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पाकिस्तानी सरकार को महिलाओं की आज़ादी से इतनी कोफ़्त क्यों है ?

Posted by Prashant Tiwari
October 14, 2017

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साल 2012 में एक 15 वर्षीय पाकिस्तानी लड़की पर आतंकी संगठन तालिबान ने सिर्फ इसलिए हमला किया क्योंकि वह पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा की हिमायती थी। ऐसी घटनाएं पहले भी शायद हुई हों, उनमें से कइयों की आवाज़ दबा दी गई होगी और कइयों ने डर के मारे आवाज़ नहीं उठाई होगी। हाल में हुए एक वाकये से यह साफ हो गया कि पाकिस्तान में महिलाओं की शिक्षा और उनकी आज़ादी की हिमायत करने वालों की संख्या बहुत कम है और जो लोग इसकी बात करते भी हैं उन्हें विरोध का सामना करना पड़ता है।

हाल ही में पाकिस्तानी सीनेटर सहर कामरान ने बाल विवाह निरोध (संशोधन) बिल पेश किया जिसे पाकिस्तानी सीनेटर समिति ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह बिल इस्लाम विरोधी है। सीनेट के अनुसार उन्होंने धर्मगुरुओं से भी बातचीत की और जिनक मानना है कि लड़कियों का विवाह 16 वर्ष या उससे पहले हो जाना चाहिए, अतः इस तरह के बिल को पास नहीं किया जा सकता। 16 साल की उम्र ही क्या होती है, और जब शादी हो गई तो उनकी पढ़ाई की बात कौन करेगा। इस सम्बन्ध में वहां ऐसा कोई कानून नहीं है जो लड़कियों का विवाह इतनी कम उम्र में करने से रोके। इतनी कम उम्र में शादी से ना ही केवल उनकी शिक्षा प्रभावित होती है बल्कि उनका शारीरिक और मानसिक विकास भी रुक जाता है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में लगभग 21% लड़कियों की शादी 18 साल से पहले हो जाती है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि वहां लड़कियों की क्या स्थिति है।

बिल पेश करने वाले सीनेटर सहर कामरान का कहना है कि अगर सरकार को ऐसा लगता है कि 16 साल में लड़कियां वयस्क हो जाती हैं तो उनका ड्राइविंग लाइसेंस और उनको वोटिंग का अधिकार इसी उम्र में मिल जाना चाहिए। उनका ये भी कहना है कि पाकिस्तान में 15 से 18 वर्ष के बीच की लड़कियों की मौत का प्रमुख कारण गर्भधारण करना है।

इस बात से अंदाज़ा लगया जा सकता है कि उनके साथ मानवीय व्यव्हार तो कतई नहीं हो रहा है। किसी लड़की के लिए यह बाध्यता क्यों कि वो 16 साल में ही शादी करे और यह तय करने धर्मगुरु कौन होते हैं। हालांकि, इस बिल से एक उम्मीद ज़रूर दिख रही है कि कोई है जिसे यह सब सामान्य और सही नहीं लगता और वह से बदलना चाहता है।

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