विरोध नहीं सवाल ! ??

Posted by Fahad Ahmad
October 9, 2017

Self-Published

आज के माहौल में अक्सर लोगों को लगता है के सवाल उठाने का मतलब विरोध होता है

जबकि हमे सिखाया गया था के हर सवाल हमे एक बेहतर जवाब की तरफ लेके जाता है |

सवाल इस बात की गवाई भी देता है के हम ज़िंदा है और हमारे अंदर सोचने समझने की शक्ति है |

आज में एक सवाल पूछना चाहता हु जिसका मतलब विरोध कतई नहीं है |

यह तस्वीर अपने आप में स्वच्छ भारत की कहनी बयान कर रही है |

आज मेरा सवाल स्वच्छ भारत की बात करने वालों से है|

हम सब चाहते है के भारत स्वच्छ बने लेकिन उसके क्या मापदंड होंगे इसकी चर्चा करना अत्यंत जरूरी है |

आज इस लेख से में अपनी रीसर्च की फील्ड वर्क की यादें ताज़ा करना चाहता हु एक ऐसी याद जो स्वच्छ भारत की बात करने वालो से सवाल करती है के यह बातें सिर्फ कागज़ी खाना पूर्ति के लिए है या सच में कुछ होना है |

लग भग तीन साल हो गए है स्वच्छ भारत की सुरूरत हुए और तीनं ही साल हुए है मुज़फ्फरनगर दंगो को हुए |

तीन साल बाद भी दंगो के पीड़ित सरणाथियो को टॉयलेट नसीब नहीं हुए है |

जिला शामली में कांधला के पास नाहिद हसन कॉलोनी की हालत यह है के ५० से जायदा लोगों को इस टूटी हुई कपडे की दिवार वाली टॉयलेट में जाना पड़ता है |

क्या किसी भी अधिकारी को यह खबर नहीं थी के यहाँ भी टॉयलेट की ज़रूरत हो सकती है ??

खैर यह तो सिर्फ एक इलाके की बात है ऐसी कितनी तसवीरें हमारे ज़हन में है जो सवाल पूछती है के स्वच्छ भारत की बात करने वालों यह दोहरापन तुम्हारी बातों और काम में क्यों है ??

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