मुझे घिन आती है खुद में से

Posted by Sharda Dahiya
October 10, 2017

मेरे दिमाग में कई बार ये सवाल आता है कि मुझे लड़की ही क्यों बनाया और ये सवाल तब ज़रुर आता है जब कई नज़र मुझे नज़रों ही नज़रों से चीर रही होती है|कल मुझे भाई को छोड़ने रेलवे स्टेशन जाना था लाइन बहुत लम्बी होती है तो उसने कहा की तुम ले आओ ना टिकट|मैं अपने स्टडी रूम से उठकर चली गई थी जाहिर सी बात है खुले खुले कपड़े लोवर और टीशर्ट बिना ब्रा के ही |मेरा सीढ़ियाँ चढ़ना और लड़कों का वो चुभने वाली नज़रों से देखना एक पल के लिए मेरा आत्मविश्वास हिला गया था मैंने अपनी सारी ऊर्जा समेटी और चलती रही लगा की आज रुक गई तो कैसे जिन्दगी से रूबरू होउंगी |लड़के तो लड़के 40-50 साल के अंकल भी खा जाने की जैसी नज़रों से देखते है|मेरे कदम चलते रहे में लेकर आगई और आते आते कुछ कुछ सीख कर भी आई थी की ये नजरे मेरे कदमों को रोकने का जज्बा नहीं रखती|सवाल फिर भी दिमाग में घूमता रहा की लडकों का चलो मान भी लिया की उनकी उम्र है विपरीत लिंग का आकर्षण मगर ये अंकल टाइप लोग क्यों ऐसा सा बिहेव करते हैं | उनकी जिन्दगी के कम से कम 20-30 साल इन्ही सब में निकल गये है शादी हुई बीवी आई सब देख चुके है महसूस कर चुके है जी चुके है फिर ऐसा कौनसी वासना रह जाती है .ऐसा कौनसा frustration  और निराशा होती है रह जाती और उनको मजबूर कर देती है खीसें निपोरने को |एक दो दोस्त है मेरी फेसबुक पर उन्होंने कई बार कहा मुझे की यार ये लड़कों से ज्यादा ये अंकल टाइप लोग बहुत परेशान करते है पहले तो बेटा-बेटा  फिर वही   खाने को तैयार रहते है की  मौका मिले और कब टूट पड़े | एक दोस्त है हमारा  लड़का घरवालों से छुप छुप कर प्यार की पींगे बढ़ा रहे थे लड़की की सुरक्षा को ध्यान  रख कर फेक id बनाई और बस बतियाते थे अपनी मोहतरमा से एक दिन किसी हाई रैंक ऑफिसर का  रेकुस्ट आया जो रिटायर्ड थे  कर लिया एक्सेप्ट |मगर जनाब का  लहजा ऐसा की वो लड़का शरमा गया बताते-बताते ऑफिसर साहब की फॅमिली गदरिंग की फोटो पर सब कमेंट कर रहे है की सर ऐसे लग रहे हो,सर वैसे लग रहे हो ? मगर वही जनाब उस दोस्त को मैसेज कर रहे हो “जान नम्बर दो ना ,अकेला होगया हूँ बेबी ,प्लीज जान गिवे मी अ  कॉल” |क्या है ये ? हम उसी समाज में रहते है अभी जा माँ बाप हार बात पर हमें बड़ों की इज्जत करने की सीख देते हैं | कहाँ चले जाते है ऐसे वक्त पर वो समाज के ठेकेदार जिनको अंतरजातीय विवाह में बुराई लगती है ,  जिनको लड़कियों की जीन्स से दिक्कत होती है ,जिनको लड़कियों के मोबाइल फ़ोन से दिक्कत होती है कहाँ है वो रक्षक ? कितनी बार ही हमारे रिश्तेदार जो थोड़े उम्रदराज़ होते है नमस्ते के बाद हाथ सर से फिसल कर ब्रा की स्ट्रैप पर ही जाकर रुकता है उनका …  ऐसा क्या पा लेना चाहते है वो उस छुन से एक लड़की को इतना महत्वहीन बना कर | जिन्दगी के 20-30 साल इन्ही अहसास में गुजार कर आये है वो जब तब मन नहीं भरा तो अब क्या गारंटी है इस यदा कदा छूने से ,ताक झांक करने से मन को , या दिल  के अरमानों को Orgasm प्राप्त हो ही जायगा | कभी लगे वक्त तो बैठकर सोचिएगा जरुर आपकी इन्ही हरकतों की वजह से दिल कहता है की मैं बेटी पैदा ही  ना करूं बेटा ही पैदा करूं कैसे झेल पायेगी मेरी बेटी ये सब | कभी-कभी दिल इस  कद्र घिन से भर जाता है की इन हरकतों की वजह से की घर से बाहर पैर रखने से पहले खुद को कैद कर लेने जैसा ख्याल आता है | ये सब झेल कर  जब घर पहुंचती हूँ तो खुद में से हवस की बदबू महसूस होती है जो आपके दिमाग से उतर कर मेरे दिमाग और दिल में डर और घिन बन कर रच बस  जाती है …|