मोदी सरकार ने सूचना के अधिकार कानून का बनाया मज़ाक, “सलीम बैग” को जानकारी नहीं दे रहा PMO

Posted by Mohammad Aadil
October 1, 2017

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मुहम्मद आदिल

1 अक्टूबर 2017 मुरादाबाद

सलीम बेग से बात चीत और सुचना पत्रो पर आधारित।

प्रधानमंत्री कार्यालय लगातार देश के नागरिकों द्वारा सूचना के अधिकार के तहत मांगी जा रही सूचनाएं न देकर इस कानून की धार को कुंद कर रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय से 19मई 2017 को तीन बिंदुओं पर सूचनांए मांगी गई थीं। जिसमें बीते तीन वित्तीय वर्षों में महामहिम राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विदेशमंत्री को विदेशों से मिलने वाले उपहारों का ब्योरा, चार्टर्ड प्लेन और इंडियन एयरलाइंस पर किए गए यात्रा खर्च की जानकारी मांगी गई थी।

प्रतिनिधि मंडल में सदस्यों के नाम और पते विदेशों के नाम, प्रधानमंत्री और विदेशमंत्री द्वारा की गई विदेशी यात्राओं के सापेक्ष भारत को मिलने वाले लाभ, कारोबार का विवरण वर्षवार, विभागवर और विदेश् वार मांगा गया था। प्रधानमंत्री कार्यालय से प्रवीण कुमार उच्च सचिव एवं केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी ने 17 जून 2017 को प्रेषित अपने पत्र में वादी को सूचना देते हुआ बताया कि प्रधानमंत्री के विदेश दौरों की सूची और उन दौरों में प्रयुक्त चार्टर्ड फ्लाइट पर हुए खर्च के संबंध में सूचना प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर उपलब्ध है। लेकिन जब वादी सलीम बेग ने काफी मशक्कत के बाद वेबसाइट पर सर्च किया तो उन्हें मांगी गई सूचनाओं की जानकारी वेबसाइट पर नहीं मिली।

दूसरे प्रश्न के उत्तर में प्रधानमंत्री कार्यालय ने विदेश यात्रा पर प्रधानमंत्री और विदेशमंत्री के साथ गए प्रतिनिधि मंडल के नाम पतों की सूचनाएं देने से साफ़ इंकार कर दिया और वाजिब मिलने वाली सूचनाएं भी उपलब्ध नहीं कराईं। उक्त सूचना को दिए जाने के संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी का स्पष्ट रूप से कहना है कि प्रधानमंत्री के शिष्टमंडल के सदस्यों के नाम पतों की सूची के प्रकटन में सुरक्षा निहितार्थ है और इसे सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 8(1)(छ) के तहत छूट प्राप्त है।

प्रधानमंत्री कार्यालय प्रवीण कुमार के इस कथन को वादी सलीम बेग ने गैर क़ानूनी बताते हुए कहा है कि प्रतिवादी द्वारा उक्त अधिनियम की धारा 8(1)(छ) की मनमानी और गलत व्याख्या की है उन्होंने कहा कि अधिनियम में ऐसा कोई उल्लेख नहीं है कि प्रधानमंत्री के साथ विदेश यात्रा पर जाने वाले शिष्टमंडल के सदस्यों के नाम पतों की सूची सार्वजनिक नहीं की जाएगी।

बेग का कहना है कि मुझे सूचना का अधिकार क़ानून ने यह जानने का पूरा हक़ दिया है कि मेरे पैसे से कौन व्यक्ति विदेश गया।  इसमें देश की गोपनीयता और सुरक्षा की कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री कार्यालय के इस जवाब से पी एमओ  के कामकाज पर ज़रूर प्रश्नचिन्ह लग गया है।

तीसरे सवाल का जवाब भी प्रधानमंत्री कार्यालय ने नहीं दिया। पूछा गया था कि पिछले तीन वर्षों के प्रधानमंत्री और विदेशमंत्री द्वारा की गई विदेश यात्राओं के सापेक्ष भारत को मिलने वाला लाभ और कारोबार का विवरण विदेशवार वर्षवार दिया जाए। इसके जवाब में प्रतिवादी द्वारा यह कहते हुआ सूचनाएं नहीं दी गई कि मांगी गई जानकारी इस कार्यालय द्वारा धारित अभिलेखों का हिस्सा नहीं है।

प्रधानमंत्री कर्यालय के इस कथन को भी गैर कानूनी बताते हुए कहा गया कि नियमानुसार प्रतिवादी को उक्त बिंदु की सूचना दिए जाने के लिए आरटीआई की धारा 6(3) का प्रयोग करना चाहिए था जोकि उन्होंने नहीं किया।

आखिरी सवाल की जानकारी नहीं विदेश मंत्रालय द्वारा उपलब्द नहीं कराई गई जिसमें विदेशों से मिलने वाले उपहारों की जानकारी मांगी गई थी। विदेश मंत्रालय के प्रेम सिंह चौहान ने 28जून 2017 को भेजे अपने पत्र में आरटीआई की धारा 7(9) के अनुसार  सूचना देने से इंकार किया। इस पूरे मामले के संबंध में आरटीआई कार्यकर्ता सलीम बेग का कहना है कि जब से मोदी प्रधानमंत्री बने हैं तब बाक़ायदा सूचनाओं को छिपाने का कार्य बड़े पैमाने पर चल रहा है।

दरअसल इन सूचनाओं को छिपाना इस और इशारा करता है कि आम जनता के टेक्स के पैसे से विदेश में मोदी सेर सपाटा कर रहे है। और अपने साथ अडानी अम्बानी के एजेंट के तौर पर विदेश जाते है उन की कंपनियो को विदेश के दौरों से फायदा पहुंचाते है अगर मोदी के दौरों से देश को फायदा हो रहा है तो पी ऍम ऑफिस इस को छुपा क्यों रहा है।

(सलीम आरटीआई  विशेषज्ञ और रिसर्चर हैं)

लेखक नेचर वाच में उप संपादक है।

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