मैं राष्ट्रवादी नहीं लेकिन फिर भी उनसे बड़ा देशभक्त हूं।

Posted by Saurabh Baghel
October 14, 2017

Self-Published

फ्रेंच लेखक अल्बेयर कामू ने कहा था कि मैं अपने देश को इतना प्यार करता हूं कि मैं राष्ट्रवादी नहीं हो सकता।

आज लोगों में भावना बन रही है कि राष्ट्रवादी मतलब होता है देशभक्त और गैर राष्ट्रवादी मतलब देशद्रोही। जो बिल्कुल गलत है।

संविधान की आत्मा (प्रस्तावना )में लिखा गया है कि भारत एक लोकतंत्रात्मक, गणतंत्रात्मक, धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है यानी धर्मनिरपेक्ष ना कि राष्ट्रवादी चलिये आगे समझते कि इनमें क्या अंतर है।

धर्मनिरपेक्षता क्या है
एक ऐसा देश जिसका कोई एक धर्म ना हो ,यानि सभी धर्म उसके हो कोई एक नही ।मतलब मेरा संविधान देश के सभी धर्म चाहे हिंदू ,मुस्लिम, सिख और इसाई सभी को समान मानता है। सब को पूरी आजादी से अपने धर्म का विस्तार करने का अधिकार देता हैं ।

जबकि राष्ट्रवाद केवल एक धर्म और संस्कृति को बढ़ावा देने की बात करता है। वह दूसरे धर्मों को कोई महत्व नहीं देता और खुद के धर्म को ही सर्वश्रेष्ठ मानता है ।जो उसके अनुयायियों को कट्टर बनने पर मजबूर भी करता है।

राष्ट्रवाद के कारण ही लोग गाय के नाम पर लोगों की हत्या करते हैं और राष्ट्रवाद के नाम पर ही कश्मीर में जिहाद कि आड़ में आतंकवादी घटनाएं होती हैं। क्योंकि यह लोग भी केवल अपने धर्म को ही सर्वश्रेष्ठ मानते हैं इनके लिये मानवता का कोई मोल नहीं है ।यह तो अपने धर्म को बढ़ाने के लिये किसी भी हद तक जा सकते है ।

आज लोगों के अंदर यह धारणा भी है कि राष्ट्रवाद मतलब देशभक्ति, जबकि इन दोनों बातों का कोई तालमेल नहीं है राष्ट्रवाद का मतलब है अपने धर्म और संस्कृति को मजबूती से बढ़ाना अब वह हिंदू धर्म भी हो सकता है और मुस्लिम भी।

शहीद भगतसिंह, रविंद्रनाथ टैगोर, महात्मा गांधी जी समेत ऐसे कई बड़े महान व्यक्तियों ने अपने आप को कभी राष्ट्रवादी नहीं माना क्योंकि उनकी लड़ाई अपने धर्म व संस्कृति के लिए नहीं देश के लिए थी। अपना देश सभी धर्मों को  साथ लेकर  चलने पर मजबूत होता है इसलिए मैं भी कहता हूं कि मैं राष्ट्रवादी नहीं लेकिन फ़िर भी उनसे बड़ा  देशभक्त हूँ ।

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