तो अच्छा होता माँ

Posted by Bharti Sanghmitra
October 31, 2017

Self-Published

जो यहा से भी तुमको देख पाती माँ,

जो साथ न होकर भी साथ मेरे हो पाती माँ,

तो अच्छा होता ||

जो करवट बदलती मैं बिस्तर पे तुमको पाती माँ,

जो मिलो दूर भी तुम्हारे पास रह पाती माँ,

तो अच्छा होता ||

जो यहा हो कर भी साथ तुम्हारे पापा के मज़े ले पाती माँ,

जो पड़ोसियों की नक़ल मार साथ तुम्हारे लोट पॉट हो पाती माँ,

तो अच्छा होता ||

जो नींद खुलती यहा भी आवाज़ से तुम्हारी माँ,

जो दिन भर मुझे खिलाने की जिद्द तुम्हारी यहा भी हो पाती माँ,

तो अच्छा होता ||

जो मजिल की तलाश में इतनी दूर तुम साथ आ पाती माँ,

या वो मंजिल ही मिल जाती जो पास तुम्हारे आती है माँ,

तो अच्छा होता ||

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