भूख ऐशा है जो बच्चे को रोड पर ला देते है |

Posted by Prakash Ranjan
October 17, 2017

भूख ऐशा है जो बच्चे को रोड पर ला देते है | आज मैं नया कहानी की खोज में दिल्ली का दिल कैन्ट प्लस गया और मेरी मुलाकत विजय से हुआ | जो दीवाली पर लात्तेन बना कर बेच रहे थे| ये स्कूल इश लिए जा रहे क्योकि इनके पापा दो साल पहले जा इश दुनिया जा चुके है |और अपने भोजन के लिए ये कर रहे है जो दिन भर इधर से उधर भागते फिरते रहते है | कोई मेरा हाथ का वनाया हुआ समान ले |  इसे हमारे घर में कुछ तो रोटी हो जो रात काट सके | एक तरफ माँ एक तरह दादा की याद आता है जिसके कारण मैं कहा जा पता स्कूल बहुत मन करता है स्कूल जा कुछ सिख लु | लेकिन हमे वह डर याद आता है अगर मैं स्कूल गया तो मेरे माँ और दादा एक वक़्त रोटी कौन देगा|

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