् तैराकी अत्यंत लाभदायक है !! जो शरीर के साथ साथ आत्मा को भी तृप्त करता है !

आध्यात्मिक उन्नति का लाभ

एक आम व्यक्ति भी जब जाता है तो उसे उस जगह से मानो प्यार ही हो जाता है और वो भी अन्य शिष्यों और जिज्ञासुओ की भांति यहाँ आध्यात्म चर्चा में शामिल होना,ज्ञानियों को सुनना और तपस्या आदि करके आध्यात्मिक शक्तियों को प्राप्त करने की इच्छाशक्ति प्राप्त करता है !!

ये महज चार उदाहरण है लेकिन तीर्थकर लोग और जो भी भक्त,श्रद्धालु महाकुंभ में बहुत अधिक जाते है वो और भी बेहतर तरीके से बता सकते है कि किस तरह और क्यों महाकुंभ भारत के अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी हुआ करती थी !! खैर बदलते समय के साथ इसके पुनर्जीवित होने का समय भी आ गया है ! स्वामी चिदात्मन जी के आह्वान पर सिमरिया को महाकुंभ के पांचवे स्थान का दर्जा अब प्राप्त हो गया है !! शेष सात महाकुंभ भी जल्द ही देशभर में उसी प्रकार ख्याति प्राप्त करेगा जैसे वर्तमान में चार और अभी सिमरिया की जिस प्रकार धूम मची हुई है !!

महाकुंभ आध्यात्म,भक्ति,ज्ञान,व्यापार एक समावेश और सारांश है भारत की संस्कृति को विकसित और प्रगति कराने का जिससे हर भारतीय लाभान्वित हो

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